{"_id":"5c04f4c4bdec224143674492","slug":"chandigarh-traffic-police-will-start-e-challan-system","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़ी राहतः ट्रैफिक चालान की रफ्तार रहेगी जारी, लेकिन अब ई-चालान से भुगतान की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़ी राहतः ट्रैफिक चालान की रफ्तार रहेगी जारी, लेकिन अब ई-चालान से भुगतान की तैयारी
अविनाश शर्मा, न्यूज डेस्क, चंडीगढ़
Updated Mon, 03 Dec 2018 02:48 PM IST
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चंडीगढ़ में अब यातायात नियमों की उल्लंघना पर चालान के भुगतान के लिए वाहन चालकों को मुश्किल मोड ऑफ पेमेंट का सामना करना पड़ता है। ट्रैफिक लाइन-29 में जाकर भुगतान के लिए लगी लंबी-लंबी कतार में कई घंटे खड़े भी रहना पड़ता है। फिर यदि ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम में कोई टेक्निकल समस्या आ जाए तो लोगों को चालान के भुगतान के लिए करीब डेढ़-दो महीने तक परेशानी झेलने को भी मजबूर होना पड़ता है। लेकिन केंद्र सरकार की ई-चालान योजना के तहत यूटी की ट्रैफिक पुलिस जल्द ही चालान के मोड ऑफ पेमेंट को ऑनलाइन करने जा रही है।
वाहन चालक अब यातायात नियमों की उल्लंघना करते पकड़े जाने पर मौके पर ही चालान का भुगतान कर सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस अब जल्द ही हाथ में ई-डिवाइस लिए सड़कों पर मुस्तैद होगी। दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस की तर्ज पर चंडीगढ़ पुलिस भी यातायात नियमों की अवहेलना के आरोपी वाहन चालकों से मौके पर ही भुगतान राशि वसूल सकेगी। पहले चरण में ट्रैफिक पुलिस करीब 15-20 डिवाइस इस्तेमाल करेगी और फिर आवश्यकतानुसार और डिवाइस भी खरीदे जाएंगे। मामले में पुलिस के पीआरओ डीएसपी पवन कुमार को कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
ट्रैफिक की चारों डिवीजन में होंगे इस्तेमाल
ट्रैफिक व्यवस्था के लिए ई-डिवाइस को व्यवहार में लाए जाने पर इसका इस्तेमाल ट्रैफिक की ईस्ट डिवीजन, सेंट्रल डिवीजन, साउथ डिवीजन और साउथ वेस्ट डिवीजन में किया जाएगा। आगामी चंद दिनों में ही ट्रैफिक पुलिस वाहन चालकों से यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर मौके पर भुगतान राशि वसूलती दिखेगी। इससे ट्रैफिक लाइन में तैनात स्टाफ का काम कुछ हद तक हल्का होगा। इससे यूटी पुलिस भी वीवीआइपी ड्यूटी समेत अन्य आयोजनों पर ट्रैफिक लाइन के पुलिसकर्मियों से वहां ड्यूटी ले सकेगी।
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इन वॉयलेशन का कोर्ट में ही करना पड़ेगा भुगतान
ड्रंकन ड्राइव समेत डेंजरस ड्राइविंग, साइकिल ट्रैक पर वाहन खड़े करने के चालान समेत चंद अन्य वॉयलेशन का भुगतान ई-डिवाइस से न होकर कोर्ट में ही करना होगा। इन वॉयलेशन में पकड़े गए आरोपी वाहन चालकों का रिकॉर्ड ट्रैफिक लाइन का स्टाफ पहले की तर्ज पर कोर्ट में भेजेगा और वहीं पर भुगतान राशि वसूली जाएगी।
आरएलए और ट्रैफिक पुलिस का सॉफ्टवेयर होगा कनेक्ट
ई-चालान के पूरी तरह व्यवहार में आने पर ट्रैफिक पुलिस और आरएलए, आरटीओ ऑफिस का चालान सॉफ्टवेयर कनेक्टर होगा। इसके चलते ट्रैफिक पुलिस जिन किन्हीं भी वाहन चालकों का चालान करेगी, उस आरोपी की नई, पुरानी सभी डिटेल आरएलए ऑफिस में भी दिखाई देगी। बार-बार ट्रैफिक वॉयलेशन करने वाले आरोपी वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस तक सस्पेंड किए जाएंगे। ई-चालान प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित होने पर स्टेशनरी भी खराब होने से बच सकेगी।
डिजी लॉकर को व्यवहार में आने में फिलहाल समय
डिजीटल इंडिया की दिशा में सरकार ने लोगों के लिए डिजी लॉकर सुविधा शुरू की है। इस योजना में लोग निजी दस्तावेज डिजी लॉकर अकाउंट बनाकर उसमें रखे जा सकते हैं। यह अकाउंट आधार कार्ड से सत्यापित होगा। चालान के भुगतान के लिए भी आगामी समय में वाहन चालकों को अपने दस्तावेज हार्ड कॉपी के रूप में लेकर घूमने नहीं होंगे। हरियाणा सरकार ने हाल ही में लोगों को उनके दस्तावेजों के इलेक्ट्रिॉनिक वर्जन को रखने की अनुमति प्रदान की है। चंडीगढ़ की ट्रैफिक व्यवस्था में भी जल्द ही लोग डिजी लॉकर में रखे डीएल व आरसी समेत अन्य दस्तावेज पुलिस को दिखाकर चालान का भुगतान कर सकेंगे। पुलिसकर्मी डिजी लॉकर से ही दिखाए गए दस्तावेज वेरिफाई करेंगे लेकिन यूटी की ट्रैफिक पुलिस को डिजी लॉकर सुविधा को व्यवहार में लाने के लिए किन्हीं कारणों से फिलहाल कुछ समय लगेगा।
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वाहन चालक अब यातायात नियमों की उल्लंघना करते पकड़े जाने पर मौके पर ही चालान का भुगतान कर सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस अब जल्द ही हाथ में ई-डिवाइस लिए सड़कों पर मुस्तैद होगी। दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस की तर्ज पर चंडीगढ़ पुलिस भी यातायात नियमों की अवहेलना के आरोपी वाहन चालकों से मौके पर ही भुगतान राशि वसूल सकेगी। पहले चरण में ट्रैफिक पुलिस करीब 15-20 डिवाइस इस्तेमाल करेगी और फिर आवश्यकतानुसार और डिवाइस भी खरीदे जाएंगे। मामले में पुलिस के पीआरओ डीएसपी पवन कुमार को कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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ट्रैफिक की चारों डिवीजन में होंगे इस्तेमाल
ट्रैफिक व्यवस्था के लिए ई-डिवाइस को व्यवहार में लाए जाने पर इसका इस्तेमाल ट्रैफिक की ईस्ट डिवीजन, सेंट्रल डिवीजन, साउथ डिवीजन और साउथ वेस्ट डिवीजन में किया जाएगा। आगामी चंद दिनों में ही ट्रैफिक पुलिस वाहन चालकों से यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर मौके पर भुगतान राशि वसूलती दिखेगी। इससे ट्रैफिक लाइन में तैनात स्टाफ का काम कुछ हद तक हल्का होगा। इससे यूटी पुलिस भी वीवीआइपी ड्यूटी समेत अन्य आयोजनों पर ट्रैफिक लाइन के पुलिसकर्मियों से वहां ड्यूटी ले सकेगी।
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इन वॉयलेशन का कोर्ट में ही करना पड़ेगा भुगतान
ड्रंकन ड्राइव समेत डेंजरस ड्राइविंग, साइकिल ट्रैक पर वाहन खड़े करने के चालान समेत चंद अन्य वॉयलेशन का भुगतान ई-डिवाइस से न होकर कोर्ट में ही करना होगा। इन वॉयलेशन में पकड़े गए आरोपी वाहन चालकों का रिकॉर्ड ट्रैफिक लाइन का स्टाफ पहले की तर्ज पर कोर्ट में भेजेगा और वहीं पर भुगतान राशि वसूली जाएगी।
आरएलए और ट्रैफिक पुलिस का सॉफ्टवेयर होगा कनेक्ट
ई-चालान के पूरी तरह व्यवहार में आने पर ट्रैफिक पुलिस और आरएलए, आरटीओ ऑफिस का चालान सॉफ्टवेयर कनेक्टर होगा। इसके चलते ट्रैफिक पुलिस जिन किन्हीं भी वाहन चालकों का चालान करेगी, उस आरोपी की नई, पुरानी सभी डिटेल आरएलए ऑफिस में भी दिखाई देगी। बार-बार ट्रैफिक वॉयलेशन करने वाले आरोपी वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस तक सस्पेंड किए जाएंगे। ई-चालान प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित होने पर स्टेशनरी भी खराब होने से बच सकेगी।
डिजी लॉकर को व्यवहार में आने में फिलहाल समय
डिजीटल इंडिया की दिशा में सरकार ने लोगों के लिए डिजी लॉकर सुविधा शुरू की है। इस योजना में लोग निजी दस्तावेज डिजी लॉकर अकाउंट बनाकर उसमें रखे जा सकते हैं। यह अकाउंट आधार कार्ड से सत्यापित होगा। चालान के भुगतान के लिए भी आगामी समय में वाहन चालकों को अपने दस्तावेज हार्ड कॉपी के रूप में लेकर घूमने नहीं होंगे। हरियाणा सरकार ने हाल ही में लोगों को उनके दस्तावेजों के इलेक्ट्रिॉनिक वर्जन को रखने की अनुमति प्रदान की है। चंडीगढ़ की ट्रैफिक व्यवस्था में भी जल्द ही लोग डिजी लॉकर में रखे डीएल व आरसी समेत अन्य दस्तावेज पुलिस को दिखाकर चालान का भुगतान कर सकेंगे। पुलिसकर्मी डिजी लॉकर से ही दिखाए गए दस्तावेज वेरिफाई करेंगे लेकिन यूटी की ट्रैफिक पुलिस को डिजी लॉकर सुविधा को व्यवहार में लाने के लिए किन्हीं कारणों से फिलहाल कुछ समय लगेगा।