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‘लोग पानी को तरस रहे और प्रशासन लाखों लीटर पीने के पानी को सुखना में बहा रहा’

Wed, 18 Jan 2017 01:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 18 Jan 2017 01:12 AM IST
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Chandigarh sukhna lake water treatment, chandigarh news
सुखना लेक - फोटो : अमर उजाला
यूटी प्रशासन की ओर से सुखना लेक के जलस्तर को बढ़ाने के लिए भूजल का इस्तेमाल करने के फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। सेक्टर-48 निवासी दीप्ति ने याचिका दाखिल कर कहा कि एक ओर लोग पीने के पानी को तरस रहें हैं और सरकार भूजल स्तर को बरकरार रखने का प्रयास कर रही है तो वहीं दूसरी ओर, पीने का पानी सुखना में बहाने का फैसला ले लिया गया। इस याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इसे उसे बेंच को रेफर कर दिया गया, जो सुखना के गिरते जलस्तर मामले में सुनवाई कर रही है।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए दीप्ति ने कहा कि सुखना लेक में पीने के पानी को पाइप के माध्यम से लेकर जाने का प्रशासन का फैसला नेशनल वाटर पॉलिसी 2002 के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ 114 वर्ग किलोमीटर में फैला क्षेत्र है और यहां की आबादी लगभग 11 लाख है, जो लगातार बढ़ती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या के चलते लोगों की पानी की जरूरतें भी बढ़ रही हैं।
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प्रशासन ने भूजल स्तर को कायम रखने के लिए पार्क और लॉन में ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके सुखना में पीने के साफ पानी को डालना सीधे तौर पर मौलिक अधिकारों का हनन है, जिसमें पीने के पानी का हक भी शामिल है। यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली में 28 जुलाई 2010 को पानी के अधिकार को मंजूरी दी गई थी। 
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'सुखना में क्यों बहा रहे पीने का पानी'

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यूनाइटेड नेशन और डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन साफ पानी की आवश्यकता 50 से 100 लीटर की है, जो उपलब्ध होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एमसी मेहता मामले में आदेश सुनाते हुए कहा था कि पानी सामाजिक संपत्ति है। पानी का इस्तेमाल प्राथमिकता के तौर पर पीने और खेती के लिए होना चाहिए। याची ने कहा कि चंडीगढ़ में गर्मियों के समय में पहली और दूसरी मंजिल पर रहने वालों को पीने के पानी की समस्या से जूझना पड़ता है और ऐसे में पीने केपानी को सुखना लेक में डालने पर रोक लगाई जाए। पीआईएल बेंच ने इस मामले को सुनवाई के लिए पूर्व में सुखना मामले को सुन रही बेंच को रेफर कर दिया।

यहां हुआ था पाइप से सुखना भरने का फैसला
सुखना लेक के जलस्तर को बढ़ाने वाली याचिका पर दिसंबर माह में प्रशासन ने बताया था कि प्रशासन ने ट्यूबवेल के माध्यम से सुखना को भरने का फैसला लिया है। ट्यूबवेल की पाइप गोल्फ क्लब तक तो है और इसके आगे की 450 मीटर की दूरी को पूरा करने के लिए पाइप लाइन बिछाने का टेंडर जारी करने की प्रक्रिया को आरंभ कर दिया गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए आगे बताया गया था कि 7 ट्यूबवेलों से सुखना को भरने के लिए 15 जनवरी से लेकर 28 मार्च तक लगातार सप्लाई जारी रखी जाएगी।

इसके बाद पीने के पानी की बढ़ती मांग को देखने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। प्रशासन की ओर से बताया गया था कि 7 ट्यूबवेलों से 2 से 4 मिलियन गैलन पानी प्रतिदिन सुखना में डाला जा सकता है। इससे इस अवधि के दौरान करीब ढ़ाई फीट से अधिक सुखना का जलस्तर बढ़ाया जा सकेगा। हाईकोर्ट ने इसपर संतुष्टि जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को रखी थी। अब इस याचिका पर सुनवाई भी उसी मामले के साथ होगी।
 
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