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स्टेट कमीशन की टिप्पणी- जूते खरीदने के बाद हाथों में नहीं ले जा सकता ग्राहक, तो कैरी बैग दें
Sat, 03 Aug 2019 12:47 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 03 Aug 2019 12:47 PM IST
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फाइल फोटो
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कस्टमर जूते खरीदता है तो वह उसे अपने घर या गाड़ी तक हाथों में ले नहीं जा सकता। कैरी बैग मुहैया कराने की जिम्मेदारी से कंपनियां भाग नहीं सकतीं। यह टिप्पणी स्टेट कमीशन ने बाटा की याचिका को खारिज करते हुए की। बाटा ने फोरम के आदेशों को स्टेट कमीशन में चुनौती दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया। स्टेट कमीशन ने अपने आदेशों के कई ऐसे केसों का हवाला दिया, जिसमें जबरन ग्राहकों से कैरीबैग के पैसे वसूले जा रहे थे।
स्टेट कमीशन ने लाइफस्टाइल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड वर्सेज पंकज चांदगोठिया के केस का भी हवाला दिया, जिसमें कमीशन ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि कैरी बैग के पैसे चार्ज करना कंपनियों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। बड़े रिटेल स्टोर ग्राहकों को लुभाने के लिए 60 से 70 फीसदी तक डिस्काउंट ऑफर करते हैं, क्या वे 10 रुपये का कैरी बैग मुफ्त में नहीं दे सकते। अगर कंपनियां सही मायने में ही पर्यावरण का ध्यान रखती हैं तो उन्हें अपने ग्राहकों को मुफ्त में कैरीबैग देना चाहिए।
स्टेट कमीशन ने बाटा के खिलाफ फोरम की ओर से सुनाए गए आदेशों को बरकरार रखा है। अब बाटा को आने वाले सभी ग्राहकों को मुफ्त में कैरी बैग देना होगा। साथ ही शिकायतकर्ता को बाटा कंपनी को पेपर कैरीबैग के लिए चार्ज किए गए 3 रुपये लौटाना होगा। मानसिक पीड़ा व उत्पीड़न के लिए 3 हजार और एक हजार रुपये मुकदमा खर्च देना होगा। कंपनी को राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ के सेक्रेटरी के नाम पर कंज्यूमर लीगल ऐड अकाउंट में 5 हजार रुपये भी जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
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स्टेट कमीशन ने लाइफस्टाइल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड वर्सेज पंकज चांदगोठिया के केस का भी हवाला दिया, जिसमें कमीशन ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि कैरी बैग के पैसे चार्ज करना कंपनियों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। बड़े रिटेल स्टोर ग्राहकों को लुभाने के लिए 60 से 70 फीसदी तक डिस्काउंट ऑफर करते हैं, क्या वे 10 रुपये का कैरी बैग मुफ्त में नहीं दे सकते। अगर कंपनियां सही मायने में ही पर्यावरण का ध्यान रखती हैं तो उन्हें अपने ग्राहकों को मुफ्त में कैरीबैग देना चाहिए।
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स्टेट कमीशन ने बाटा के खिलाफ फोरम की ओर से सुनाए गए आदेशों को बरकरार रखा है। अब बाटा को आने वाले सभी ग्राहकों को मुफ्त में कैरी बैग देना होगा। साथ ही शिकायतकर्ता को बाटा कंपनी को पेपर कैरीबैग के लिए चार्ज किए गए 3 रुपये लौटाना होगा। मानसिक पीड़ा व उत्पीड़न के लिए 3 हजार और एक हजार रुपये मुकदमा खर्च देना होगा। कंपनी को राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ के सेक्रेटरी के नाम पर कंज्यूमर लीगल ऐड अकाउंट में 5 हजार रुपये भी जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
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यह था मामला
सेक्टर-23 बी चंडीगढ़ निवासी दिनेश प्रसाद रतूड़ी ने फोरम में सेक्टर-22डी स्थित बाटा इंडिया लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि 5 फरवरी 2019 को वह बाटा कंपनी की शॉप पर जूते खरीदने के लिए गए थे। उन्होंने अपने पसंद के जूते चुन लिए और इसके लिए कंपनी की ओर से 402 रुपये का बिल बनाया गया।
कंपनी के कैशियर ने कैरी बैग में डालकर उन्हें शूज दे दिए, जिस पर बाटा का विज्ञापन भी था। इस कैरी बैग के लिए उनसे 3 रुपये चार्ज किए गए। मामला कंज्यूमर फोरम पहुंचा तो फोरम ने बाटा पर जुर्माना और सभी को कैरी बैग मुफ्त में देने के आदेश जारी करते हुए कहा कि कंपनी ग्राहकों को कैरीबैग खरीदने के लिए विवश कर सेवा में कोताही कर रही है।
कंपनी के कैशियर ने कैरी बैग में डालकर उन्हें शूज दे दिए, जिस पर बाटा का विज्ञापन भी था। इस कैरी बैग के लिए उनसे 3 रुपये चार्ज किए गए। मामला कंज्यूमर फोरम पहुंचा तो फोरम ने बाटा पर जुर्माना और सभी को कैरी बैग मुफ्त में देने के आदेश जारी करते हुए कहा कि कंपनी ग्राहकों को कैरीबैग खरीदने के लिए विवश कर सेवा में कोताही कर रही है।