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Chandigarh: स्मार्ट सिटी को केंद्र से बजट मिलना बंद, खर्च कम करने के लिए स्टाफ में कटौती
Thu, 15 Aug 2024 01:35 PM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 15 Aug 2024 01:35 PM IST
सार
केंद्र ने सीएससीएल को कुल 958.18 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिसमें से 937.10 करोड़ रुपये विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च हो चुके हैं। कुल मिलाकर 97.80 प्रतिशत फंड का उपयोग किया गया है।
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चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड को हर साल मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद हो गई है। अब अधिकारी इस दुविधा में हैं कि सेक्टर-17 स्थित आईसीसीसी और पब्लिक बाइक शेयरिंग (पीबीएस) प्रोजेक्ट को खुद चलाएं या नगर निगम-प्रशासन को सौंप दें। स्मार्ट सिटी की बोर्ड की बैठक में भी इस पर चर्चा हो चुकी है।
स्मार्ट सिटी, केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे जून 2015 में 'स्मार्ट सॉल्यूशंस' के अनुप्रयोग के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाना था। पहले चरण में 100 शहरों को चुना गया, जिसमें से चंडीगढ़ भी शामिल था। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) ने अपनी कुल 97 परियोजनाओं में से 94 को पूरा कर लिया है। इसमें करीब 330 करोड़ रुपये से आईसीसीसी-पीसीसीसी बनाया गया है। अब सिर्फ पब्लिक बाइक शेयरिंग, स्ट्रीट लाइट की ऑनलाइन निगरानी और मृत पशुओं के संस्कार के लिए प्लांट का प्रोजेक्ट ही बाकी रह गया है। इसमें से आईसीसीसी और पीबीएस ही ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन्हें फंड की जरूरत पड़ेगी।
अब क्योंकि केंद्र से मदद नहीं मिलेगी तो अधिकारी दुविधा में हैं कि इन दोनों प्रोजेक्ट को खुद चलाएं या प्रशासन-निगम को सौंप दें। खुद चलाएं तो इसके लिए क्या मॉडल अपनाया जाए, जिससे राजस्व की प्राप्ति हो और अगर सौंपने की नौबत आती है, तो किसे सौंपा जाए। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी की बोर्ड की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई और तय हुआ है कि चंडीगढ़ अन्य शहरों के स्मार्ट सिटी के मॉडल को स्टडी करेगा कि उन्होंने क्या किया। उन्होंने किस आधार पर और किसे प्रोजेक्ट सौंपे हैं, उसके आधार पर ही चंडीगढ़ में विचार किया जाएगा। अगली बोर्ड की बैठक में अधिकारियों की तरफ से इस संबंध में रिपोर्ट पेश की जानी है।
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आईसीसीसी-पीसीसीसी - 330 करोड़
मनीमाजरा 24 घंटे पानी की परियोजना - 75 करोड़
शहर के चार स्मार्ट स्कूल
पब्लिक बाइक शेयरिंग
कूड़े की गाड़ियां खरीदी गईं
लीगेसी वेस्ट को प्रोसेस कर करीब 20 एकड़ की जमीन खाली
तीन एमआरएफ केंद्र
7.50 एकड़ पर सेनेटरी लैंडफिल साइट का निर्माण
आईएम चंडीगढ़ मोबाइल एप
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स्मार्ट सिटी, केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे जून 2015 में 'स्मार्ट सॉल्यूशंस' के अनुप्रयोग के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाना था। पहले चरण में 100 शहरों को चुना गया, जिसमें से चंडीगढ़ भी शामिल था। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) ने अपनी कुल 97 परियोजनाओं में से 94 को पूरा कर लिया है। इसमें करीब 330 करोड़ रुपये से आईसीसीसी-पीसीसीसी बनाया गया है। अब सिर्फ पब्लिक बाइक शेयरिंग, स्ट्रीट लाइट की ऑनलाइन निगरानी और मृत पशुओं के संस्कार के लिए प्लांट का प्रोजेक्ट ही बाकी रह गया है। इसमें से आईसीसीसी और पीबीएस ही ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन्हें फंड की जरूरत पड़ेगी।
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अब क्योंकि केंद्र से मदद नहीं मिलेगी तो अधिकारी दुविधा में हैं कि इन दोनों प्रोजेक्ट को खुद चलाएं या प्रशासन-निगम को सौंप दें। खुद चलाएं तो इसके लिए क्या मॉडल अपनाया जाए, जिससे राजस्व की प्राप्ति हो और अगर सौंपने की नौबत आती है, तो किसे सौंपा जाए। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी की बोर्ड की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई और तय हुआ है कि चंडीगढ़ अन्य शहरों के स्मार्ट सिटी के मॉडल को स्टडी करेगा कि उन्होंने क्या किया। उन्होंने किस आधार पर और किसे प्रोजेक्ट सौंपे हैं, उसके आधार पर ही चंडीगढ़ में विचार किया जाएगा। अगली बोर्ड की बैठक में अधिकारियों की तरफ से इस संबंध में रिपोर्ट पेश की जानी है।
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चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी ने 958.18 करोड़ में से 937.10 करोड़ किए खर्च
केंद्र ने सीएससीएल को कुल 958.18 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिसमें से 937.10 करोड़ रुपये विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च हो चुके हैं। कुल मिलाकर 97.80 प्रतिशत फंड का उपयोग किया गया है। शुरू में केंद्र ने फैसला लिया था कि 2020 में मिशन को पूरा कर दिया जाएगा लेकिन अधिकतर शहरों के प्रोजेक्ट लंबित थे, जिसकी वजह से केंद्र सरकार ने मिशन को दो बार बढ़ाया गया और मिशन पूरा करने की समय सीमा जून 2024 निर्धारित कर दी गई। हालांकि इसके बाद भी कई शहरों के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट टेंडर के स्टेज पर ही अटके हुए हैं, जिसकी वजह से उन्हें इस बार भी एक्सटेंशन मिली है लेकिन चंडीगढ़ के अधिकतर प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, इसलिए चंडीगढ़ को एक्सटेंशन नहीं मिली।प्रोजेक्ट लागू करने में इंदौर-सूरत जैसे शहर ही चंडीगढ़ से आगे
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को लागू करने में कुछ चुनिंदा स्मार्ट सिटी से ही पीछे हैं, जिसमें इंदौर, सूरत, पिंपरी चिंचवड, पुणे आदि हैं। अन्य सभी पीछे हैं। चंडीगढ़ के अधिकारी अब इन्हीं शहरों के मॉडल को स्टडी करेंगे। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी की सीईओ आनिंदिता मित्रा ने कहा कि स्मार्ट सिटी में जो कर्मचारी शुरू में रखे गए थे, उन्हें प्रोजेक्ट को डिजाइन करके उसे लागू करने के लिए रखा गया था। इनमें से कोई इंजीनियर तो कोई सीए आदि था। बिजनेस बनाने वाले दूसरे स्किल सेट और क्वालिफिकेशन के कर्मी होते हैं। केंद्र से आर्थिक सहायता नहीं मिलने के बाद बाकी शहरों ने क्या किया है, इसपर स्टडी करके बोर्ड की अगली बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के कुछ महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स
5 एसटीपी - 333 करोड़आईसीसीसी-पीसीसीसी - 330 करोड़
मनीमाजरा 24 घंटे पानी की परियोजना - 75 करोड़
शहर के चार स्मार्ट स्कूल
पब्लिक बाइक शेयरिंग
कूड़े की गाड़ियां खरीदी गईं
लीगेसी वेस्ट को प्रोसेस कर करीब 20 एकड़ की जमीन खाली
तीन एमआरएफ केंद्र
7.50 एकड़ पर सेनेटरी लैंडफिल साइट का निर्माण
आईएम चंडीगढ़ मोबाइल एप