चंडीगढ़ के हाल: 2020 तक बनना था स्मार्ट सिटी, पहले तीन साल में योजनाएं ही बन पाईं
देश भर के 98 शहरों की सूची में चंडीगढ़ प्रमुख 20 शहरों में शामिल था। केंद्र सरकार ने चार साल का लक्ष्य देते हुए चंडीगढ़ को अपनी परियोजनाओं को पूरा करने को कहा था, लेकिन योजना बनाने में अफसरों को तीन साल लग गए।
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विस्तार
देश भर के 98 शहरों की सूची में चंडीगढ़ प्रमुख 20 शहरों में शामिल था। केंद्र सरकार ने चार साल का लक्ष्य देते हुए चंडीगढ़ को अपनी परियोजनाओं को पूरा करने को कहा था, लेकिन योजना बनाने में अफसरों को तीन साल लग गए। इससे काम पिछड़ता चला गया। इस समय शहर में स्मार्ट सिटी की 1900 करोड़ की योजनाएं चल रही हैं, वहीं निगम व प्रशासन के सहयोग से 1600 करोड़ की योजनाएं संचालित हो रही हैं। आने वाले समय में इनका लाभ मिलेगा।
स्मार्ट सिटी की योजनाएं एक नजर में (राशि करोड़ में)-
कुल योजनाएं 37
अनुमानित राशि 2157.30
कुल लागत 1401.21
पूरी हुईं योजनाएं 5
अनुमानित राशि 44.20
कुल लागत 39.62
आधी योजनाएं 20
अनुमानित राशि 1328.36
कुल लागत 1199.52
योजना के अनुबंध के लिए दस्तावेज मांगे 1
अनुमानित राशि 164.00
कुल लागत 162.07
योजना के लिए टेंडर दिया 1
अनुमानित राशि 1.09
योजनाओं का फिर से टेंडर किया 3
अनुमानित राशि 4.60
योजनाओं की आरएफपी तैयार व डीपीआर मजूंर 3
अनुमानित राशि 595.26
योजनाओं की आरएफपी तैयार हो रही है 1
अनुमानित राशि 10.00
डीपीआर भेजी 1
अनुमानित राशि 1.65
इतनी योजनाओं में निगम व प्रशासन का सहयोग (राशि करोड़ में)
कुल योजनाएं 50
लागत 1051.75
पूरी हुईं योजनाएं 23
लागत 263.47
कितनी योजनाओं के हुए टेंडर 1
लागत 2.60
अधूरी योजनाएं 19
लागत 443.67
कितनी योजनाओं का होना है टेंडर 2
लागत 4.41
कितनी योजनाओं की डीपीआर होनी है तैयार 2
लागत 240.00
नई योजनाएं 3
लागत 100.60
यह योजनाएं हुईं पूरीं
अवधि - दो माह
शुरू हुआ - 12 सितंबर 2019
खत्म हुआ - 11 नवंबर 2019
लागत - 47 लाख
वर्तमान स्थिति- लोगों को लाभ मिल रहा है।
योजना - गांव में कचरे की गाड़ी
अवधि - तीन माह
शुरू हुआ - 28 जनवरी 2021
खत्म हुआ - 27 अप्रैल 2020
लागत - 2.12 करोड़
वर्तमान स्थिति- संकरी गलियों में गाड़ियां नहीं जा पाती हैं।
योजना - स्मार्ट सिटी ऑफिस
अवधि - एक साल
शुरू हुआ - 13 दिसंबर 2017
खत्म हुआ - 26 दिसंबर 2018
लागत - 6.76 करोड़
वर्तमान स्थिति- जनता से कोई सरोकार नहीं।
योजना - कचरा लेने वालीं 390 गाड़ियां
अवधि - चार माह
शुरू हुआ - 26 अक्तूबर 2020
खत्म हुआ - 11 दिसंबर फरवरी 2021
लागत - 29.66 करोड़
वर्तमान स्थिति- आधे शहर में गाड़ियां चल रहीं, आधे शहर में चलनी हैं।
यह योजनाएं अधर में लटकीं
योजना - अंडरग्राउंड यूटिलिटी मैपिंग
अवधि - एक साल
शुरू हुआ - 20 अक्तूबर 2019
खत्म होना था - 21 अक्तूबर 2020
लागत - 5.98 करोड़
योजना - ई गवर्नेंस सर्विस
अवधि - एक साल
शुरू हुआ - 16 अक्तूबर 2019
खत्म होना था - 15 अक्तूबर 2020
लागत - 12.07 करोड़
योजना - मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी एंड गारबेज ट्रांसफर स्टेशन (सिविल वर्क)
अवधि - आठ माह
शुरू हुआ - 08 जून 2020
खत्म होना है - 7 फरवरी 2021 (एक शुरू हो गया है)
लागत - 13.39 करोड़
योजना - मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी एंड गारबेज ट्रांसफर स्टेशन (मैकेनिकल वर्क)
अवधि - छह माह
शुरू हुआ - 17 फरवरी 2020
खत्म होना था - 16 अगस्त 2020 (एक शुरू हो गया है)
लागत - 19.61 करोड़
योजना - पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट
अवधि - 10 माह
शुरू हुआ - 27 अप्रैल 2020
खत्म होना था - 1 जुलाई 2020
लागत - 20.00 करोड़
योजना - लीगेसी माइनिंग डंपिंग ग्राउंड
अवधि - डेढ़ साल
शुरू हुआ - 21 अक्तूबर 2019
खत्म होना था - 13 अप्रैल 2021
लागत - 33.38 करोड़
योजना - इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर
अवधि - डेढ़ साल
शुरू हुआ - 15 जून 2020
खत्म होना है - 15 दिसंबर 2021
लागत - 333.59 करोड़
योजना - स्काडा सिस्टम (पानी की शुद्धता की योजना)
अवधि - 1 साल
शुरू हुआ - 11 अक्तूबर 2019
खत्म होना था - 11 अक्तूबर 2020
लागत - 4.78 करोड़
योजना - स्मार्ट कक्षाएं (4 स्कूल)
अवधि - 3 माह
शुरू हुआ - 15 अक्तूबर 2019
खत्म होना था - 14 जनवरी 2020
लागत - 7 करोड़
योजना - दिव्यांग व बुजुर्गों के लिए सेक्टर 17 में बैटरी संचालित कार्ट
अवधि - जानकारी नहीं
शुरू हुआ - 1 जनवरी 2020
खत्म होना था - 31 दिसंबर 2021
लागत - 63 लाख
योजना - मृत जानवरों के निस्तारण का प्लांट
अवधि - 6 माह
शुरू हुआ - 30 जुलाई 2020
खत्म होना था - 30 जनवरी 2021
लागत - 1.08 करोड़
योजना - शौचालय का मरम्मत कार्य (सेक्टर 17)
अवधि - 6 माह
शुरू हुआ - 24 अगस्त 2020
खत्म होना था - 23 फरवरी 2021
लागत - 1.31 करोड़
योजना - शौचालय का मरम्मत कार्य (सेक्टर 22)
अवधि - 6 माह
शुरू हुआ - 24 जुलाई 2020
खत्म होना था - 23 फरवरी 2021
लागत - 1.78 करोड़
योजना - शौचालय का मरम्मत कार्य (सेक्टर 35 और 43)
अवधि - 4 माह
शुरू हुआ - 24 अगस्त 2020
खत्म होना था - 23 दिसंबर 2020
लागत - 92 लाख
योजना - सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (सेक्टर 66)
अवधि - ढाई साल
शुरू हुआ - 1 सितंबर 2020
खत्म होना है - 31 अगस्त 2022
लागत - 432.60 करोड़
योजना - सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (रायपुरखुर्द व रायपुरकलां)
अवधि - ढाई साल
शुरू हुआ - 1 सितंबर 2020
खत्म होना है - 28 फरवरी 2022
लागत - 159.73 करोड़
योजना - सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (धनास और 3 बीआरडी)
अवधि - डेढ़ साल
शुरू हुआ - 23 सितंबर 2020
खत्म होना है - 22 सितंबर 2021
लागत - 98.86 करोड़
योजना - स्काडा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
अवधि - छह माह
शुरू हुआ - 10 नंबवर 2020
खत्म होना है - 9 मई 2021
लागत - 6.38 करोड़
योजना - सेक्टर 39 वाटर वर्क्स में पानी की क्षमता बढ़ाना
अवधि - दो साल
शुरू हुआ - 2 दिसंबर 2020
खत्म होना है - 2 अगस्त 2022
लागत - 34.94 करोड़
योजना - सैनेटरी लैंडफिल साइट डड्डूमाजरा
अवधि - एक साल
शुरू हुआ - 3 फरवरी 2021
खत्म होना है - 2 फवरी 2022
लागत - 12.41 करोड़
केवल ख्वाब बनकर रह गईं योजनाएं : पवन बंसल
पूर्व सांसद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन बंसल का कहना है कि वर्ष 2016 में चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के तहत चुना गया था। उसके बाद तीन साल में योजनाएं बनाई गईं। यह योजनाएं ऐसी थीं, जो केवल ख्वाब बनकर रहीं। शहर की जनता को 24 घंटे पानी नहीं चाहिए, लोग समय से बेहतर जलापूर्ति चाहते हैं। स्मार्ट सिटी के नाम पर अभी हम शून्य हैं। कचरा अलग-अलग करने की योजना को भी हम बेहतर नहीं कर सके हैं। आखिर इन पांच सालों में हुआ क्या जिस पर हम गर्व से कह सकें कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी बन गया।
बंसल ने कहा कि शहर के कचरे को अलग-अलग करने और उसके निस्तारण की व्यवस्था हो नहीं सकी और बात स्मार्ट सिटी की कर रहे हैं। निगम की योजनाओं को स्मार्ट सिटी के तहत पूरा करवाकर निगम का फंड भी खत्म करवा दिया। कचरे का पहाड़ वैसा का वैसा खड़ा है। स्काडा सिस्टम का ढोल पीट रहे थे, लेकिन इस योजना का कोई अता पता नहीं है। नलों में आज भी गंदा पानी आ रहा है। लीकेज को भी ठीक नहीं किया गया। कचरा उठाने की व्यवस्था गांव और शहर दोनों जगह फेल साबित हुई है। 24 घंटे पानी आपूर्ति योजना के खर्चे को पानी को ट्रीट करने में खर्च किया जाए तो पानी का अपव्यय बचेगा और हम ज्यादा से ज्यादा पानी का उपयोग कर सकेंगे।