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ओबीसी आरक्षण मामले पर चंडीगढ़ के अभिभावक रिट पेटीशन डालने की तैयारी में
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चंडीगढ़। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में एमबीबीएस एडमिशन में ओबीसी आरक्षण का मामला जोर पकड़ने लगा है। अपने बच्चों के भविष्य पर मंडराते खतरे को देखते हुए अभिभावक अदालत जाने की तैयारी में हैं। सरकार के निर्णय से आहत अभिभावकों का कहना है कि जीएमसीएच में अचानक ओबीसी आरक्षण लागू कर देने से सामान्य वर्ग के छात्रों का शोषण होगा। उन्होंने इसे लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है लेकिन उनकी चिंता का कारण बिना सीट बढ़ाए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है। इससे सामान्य वर्ग की सीटों में कटौती होना तय है। इस मामले पर चंडीगढ़ के 70 से ज्यादा अभिभावकों ने गर्वनर, एडवाइजर और जीएमसीएच 32 की डायरेक्टर प्रिंसिपल को रिप्रेजेंटेशन दिया है लेकिन उस पर गौर नहीं किया जा रहा है।
जीएमसीएच-32 के पूर्व सर्जन डॉ. संजीव भाटिया ने बताया कि यूटी प्रशासन की मनमानी की वजह से आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है क्योंकि 2006 में यूनिवर्सिटी एक्ट लागू हुआ था। उसके बाद 2008 में जारी सूची में जीएमसीएच को शामिल किया गया लेकिन तब से अब तक यूटी प्रशासन सरकार को यह रिपोर्ट भेजता रहा कि जीएमसीएच का संचालन राज्य सरकार के अंतर्गत किया जा रहा है इसलिए उसे यूनिवर्सिटी एक्ट में शामिल नहीं किया जा सकता लेकिन अब जब केंद्र ने आदेश दिया है तो यूटी प्रशासन इस तथ्य पर अनभिज्ञता जताते हुए इसे लागू करने की तैयारी कर रहा है। वहीं एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि एक्ट के अनुसार सूची में शामिल कॉलेजों में फेज वाइज प्रक्रिया लागू करनी थी। इसके लिए उन कॉलेजों में सीट भी मानक के अनुसार बढ़ाई जानी थी लेकिन जीएमसीएच को लेकर ऐसा नहीं किया जा रहा। यहां अचानक यूनिवर्सिटी एक्ट लागू कर ओबीसी आरक्षण का मानक लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे सामान्य वर्ग के छात्र और उनके अभिभावक तनाव में हैं।
पीजी के सत्र पर भी असर
जीएमसीएच में ओबीसी आरक्षण के मामले से एमबीबीएस के साथ अब पीजी के सत्र पर भी असर पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि यूटी प्रशासन एमबीबीएस के साथ पीजी पर भी ओबीसी आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। अगर ऐसा हुआ तो पीजी की 130 सामान्य सीटों पर भी 27 प्रतिशत आरक्षण की कैंची चल जाएगी।
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जीएमसीएच-32 के पूर्व सर्जन डॉ. संजीव भाटिया ने बताया कि यूटी प्रशासन की मनमानी की वजह से आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है क्योंकि 2006 में यूनिवर्सिटी एक्ट लागू हुआ था। उसके बाद 2008 में जारी सूची में जीएमसीएच को शामिल किया गया लेकिन तब से अब तक यूटी प्रशासन सरकार को यह रिपोर्ट भेजता रहा कि जीएमसीएच का संचालन राज्य सरकार के अंतर्गत किया जा रहा है इसलिए उसे यूनिवर्सिटी एक्ट में शामिल नहीं किया जा सकता लेकिन अब जब केंद्र ने आदेश दिया है तो यूटी प्रशासन इस तथ्य पर अनभिज्ञता जताते हुए इसे लागू करने की तैयारी कर रहा है। वहीं एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि एक्ट के अनुसार सूची में शामिल कॉलेजों में फेज वाइज प्रक्रिया लागू करनी थी। इसके लिए उन कॉलेजों में सीट भी मानक के अनुसार बढ़ाई जानी थी लेकिन जीएमसीएच को लेकर ऐसा नहीं किया जा रहा। यहां अचानक यूनिवर्सिटी एक्ट लागू कर ओबीसी आरक्षण का मानक लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे सामान्य वर्ग के छात्र और उनके अभिभावक तनाव में हैं।
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पीजी के सत्र पर भी असर
जीएमसीएच में ओबीसी आरक्षण के मामले से एमबीबीएस के साथ अब पीजी के सत्र पर भी असर पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि यूटी प्रशासन एमबीबीएस के साथ पीजी पर भी ओबीसी आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। अगर ऐसा हुआ तो पीजी की 130 सामान्य सीटों पर भी 27 प्रतिशत आरक्षण की कैंची चल जाएगी।
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