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चंडीगढ़ की सड़कों पर रात 9 से 12 बजे तक चलना खतरे से खाली नहीं, क्यों?

Mon, 11 Sep 2017 04:47 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 11 Sep 2017 04:47 PM IST
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chandigarh roads not safe in night during time perios of 9 to 12 pm
रात में चंडीगढ़ की सड़कें
चंडीगढ़ की सड़कों पर रात नौ से 12 बजे के बीच चलना किसी खतरे से कम नहीं है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके बारे में सावधान किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में कुल 420 रोड एक्सीडेंट हुए। इनमें से सबसे ज्यादा एक्सीडेंट रात नौ से 12 बजे के बीच दर्ज किए गए हैं। जाहिर है कि रात नौ बजे के बाद शहर में वाहन तेज रफ्तार से दौड़ने लगते हैं। अधिकतर वाहन ओवर स्पीड में होते हैं। इससे एक्सीडेंट का खतरा ज्यादा होता है। रिपोर्ट के मुताबिक सुबह 6-9 बजे के बीच 37, सुबह 9-12 के बीच 58, दोपहर 12-3 बजे के बीच 70, 3-6 बजे के बीच 63, शाम 6-9 बजे के बीच 69, रात 9-12 के बीच 86, रात 12-3 बजे के बीच 30 और सुबह 3-6 बजे के बीच 15 एक्सीडेंट हुए हैं।
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रोड एक्सीडेंट में जान गंवाने वालों में 60 फीसदी यूथ
रिपोर्ट के अनुसार एक्सीडेंट में मरने वाले 60 फीसदी युवा हैं। साल 2016 में 18-45 उम्र के 90 लोगों की जान गईं। जबकि 15 नाबालिगों की मौत हुई। इसी प्रकार 45-60 उम्र के 27 और 60 से ऊपर के लोगों के 11 लोगों की मौत हुई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि उम्र और हादसे में जान गंवाने वालों का सीधा संबंध है। जाहिर है कि युवा वाहन स्पीड में चलाते हैं। ऐसे में हादसे होने लाजिमी हैं। पेरेंट्स को चाहिए कि अपने बच्चों को रोड हादसों के बारे में जागरूक करें।
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पैदल चलने वालों के मार्ग पर सबसे ज्यादा एक्सीडेंट
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट पैदल चलने वाले मार्ग पर हुए हैं। इसके मुताबिक पैदल मार्ग पर चलना भी किसी खतरे से कम नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक पैदल चलने वाले मार्ग पर कुल 83 एक्सीडेंट हुए। इनमें से 30 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी
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एक्सीडेंट का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीड
रिपोर्ट के मुताबिक एक्सीडेंट का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीड है। ओवरस्पीड की वजह से 380 रोड एक्सीडेंट हुए। इनमें से 142 लोगों की मौत हुई, जबकि 297 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। रांग साइड से वाहन चलाना एक्सीडेंट का दूसरा सबसे बड़ा कारण हैं।


बदलाव धीरे-धीरे आता है। चंडीगढ़ के लोग तो जागरूक है, लेकिन बाहर से आने वाले लोग ट्रैफिक के प्रति इतने जागरूक नहीं हैं। दिन के वक्त तो ट्रैफिक पुलिस का फोकस ठीक है। हादसों को रोकने के लिए रात के वक्त भी ट्रैफिक पुलिस को कुछ कदम उठाने चाहिए। पेरेंट्स को चाहिए कि वह अपने बच्चों में ट्रैफिक सेंस बढ़ाएं। इससे काफी हद तक एक्सीडेंट रोके जा सकते हैं।
- हरमन सिद्धू, प्रेसिडेंट एराइव सेव
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