चंडीगढ़ रेपः जांच में दागदार निकली पुलिस की वर्दी
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पीसीआर स्टाफ और पुलिस थानों के बीच कोई तालमेल नहीं है। थाना प्रभारी और नेतृत्व कर रहे अफसरों तक को पता नहीं होता कि पीसीआर में कौन से कर्मचारी तैनात हैं।
बलात्कार और छेड़छाड़ के आरोपी पुलिस कर्मचारियों ने व्यवस्था की इन कमियों का ही फायदा उठाया। प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा के आदेश पर विजिलेंस विंग द्वारा की गई चंडीगढ़ पुलिस की पीसीआर व्यवस्था की जांच में यह खुलासा हुआ है।
नाबालिग स्कूली छात्रा से पांच कांस्टेबलों द्वारा बलात्कार और छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद पिछले साल दिसंबर में केके शर्मा ने इस जांच के आदेश दिए थे।
ड्यूटी रोस्टर तक नहीं पता
विजिलेंस टीम द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में पाया गया कि लीड कर रहे अफसर भी पांचों आरोपियों का ड्यूटी रोस्टर तक नहीं जानते थे।
पीसीआर स्टाफ और थानों के बीच लाइसनिंग होनी चाहिए। कई पीसीआर में जीपीएस सिस्टम खराब हैं तो कई में ये लगे ही नहीं हैं। इसी वजह से आरोपियों की जीपीएस लोकेशन नहीं आई।
पीड़िता को पीसीआर जिप्सी में ले जाने की पुष्टि
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही जीपीएस सिस्टम न होने से पीसीआर लोकेशन नहीं आ पायी है मगर आरोपी कर्मचारियों और पीड़िता की मोबाइल लोकेशन से यह साबित होता है कि उसे पीसीआर में ले जाया गया। हालांकि पीसीआर में रेप की घटना की पुष्टि नहीं हुई है।
ये था मामला
खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं की छात्रा ने पिछले साल 19 दिसंबर को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों के खिलाफ दुराचार और छेड़छाड़ करने की शिकायत दर्ज करायी थी।
इन पांच आरोपियों में अक्षय और सुनील पर पीड़िता को पीसीआर और गाड़ी में मलोया के जंगल और कमरे में ले जाकर कई बार बलात्कार करने का आरोप लगा था। वहीं हिम्मत, जगतार और अनिल पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था।
एसआईटी ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। जिसके बाद अदालत ने पांच कांस्टेबलों पर आरोप तय किए थे।
यह कहना है अधिकारी का
-आरएस घुम्मन, डीआईजी, चंडीगढ़ पुलिस