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वाह रे यूटी पुलिस: केस एक, गवाह आठ और कहानियां भी आठ

Wed, 08 Mar 2017 09:23 AM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 08 Mar 2017 09:23 AM IST
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chandigarh police, Case One, Witness Eight and Stories Eight
चंडीगढ़ पुलिस - फोटो : File Photo
चंडीगढ़ के अहम केस सुलझाने में तो चंडीगढ़ पुलिस लगातार फेल हो ही रही है, वहीं दूसरी ओर अदालत में भी पुलिस की जांच, जांच के तरीके और लापरवाही के कारण आरोपी छूट रहे हैं। अक्सर एनडीपीएस मामलों में पुलिस पर केस प्लांट करने के आरोप लगते हैं और ऐसे ही एक मामले में मंगलवार को सबूतों के अभाव में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी बरी कर दिया। केस में पुलिस की ओर से आठ विटनेस थे, आठों ही पुलिसकर्मी, लेकिन खास पहलू यह था कि सभी के बयान कोर्ट में अलग-अलग थे। यहां तक कि जांच अधिकारी के बयान में मतभेद था।
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पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार चार मार्च 2015 को ऑपरेशन सेल ने नीलम थिएटर के पास नाके के दौरान मोगा के रंजीत सिंह को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उससे 10 ग्राम हेरोइन बरामद होने का दावा किया था। इसके बाद सेक्टर-17 थाने में इसकी जानकारी दी गई और वहां से जांच अधिकारी ने आगे की कार्रवाई की। पुलिस ने रंजीत के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। 
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लापरवाही : 72 घंटे में बरामद ड्रग्स के सैंपल लैब भेजने होते हैं, मगर भेजे 5 दिन बाद
अदालत में ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष की ओर से सभी आठ विटनेस का क्रॉस एग्जामिनेशन किया गया। इसमें फर्स्ट आईओ, सेकंड आईओ से लेकर अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। बचाव पक्ष के वकील गगन अग्रवाल के अनुसार केस के कई ऐसे पहलू थे, जो यह साबित करने के लिए काफी थे कि पुलिस केस प्लांटेड है। वहीं केस में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई। जैसे कि पुलिस को एनडीपीएस केस में 72 घंटे में बरामद ड्रग्स के सैंपल जांच के लिए सीएफएसएल भेजने होते हैं, लेकिन पुलिस ने 4 मार्च को रिकवरी के बावजूद उसे 9 तारीख को जांच के लिए भेजा। पुलिसकर्मियों के बयानों से यह साबित ही नहीं हो सका कि आरोपी पैदल था या मोटरसाइकिल पर। 
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पुलिसकर्मियों के बदलते रहे बयान

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चंडीगढ़ पुलिस पीसीआर - फोटो : File Photo
पुलिसकर्मियों के बदलते रहे बयान
1. जांच अधिकारी एएसआई अमरजीत सिंह के अनुसार आरोपी मोटरसाइकिल पर था, जबकि कांस्टेबल के अनुसार आरोपी पैदल था।
2. फर्स्ट आईओ ने कहा कि उसने सीएफएसएल फार्म की दो कॉपियां बनाईं। 
3. दूसरे आईओ एसआई नरेंद्र ने कहा कि उन्होंने फार्म की तीन कापियां बनाईं।
4. कांस्टेबल धर्मपाल के अनुसार फार्म दूसरे आईओ ने बनाया, जबकि एसएचओ के अनुसार कोई भी सीएफएसएल फार्म बनाया ही नहीं गया।
5. एसएचओ ने बरामदगी के लिए सील पीएसओ को दी, जबकि कांस्टेबल धर्मपाल के अनुसार सील उसने मालखाना मुंशी प्रदीप से ली। वहीं मालखाना मुंशी के अनुसार वह उस दिन छुट्टी पर था।
6. कांस्टेबल धर्मपाल के अनुसार वह मौके से बाइक पर थाने गया। वहीं दूसरे कांस्टेबल सरनदीप के अनुसार वह उसकी ईको स्पोर्ट्स कार लेकर गया। 
7. सेकंड आईओ ने कहा कि वह पैदल ही थाने गया था, पैदल ही वापस आया था।
8. ड्राफ्ट्समैन ने कोर्ट में कहा कि वह 9 अप्रैल को मौके पर गया था, जबकि उसकी 8 अप्रैल की बनाई हुई रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी। 
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