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चंडीगढ़ पीजीआई की मनमानी: कई सरकारी पदों पर लगाया ‘ताला’, वर्तमान कर्मचारियों की पदोन्नति-वेतनवृद्धि पर भी रोक

Tue, 05 Oct 2021 11:21 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़  Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 05 Oct 2021 11:21 AM IST
सार

पीजीआई प्रशासन ने आरटीआई में जवाब दिया है कि कोआर्डिनेशन कमेटी के निर्णय के बाद भर्तियां बंद करने का आदेश मौखिक रूप से लागू किया गया है। इसका लिखित आदेश नहीं है, जबकि भारत सरकार द्वारा गठित कोआर्डिनेशन कमेटी को यह अधिकार ही नहीं है कि वह संस्थान के पदों को निष्क्रिय घोषित कर सके।

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Chandigarh PGI stopped recruitment of hundreds of posts in 14 different cadres by declaring them inactive
चंडीगढ़ पीजीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई को न तो इलेक्ट्रीशियन की जरूरत है, न लिफ्ट ऑपरेटर की। इन दोनों पदों के साथ अन्य दर्जन भर पदों को संस्थान ने डाइंग यानी निष्क्रिय घोषित कर दिया है। यही नहीं पीजीआई प्रशासन ने मनमानी करते हुए 14 अलग-अलग कैडर में सैकड़ों पदों को निष्क्रिय घोषित कर उनमें भर्तियां बंद कर दी हैं। इससे इन कैडरों में कार्यरत कर्मचारियों में रोष है। 

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कर्मचारियों का आरोप है कि अधिकारी अपने फायदे के लिए मनमाने नियम लागू कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पीजीआई प्रशासन स्वीकार कर रहा है कि उसने डाइंग कैडर घोषित करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन इन कैडर में कर्मचारियों की भर्ती और पदोन्नति बंद कर दी गई है। अब इन कैडर में कार्यरत कर्मचारी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
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पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय के अध्यक्ष अश्वनी मुंजाल कहते हैं कि इस संबंध में पीजीआई प्रशासन ने आरटीआई में जवाब दिया है कि कोआर्डिनेशन कमेटी के निर्णय के बाद भर्तियां बंद करने का आदेश मौखिक रूप से लागू किया गया है। इसका लिखित आदेश नहीं है, जबकि भारत सरकार द्वारा गठित कोआर्डिनेशन कमेटी को यह अधिकार ही नहीं है कि वह संस्थान के पदों को निष्क्रिय घोषित कर सके। मुंजाल का आरोप है कि ऐसा करके जहां एक ओर पीजीआई प्रशासन ने उन पदों पर तैनात कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित करने की साजिश रची है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी पदों को समाप्त कर ठेकेदारी प्रथा को बढ़ाने का काम किया जा रहा है, क्योंकि जिन पदों को निष्क्रिय घोषित किया गया है, उन पदों पर कुछ ही महीनों में बड़ी संख्या में ठेके पर कर्मचारी रखे जा चुके हैं।

इन पदों को निष्क्रिय घोषित किया

पीजीआई प्रशासन की ओर से अब तक विभिन्न कैडर के 806 पदों में से 468 पदों पर तैनात कर्मचारियों को निष्क्रिय घोषित कर दिया गया है। इनमें इलेक्ट्रीशियन, लिफ्ट ऑपरेटर, बायोमेडिकल डिवीजन के पद, इंजीनियरिंग के पद, हार्टीकल्चर, ड्राविंग, तकनीशियन, ब्वॉयलरमैन, सीवरमैन, मेसन, पेंटर, व्हाइटवॉशर, ड्राफ्टमैन शामिल हैं। 

कैडर को कैसे निष्क्रिय किया जाता है, ऐसे समझें
सरकारी संस्थान के ऐसे पद जिनका मौजूदा समय में कोई औचित्य न हो, उसे डाइंग यानी निष्क्रिय घोषित कर उस कैडर का अन्य कैडर में विलय कर दिया जाता है। उदाहरण के रूप में पीजीआई में शुरुआती दौर में एक वैक्सीनेटर और एक कंप्यूटर का पद था। दोनों में एक-एक कर्मचारी तैनात थे। बाद में इसे डाइंग घोषित कर दिया गया। अब दोनों पदों की जगह दो अलग कैडर स्थापित हो चुके हैं, जिसमें सैकड़ों कर्मचारी नियुक्त किए जा रहे हैं।

किसी भी संस्थान में जिन पदों को गैरजरूरी मान लिया जाता है, उसे मानक के अनुसार डाइंग कैडर घोषित कर दिया जाता है। पीजीआई ने भी इसी मानक का पालन करते हुए ऐसा किया है। जिन पदों पर कर्मचारियों की जरूरत महसूस हो रही है, उन पर ठेके के जरिए तैनाती की जा रही है। - कुमार गौरव, उप निदेशक प्रशासन (डीडीए), पीजीआई

कोआर्डिनेशन कमेटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय कैसे ले सकती है। यह हास्यास्पद है कि पीजीआई जैसे संस्थान में इलेक्ट्रीशियन और लिफ्ट ऑपरेटर जैसे कर्मचारियों की जरूरत न हो। ऐसा करके एक तरफ सरकारी पद समाप्त किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ठेका प्रथा पर रोक संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर ठेका कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। -अश्वनी कुमार मुंजाल, अध्यक्ष, पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय

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