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PGI के एक आइडिया से बच गए 3 करोड़ रुपये, 75 टन कागज भी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 20 Mar 2017 09:23 AM IST
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चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल
- फोटो : PTI
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पीजीआई ने एक आइडिए से सरकार के तीन करोड़ रुपये और 75 टन कागज को बचा लिया है। पीजीआई के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने टेली एविडेंस फैसिलिटी की सुविधा शुरू की थी।
पहले डॉक्टर को कोर्ट में रिकार्डिंग एविडेंस के लिए कभी पंजाब तो कभी हिमाचल या फिर हरियाणा के जिलों की कोर्ट में जाना पड़ता था। इसमें सरकार का काफी पैसा और कागज खर्च होता था, लेकिन टेली एविडेंस फैसिलिटी के तहत डॉक्टर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीजीआई से ही सुुबूत पेश कर देते हैं। इस प्रोजेक्ट को पूरे देश में सराहा गया है।
नई दिल्ली में आयोजित 47वें स्कॉच सम्मेलन में साल 2017 के भारत के 50 हेल्थ प्रोजेक्ट में इसे शामिल किया गया है। समारोह में जीएमएसएच-16 को मरीजों को स्पेशलिस्ट केयर प्रदान करने के लिए भी सम्मानित किया गया है।
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पीजीआई के इस प्रोजेक्ट को स्कॉच आर्डर ऑफ मेरिट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस मौके पर पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि टेली एविडेंस सुविधा शुरू करने वाला पीजीआई देश का पहला संस्थान है।
यह सुविधा साल 2015 में शुरू की गई थी। अब तक 2200 से ज्यादा साक्ष्यों को टेली एविडेंस के माध्यम से प्रस्तुत किया जा चुका है। पीजीआई के इस प्रयोग को अब भारत सरकार ने अन्य जगह इस्तेमाल करने पर फैसला लिया है।
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पहले डॉक्टर को कोर्ट में रिकार्डिंग एविडेंस के लिए कभी पंजाब तो कभी हिमाचल या फिर हरियाणा के जिलों की कोर्ट में जाना पड़ता था। इसमें सरकार का काफी पैसा और कागज खर्च होता था, लेकिन टेली एविडेंस फैसिलिटी के तहत डॉक्टर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीजीआई से ही सुुबूत पेश कर देते हैं। इस प्रोजेक्ट को पूरे देश में सराहा गया है।
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नई दिल्ली में आयोजित 47वें स्कॉच सम्मेलन में साल 2017 के भारत के 50 हेल्थ प्रोजेक्ट में इसे शामिल किया गया है। समारोह में जीएमएसएच-16 को मरीजों को स्पेशलिस्ट केयर प्रदान करने के लिए भी सम्मानित किया गया है।
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पीजीआई के इस प्रोजेक्ट को स्कॉच आर्डर ऑफ मेरिट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस मौके पर पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि टेली एविडेंस सुविधा शुरू करने वाला पीजीआई देश का पहला संस्थान है।
यह सुविधा साल 2015 में शुरू की गई थी। अब तक 2200 से ज्यादा साक्ष्यों को टेली एविडेंस के माध्यम से प्रस्तुत किया जा चुका है। पीजीआई के इस प्रयोग को अब भारत सरकार ने अन्य जगह इस्तेमाल करने पर फैसला लिया है।