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बड़ा खुलासा: पीजीआई में हो रहा है गर्भस्थ शिशु की जान से खिलवाड़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Feb 2017 09:46 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : File Photo
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गर्भावस्था के दौरान शिशु के संक्रमण को जांचने वाला टेस्ट पीजीआई में पिछले डेढ़ महीने से बंद हैं। जांच के लिए करीब 150 से अधिक सैंपल लंबित पड़े हैं। जो सक्षम हैं, वे प्राइवेट अस्पतालों में जांच करा लेते हैं, लेकिन जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें पीजीआई में किट के आने का इंतजार है।
इस मामले में पीजीआई के वायरोलॉजी डिपार्टमेंट का कहना है कि किट समाप्त हो चुकी है। नई किट का आर्डर दिया जा चुका है, लेकिन वे अब तक अस्पताल नहीं पहुंची है, इसलिए जांच प्रभावित हुए हैं। प्राइवेट लैब में इन जांचों की कीमत करीब 700 रुपये है।
संक्रमण से जान जा भी जा सकती है
एचएसवी (हरपेस सिप्लेक्स वायरस) जांच गर्भावस्था के दौरान भ्रूण और नवजात का किया जाता है। इस जांच की मदद से यह पता लगाया जाता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई संक्रमण तो नहीं है। यदि जन्म के समय संक्रमण का पता न चले तो नवजात की मौत भी हो सकती है या फिर उसे किसी शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है।
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इस मामले में पीजीआई के वायरोलॉजी डिपार्टमेंट का कहना है कि किट समाप्त हो चुकी है। नई किट का आर्डर दिया जा चुका है, लेकिन वे अब तक अस्पताल नहीं पहुंची है, इसलिए जांच प्रभावित हुए हैं। प्राइवेट लैब में इन जांचों की कीमत करीब 700 रुपये है।
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संक्रमण से जान जा भी जा सकती है
एचएसवी (हरपेस सिप्लेक्स वायरस) जांच गर्भावस्था के दौरान भ्रूण और नवजात का किया जाता है। इस जांच की मदद से यह पता लगाया जाता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई संक्रमण तो नहीं है। यदि जन्म के समय संक्रमण का पता न चले तो नवजात की मौत भी हो सकती है या फिर उसे किसी शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है।
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एक्सपायर्ड किट के इस्तेमाल का लग चुका है आरोप
समय पर क्यों नहीं खरीदी गई
समय पर किट की खरीदारी नहीं होने से डिपार्टमेंट पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। नवजात और प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए जब यह जांच इतना महत्वपूर्ण है तो किट की खरीदारी में देरी क्यों की गई। इस बारे में डिपार्टमेंट को पता नहीं है। लेकिन, डिपार्टमेंट का कहना है कि खरीदारी जारी है।
एक्सपायर्ड किट के इस्तेमाल का लग चुका है आरोप
करीब डेढ़ साल पहले रुबेला जांच के लिए एक्सपायर्ड किट का इस्तेमाल करने का आरोप डिपार्टमेंट पर लग चुका है और इस पर जांच के आदेश भी जारी हुए थे। जांच भी शुरू हुई, लेकिन नतीजों का पता अब तक नहीं चल पाया है।
नई किट को खरीदने का काम चल रहा है। कुछ तकनीकी कारणों की वजह से देरी हुई है। उम्मीद है कि जल्द ही किट पीजीआई में आ जाएगी।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई।
समय पर किट की खरीदारी नहीं होने से डिपार्टमेंट पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। नवजात और प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए जब यह जांच इतना महत्वपूर्ण है तो किट की खरीदारी में देरी क्यों की गई। इस बारे में डिपार्टमेंट को पता नहीं है। लेकिन, डिपार्टमेंट का कहना है कि खरीदारी जारी है।
एक्सपायर्ड किट के इस्तेमाल का लग चुका है आरोप
करीब डेढ़ साल पहले रुबेला जांच के लिए एक्सपायर्ड किट का इस्तेमाल करने का आरोप डिपार्टमेंट पर लग चुका है और इस पर जांच के आदेश भी जारी हुए थे। जांच भी शुरू हुई, लेकिन नतीजों का पता अब तक नहीं चल पाया है।
नई किट को खरीदने का काम चल रहा है। कुछ तकनीकी कारणों की वजह से देरी हुई है। उम्मीद है कि जल्द ही किट पीजीआई में आ जाएगी।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई।