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Chandigarh: बेहोशी की तकनीक में बदलाव से मरीजों की रिकवरी हुई तेज, पीजीआई एनेस्थीसिया विभाग का शोध

Tue, 28 Feb 2023 04:24 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 28 Feb 2023 04:24 PM IST
सार

शोध करने वाले कार्डियक एनेस्थिसिया विभाग के प्रमुख प्रो. भूपेश कुमार ने बताया कि सर्जरी के दौरान क्षेत्र विशेष में दी गई एनेस्थिसिया से उस एरिया में तो स्ट्रेस और दर्द को नियंत्रित कर लिया जाता है लेकिन उस दौरान शरीर के अन्य हिस्सों पर दर्द का स्ट्रेस पड़ता है।

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Chandigarh PGI Cardiac Anesthesia Department speed up recovery by change sedation technique of surgery
चंडीगढ़ पीजीआई

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई कार्डियक एनेस्थिसिया विभाग के विशेषज्ञों ने सर्जरी के मरीजों को बेहोश करने की तकनीक में बदलाव कर रिकवरी तेज कर दी है। विशेषज्ञों ने रिजनल ब्लॉक (सर्जरी वाले क्षेत्र विशेष में एनेस्थिसिया देना) तकनीक के बजाय टोटल स्पाइनल एनेस्थिसिया (रीढ़ की हड्डी में) देकर सर्जरी के दौरान शरीर के अन्य अंगों पर आने वाले स्ट्रेस पर काबू पाकर यह उपलब्धि हासिल की है।
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शोध करने वाले कार्डियक एनेस्थिसिया विभाग के प्रमुख प्रो. भूपेश कुमार ने बताया कि सर्जरी के दौरान क्षेत्र विशेष में दी गई एनेस्थिसिया से उस एरिया में तो स्ट्रेस और दर्द को नियंत्रित कर लिया जाता है लेकिन उस दौरान शरीर के अन्य हिस्सों पर दर्द का स्ट्रेस पड़ता है। इससे सर्जरी के बाद मरीज को अचानक ज्यादा तकलीफ होने लगती है और उसे आईसीयू में गंभीर से सामान्य होने में लंबा समय लग जाता है लेकिन टोटल स्पाइनल एनेस्थिसिया से ऐसा नहीं हुआ। नतीजतन सर्जरी के बाद मरीजों की आईसीयू और वेंटिलेटर पर निर्भरता की समय सीमा आधे से भी कम हो गई है। इस शोध को कनेडियन जरनल ऑफ एनेस्थिसिया में प्रकाशित किया गया है।
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50 मरीजों पर किया शोध
प्रो. भूपेश ने बताया कि इस शोध के लिए कार्डियक सर्जरी वाले 50 मरीजों को चिह्नित किया गया। उन मरीजों को दो वर्ग में बांटकर तकनीक का प्रयोग कर सर्जरी की गई। जिन मरीजों को रिजनल ब्लॉक तकनीक से एनेस्थिसिया दिया गया, उन्हें सर्जरी के बाद 7-8 दिन आईसीयू में रखना पड़ा। वहीं टोटल स्पाइनल एनेस्थिसिया वाले मरीजों को सर्जरी के बाद ज्यादा परेशानी नहीं हुई। 24 से 48 घंटे के बीच वे आईसीयू से बाहर कर शिफ्ट कर दिए गए और उनकी रिकवरी भी तेजी से हुई।
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आईसीयू और वेंटिलेटर की कमी होने लगी दूर
कार्डियक सर्जरी के मरीजों को सामान्य तौर पर 8 से 9 दिन आईसीयू में रुकना पड़ता था। इससे 30 बेड वाले आईसीयू में खाली बेड के लिए इंतजार करना पड़ता था। वहीं सर्जरी के बाद मरीज की गंभीरता को देखते हुए उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर भी ज्यादा समय के लिए रखना पड़ता था लेकिन अब एनेस्थिसिया देने की तकनीक में बदलाव कर मरीजों का आईसीयू और वेंटिलेटर पर ठहराव समय सीमा घटाकर 24 से 48 घंटे कर दी है।


खुल गई चौथी ओटी
इस शोध से जहां एक तरफ सर्जरी के मरीजों को राहत मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ एडवांस कार्डियक सेंटर की चौथी ओटी भी खुल गई है। वर्षों से जो ओटी आईसीयू और वेंटिलेटर के फुल होने के कारण नहीं संचालित हो पा रही थी, वहां भी सर्जरी होने लगी है। आईसीयू और वेंटिलेटर पर मरीजों की निर्भरता कम होने से ज्यादा मरीजों को सर्जरी का अवसर मिल पा रहा है।
 
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