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World IVF Day: चंडीगढ़ पीजीआई ने मेथी में तलाश लिया बांझपन का इलाज, 200 महिलाओं पर शोध में मिली सफलता
Thu, 25 Jul 2024 01:09 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 25 Jul 2024 01:09 PM IST
सार
पीजीआई ने तीन माह की रिसर्च में पाया कि मेथी पीसीओडी के लक्षणों को कम कर सकती है। पीसीओएस प्रजनन आयु की लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है।
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मेथी से बांझपन का इलाज।
- फोटो : इंटरनेट
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विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई ने मेथी से बांझपन के इलाज में सफलता हासिल की है। संस्थान के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने सामुदायिक चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर किए शोध में इसकी पुष्टि की है।
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शोध के दौरान बांझपन का इलाज कराने आई पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से ग्रस्त 208 महिलाओं को दो वर्गों में बांट एक को परंपरागत दवा और दूसरे वर्ग को प्रतिदिन 500 मिलीग्राम मेथी के अर्क से तैयार दो कैप्सूल दिए गए। दवा लेने वाले वर्ग में 95 महिलाएं और मेथी के अर्क वाले में 113 महिलाएं शामिल थीं। शोध में 18 से 45 के बीच की महिलाएं शामिल थीं। तीन महीने के बाद किए गए विश्लेषण में पाया गया कि मेथी पीसीओएस के लक्षणों पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के कम कर सकता है। इस शोध को जर्नल ऑफ द अमेरिकन न्यूट्रिशन एसोसिएशन में प्रकाशित किया गया है।
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पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर व आईवीएफ विशेषज्ञ शालिनी गेंडर ने बताया कि हर्बल उपचार के उपयोग ने हाल के वर्षों में ध्यान आकर्षित किया है। ऐसा ही एक हर्बल उपचार मेथी के बीज का अर्क है, जिसने पीसीओएस के विभिन्न पहलुओं के उपचार में आशाजनक परिणाम दिखाए हैं इसलिए इस पर शोध किए और महत्वपूर्ण सुधार पाया।
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प्रो. शालिनी ने बताया कि पीसीओएस प्रजनन आयु की लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है। इसका महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है। प्रो. शालिनी ने बताया कि शोध में शामिल प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित किया गया, एक प्लेसबो समूह और एक पेटेंट मेथी फॉर्मूलेशन समूह। शोध के दौरान सभी प्रतिभागियों को एक अनुकूलित मैक्रोन्यूट्रिएंट संरचना के साथ एक पारंपरिक स्वस्थ आहार का पालन करने की सलाह दी गई। इस शोध में प्रो. शालिनी गेंडर के साथ डॉ. अमरजीत सिंह, शालिनी गेंदर, प्रदीप्ता बनर्जी, अपूर्वा गोयल, पवन कुमार, बनश्री मंडल, समुद्र पी. बनिक और देबाशीष बागची शामिल थे।