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Chandigarh: पीजीआई का कमाल, आई ड्रॉप की जगह लगाया इंजेक्शन और बच्चों में सफेद मोतियाबिंद का इलाज हुआ आसान

Sat, 11 Feb 2023 04:53 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 11 Feb 2023 04:53 PM IST
सार

पहले सफेद मोतियाबिंद से ग्रस्त बच्चों की सर्जरी में पुतली फैलाने के लिए आई ड्रॉप डाला जाता था। उस आई ड्रॉप में 3 तरह की दवाइयों होती थी। लेकिन बच्चे इसे ठीक से आंखों में नहीं जाने देते थे। बच्चों के लगातार रोने के कारण बहुत कम मात्रा में आई ड्रॉप आंखों में पहुंच पाता था।

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Chandigarh PGI achieved results in children by giving injections instead of eye drops in cataract surgery
eye sight

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के विशेषज्ञों ने बच्चों में सफेद मोतियाबिंद की सर्जरी से पहले डाले जाने वाले आई ड्रॉप की जगह इंजेक्शन देकर परिणाम में आशातीत सफलता प्राप्त की है। इस बदलाव ने जहां बच्चों में सफेद मोतियाबिंद की सर्जरी बेहद आसान कर दी है, वही खतरे की आशंका भी कम हो गई है। 
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पीजीआई ने इस बदलाव को शोध परिणाम के आधार पर सत्यापित किया है। इस शोध को विश्व स्तर पर सराहा गया है। क्योंकि विश्व में पहली बार पीजीआई में बच्चों के मोतियाबिंद ऑपरेशन में आई ड्रॉप की जगह इंजेक्शन का प्रयोग कर सफलता प्राप्त की है। इस शोध को यूरोपियन जनरल आफ ऑप्थोमोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। इतना ही नहीं इसके परिणाम सामने आने के बाद पीजीआई में सफेद मोतियाबिंद के से ग्रस्त 150 बच्चों की इस तकनीक से सफल सर्जरी किया जा चुका है।
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शोध में शामिल एडवांस आई सेंटर के डॉक्टर जसप्रीत सुखीजा ने बताया कि पहले सफेद मोतियाबिंद से ग्रस्त बच्चों की सर्जरी में पुतली फैलाने के लिए आई ड्रॉप डाला जाता था। उस आई ड्रॉप में 3 तरह की दवाइयों होती थी। लेकिन बच्चे इसे ठीक से आंखों में नहीं जाने देते थे। बच्चों के लगातार रोने के कारण बहुत कम मात्रा में आई ड्रॉप आंखों में पहुंच पाता था। जिससे सर्जरी के दौरान दवा का असर कम होने से पुतली छोटी होने का भी खतरा बना रहता था। इसके साथ ही आई ड्रॉप को दौरे की शिकायत वाले बच्चों को देने पर रोक है। ऐसे में उस तरह के बच्चों में सफेद मोतियाबिंद की सर्जरी करना मुश्किल होता था। लेकिन उपयोग किए गए इंजेक्शन के प्रयोग में इस तरह का कोई रोक नहीं है।
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बड़ों का इंजेक्शन दिया बच्चों को
डॉक्टर जसप्रीत ने बताया कि जिस इंजेक्शन का प्रयोग बच्चों में सर्जरी के दौरान किया गया है वह बड़ों को पहले से दिया जाता रहा है। लेकिन बच्चों पर इसका प्रयोग पहली बार पीजीआई में किया गया। जिसके परिणाम बेहद संतोषजनक रहे। इस शोध में डॉक्टर सवलीन कौर भी शामिल हैं। इस शोध को देश और विदेश में प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है। 

आप भी जान ले बच्चों का मोतियाबिंद
जन्म के समय बच्चे की दोनों आंखों के लेंस पारदर्शी होते हैं। आंखों के लेंस वस्तुओं को रेटिना में फोकस करता हैं, जिससे आंखों से चीजों को देख पाना संभव होता है। लेकिन कुछ बच्चों के आंखों के लेंस जन्म से सफेद रंग के धुंधले होते हैं, जिससे उनको चीजों को फोकस करने में मुश्किल होती है। इस स्थिति को ही मोतियाबिंद कहा जाता है।


बच्चों में ये लक्षण हैं गम्भीर
- आंख का केंद्र (पुतली) काले के बजाय ग्रे या सफेद दिखाई देता है।
-पूरी पुतली को ऐसा लग सकता है कि वह किसी फिल्म से ढकी हुई है, या पुतली के भीतर एक सफेद धब्बा दिखाई दे सकता है।
- असामान्य रूप से आंखों का तेजी से हिलना, जिसे मेडिकल की भाषा में निष्टागमस कहा जाता है।

मर्ज के कारण अनेक
जीन या क्रोमोसोम में बदलाव, गर्भावस्था के दौरान चोट लगना, समय से पहले जन्म, किसी प्रकार का संक्रमण जैसे- इन्फ्लुएंजा (जिसे फ्लू भी कहा जाता है), खसरा, पोलियो, रूबेला (जिसे जर्मन खसरा भी कहते हैं), टोक्सोप्लाजमोसिज, सिफलिस आदि संक्रमण शामिल हैं।
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