चंडीगढ़: 1970 में जिस बैंबू वैली को यूटी प्रशासन ने लगाया, वही अब खतरे में, 70 फीसदी पेड़ सूखे
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आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चंडीगढ़ शहर में बैंबू वैली भी है लेकिन देखरेख के अभाव में अब यह खतरे की जद में पहुंच चुकी है। वैली में लगे 70 फीसदी बैंबू के पेड़ सूख चुके हैं। सूखे हुए पेड़ों का कटान नहीं किए जाने के कारण नई पौध तैयार नहीं हो पा रही है। उद्यान विशेषज्ञों ने वैली की इस बदहाली पर चिंता जताई है।
चंडीगढ़ की स्थापना के बाद वर्ष 1970 में एन चो के दोनों ओर बैंबू वैली का निर्माण किया गया था। वैली में इन दिनों 50,000 से ज्यादा बैंबू के पेड़ लगे हए हैं। इस वैली के बनाए जाने का उद्देश्य पानी के तेज बहाव से भूमि कटान को रोका जाना था। लेकिन 50 साल पहले बनाई गई यह वैली अब खतरे की जद में आ चुकी है।
देखरेख के अभाव में 70 प्रतिशत बैंबू के पेड़ सूख चुके हैं। वैली की इस बदहाली पर उद्यान विशेष राहुल महाजन ने भी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि यदि वैली समाप्त हो गई तो मानसून के दौरान एनचो में आने वाले बारिश से पानी से भूमि कटान शुरू हो जाएगा और आसपास के क्षेत्रों को खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
वैली में तीन बैंबू प्रजातियां
इस बैंबू वैली में तीन तरह की प्रजातियां लगी हुई हैं। इनमें पहली गोल्डन बैंबू, दूसरी बुद्धा वैली बैंबू और तीसरा लाठी बांस की प्रजातियां शामिल हैं। देखरेख के अभाव में वैली से बुद्धा बैंबू लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच रहा है।
आमदनी का जरिया बन सकती है वैली
दुर्लभ बैंबू वैली यूटी प्रशासन के लिए आमदनी का जरिया बन सकती है। वैली में लगे एक बैंबू की बाजार में कीमत लगभग 500 से 800 रुपये तक है। जो उम्र पूरी कर चुके बैंबू हैं, प्रशासन उनको बेचकर लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त कर सकता है लेकिन अभी तक प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
लॉकडाउन में चोरी हुई बैंबू
वैली में सूख चुके बैंबू का कटान नहीं होने के कारण अब इसकी चोरी शुरू हो गई है। लॉकडाउन के दौरान सेक्टर-22 से बैंबू वैली से सूखे हुए पेड़ों का अवैध कटान हुआ। चोर चार ट्रॉली में बैंबू को भरकर ले गए लेकिन उद्यान विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं लगी।
मानसून के दौरान पौधरोपण के कारण काफी व्यस्तता चल रही है। पौधरोपण के बाद सूखे बैंबू की कटाई शुरू की जाएगी। सेक्टर-22 से चोरी हुए बैंबू की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। प्रवेश शर्मा, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, हॉर्टीकल्वचर डिपोर्टमेंट यूटी