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पहाड़ों की हवा मेहरबान, वायु प्रदूषण से राहत, लेकिन ट्राइसिटी में पटाखों पर लगे बैन, तभी चंडीगढ़ को फायदा

Mon, 09 Nov 2020 02:09 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 09 Nov 2020 02:09 PM IST
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Chandigarh News in Hindi: Air pollution relief in Chandigarh
चंडीगढ़। (फाइल फोटो) - फोटो : social media

उत्तर भारत के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पहुंच गया है या रेड जोन के करीब है। पूरे उत्तर भारत में चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां हवा का स्तर खराब नहीं है। रविवार रात नौ बजे शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 131 दर्ज किया गया। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो दिन से हवा की गति तीन से चार किलोमीटर प्रतिघंटा के हिसाब से चल रही है, जो प्रदूषण के कणों को कमजोर करने में मददगार बन रही है।

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इस समय हवाओं की दिशा पहाड़ों की तरफ से है। पहाड़ों में प्रदूषण न के बराबर है। इसका भी फायदा चंडीगढ़ को मिल रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने अपने पूर्वानुमान में बताया है कि अगले तीन दिन तक चंडीगढ़ की हवा में प्रदूषण के कण कम होंगे। दिवाली से ठीक दो दिन पहले यानी धनतेरस पर प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगेगा। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इस सीजन में चंडीगढ़ में सबसे उच्चतम स्तर पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बीते बुधवार को दर्ज किया गया था। इस दिन करवाचौथ था। त्योहार होने की वजह से सड़कों पर लोगों की आवाजाही ज्यादा थी इसलिए उस दिन एक्यूआई 200 दर्ज किया गया था।
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चंडीगढ़ में अभी कम क्यों वायु प्रदूषण
पीजीआई के पर्यावरण विशेषज्ञ रविंद्र खैवाल का कहना है कि हर शहर में पहले से प्रदूषण के कण मौजूद होते हैं, जो वहां के उद्योग, वाहन और धूल की वजह से उत्पन्न होते हैं। इसका स्तर जहां ज्यादा होगा, मौजूदा समय में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक ज्यादा ही होगा। चंडीगढ़ में प्रदूषण का बैकग्राउंड पहले ही काफी कम है इसलिए यहां पर प्रदूषण की स्थिति दूसरे शहरों के मुकाबले कम है। 
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एक कारण यह भी है कि यहां पर ऊंची-ऊंची बिल्डिंग नहीं हैं। ऐसे में हवा की वजह से वायु प्रदूषण के कण जल्दी घुल जाते हैं। हवा की दिशा भी काफी मायने रखती है। इस समय पंजाब व हरियाणा में पराली जल रही है और हवा की वजह से पराली का धुआं दिल्ली एनसीआर में पहुंच रहा है।


ट्राइसिटी में पटाखों पर प्रतिबंध लगे तभी कोई फर्क पड़ेगा
चंडीगढ़ में फिलहाल पटाखों पर प्रतिबंध है लेकिन यह तभी फायदेमंद रहेगा जब पूरे ट्राइसिटी में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जाए। पंचकूला और मोहाली में पटाखों पर कोई बैन नहीं है। विशेषज्ञ बता चुके हैं कि चंडीगढ़ में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पूरे ट्राइसिटी का प्लान बनाना होगा। सिर्फ चंडीगढ़ में नीतियां बनाने से ज्यादा फायदा नहीं होने वाला। ऐसे में जब तक ट्राइसिटी में एक साथ पटाखों पर प्रतिबंध नहीं लगता तब तक आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण से राहत नहीं मिलेगी।

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