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बैंड बाजे के साथ मिल गया सुखना का सुख
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 20 Jan 2015 04:20 PM IST
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बैंड, बाजा और मार्निंग वॉक के जबरदस्त जोश के बीच सोमवार सुबह 7:05 बजे सुखना लेक को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। प्रशासक के एडवाइजर विजय कुमार देव, होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल, फाइनेंस सेक्रेटरी सर्वजीत सिंह, उपायुक्त मोहम्मद शाइन ने सफेद गुब्बारे छोड़कर सुखना को री-ओपेन किया और करीब एक किलोमीटर तक सैर की।
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उनके साथ आम लोगों ने भी सैर का लुत्फ उठाया। सोमवार सुबह सुखना पर काफी घना कोहरा था। मौसम विभाग के मुताबिक सिर्फ 100 मीटर की विजिबिलिटी थी। इसके बावजूद लोगों में सुखना पर पहुंचने का इतना ज्यादा जोश था कि वे ठंड की परवाह किए बिना दो घंटे पहले ही पहुंच गए।
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सुबह छह बजे तक सैकड़ों लोग सुखना पर पहुंच चुके थे। सिटको की ओर से पहले से ही बैंड बाजे की व्यवस्था की गई थी। एडवाइजर के आते ही बैंड बाजा बजने लगे और उत्सव जैसा माहौल बन गया। यहां पहुंचे लोगों ने पहले सुखना पर सेल्फी ली, फिर अधिकारियों के साथ सुखना की सैर की।
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अधिकारियों को कहना पड़ा- अब लौट जाइए एडवाइजर साहब
सुखना की ओपनिंग के बाद प्रशासक के एडवाइजर विजय कुमार देव सैर पर निकल पड़े। उनके साथ होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल, फाइनेंस सेक्रेटरी सर्वजीत सिंह, उपायुक्त मोहम्मद शाइन, जनरल सेक्रेटरी सर्वजीत सिंह, एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल, नगर निगम कमिश्नर विवेक प्रताप सिंह, नगर निगम के चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद, डीपीआई स्कूल कमलेश कुमार भादू, सिटको अधिकारी एके मल्होत्रा, डायरेक्टर आईटी उपकार सिंह और डीपीआरओ एमएम सभरवाल भी चल पड़े।
करीब 500 मीटर चलने के बाद आधे से ज्यादा अधिकारी पीछे रह गए, जबकि एडवाइजर चलते रहे। उनके साथ सिर्फ होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल, सिटको मैनेजर एके मल्होत्रा और चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ही बचे। एक किलोमीटर की सैर पूरी होने ही वाली थी कि मल्होत्रा ने कहा-सर अब बहुत हो गया। लौटना चाहिए। एडवाइजर देव भी समझ गए कि अब उनके साथी नहीं चल पाएंगे। वे वहीं रुक गए और वापस मुड़ गए।
बिना बतख सुखना यानी बिना नमक खाना
सुखना लेक तो खुल गई, लेकिन अब वह रौनक नहीं रही। अब यहां न तो बतखें हैं और न ही बोटिंग का नजारा। सैर करने वालों की नजरें लेक में कभी कलरव करने वाली उन बतखों को ढूंढ रही थी, जिसे वे दाना डालते थे। उनके साथ सेल्फी लेते थे।
सेक्टर-32 से आए दर्शन सिंह ने बताया कि सुखना पर जाना अब ठीक वैसा हो गया, जैसे बिना नमक के खाना। इंडस्ट्रियल हरभजन सिंह ने कहा कि बतखों के बिना सुखना आकर थोड़ी मायूसी दिखी। टायर डीलर राजीव बतरा ने बताया कि बिना बतखों के मजा नहीं आया। राजीव मेहन ने बताया कि वह हर रोज सुबह आते थे और बतखों के साथ फोटो खिंचवाते थे।
देव बोले, जल्द लौटेगी सुखना की रौनक
सैर करने वालों का कहना था कि सुखना लेक पर अब बतखों और बोटिंग की कमी खल रही है। इन दोनों का जब साथ था तो लेक का नजारा ही कुछ और था। एडवाइजर विजय देव ने इसे महसूस करते हुए ऐलान किया कि इंटरनेशनल गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए सुखना की रौनक लौटाने के लिए हरसंभव कदम उठाया जाएगा। जल्द ही एक्शन प्लान भी तैयार होगा।