चंडीगढ़: सफाई न करने पर जिस कंपनी पर लग चुका है जुर्माना, उसी को टेंडर देने की सिफारिश
2017 में शहर में सफाई व्यवस्था के लिए लॉयंस कंपनी को टेंडर दिया गया था। दक्षिण के सेक्टरों की जिम्मेदारी लॉयंस कंपनी को दी गई थी, जिसमें सेक्टर-31 के बाद के सभी सेक्टर शामिल हैं। पांच साल के लिए किया गया टेंडर इस साल नवंबर में पूरा होने जा रहा है।
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चंडीगढ़ शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर लॉयंस कंपनी के समर्थन में पार्षद, आरडब्ल्यूए व कुछ संगठनों ने निगम को पत्र लिखकर सिफारिश की है। वहीं निगम की ओर से गठित कमेटी ने स्पष्ट कहा है कि सफाई व्यवस्था के लिए नए सिरे से टेंडर किया जाना चाहिए। इस मामले में 31 मई को सदन को बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। सफाई न करने की शिकायत के बाद इस कंपनी पर लगातार जुर्माना लगता रहा है। 2019-20 में कंपनी पर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लग चुका है। हालांकि भुगतान को लेकर भी निगम व कंपनी के बीच विवाद हो चुका है।
2017 में शहर में सफाई व्यवस्था के लिए लॉयंस कंपनी को टेंडर दिया गया था। दक्षिण के सेक्टरों की जिम्मेदारी लॉयंस कंपनी को दी गई थी, जिसमें सेक्टर-31 के बाद के सभी सेक्टर शामिल हैं। पांच साल के लिए किया गया टेंडर इस साल नवंबर में पूरा होने जा रहा है। इस संबंध में लॉयंस कंपनी के अधिकारियों ने तीन भाजपा पार्षद, दो कांग्रेस पार्षद व एक अकाली दल के पार्षद का सिफारिशी पत्र और 14 यूनियन संगठन, आरडब्ल्यूए संगठन, मार्केट वेलफेयर संगठन के सिफारिशी पत्र देकर अपना अनुबंध तीन साल के लिए बढ़ाने का दावा किया है।
इस संबंध में निगम आयुक्त ने संयुक्त आयुक्त सौरभ अरोड़ा के नेतृत्व में एक कमेटी बना दी। इसमें मुख्य वित्त अधिकारी वीएस ठाकुर, चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह व एमओएच डॉ. एपी सिंह को शामिल किया गया। कमेटी ने इस पूरे मामले की चर्चा के बाद निर्णय लिया कि सफाई व्यवस्था के लिए नए सिरे से टेंडर होना चाहिए, ताकि प्रतियोगिता के दौर में सफाई व्यवस्था का स्तर ऊंचा हो सके। निगम आयुक्त का कहना है कि इस मामले को सदन के सामने रखेंगे। वहां से जो भी निर्णय होगा, उस पर अमल किया जाएगा।
इन लोगों ने की कंपनी की सिफारिश
निगम कंपनी को हर साल देती है 50 करोड़ रुपये
दक्षिण के सेक्टरों में सफाई की जिम्मेदारी लॉयंस कंपनी के पास है, जबकि एक से लेकर सेक्टर-30 में सफाई की जिम्मेदारी निगम के पास है। निगम कंपनी को सालाना लगभग 50 करोड़ (हर माह 4 करोड़ रुपये) का भुगतान करता है। वहीं निगम 13 गांव व अपने सेक्टरों में लगभग 1200 से 1300 कर्मचारियों से सफाई करवाता है जिनका हर माह करीब 7 से 8 करोड़ का खर्च आता है।
2019 में मैं स्वच्छता कमेटी का अध्यक्ष था, तब सफाई न करने पर लॉयंस पर जुर्माना लगाया था। इसलिए यह मामला सिफारिश का नहीं, बल्कि सदन का है। वहीं इसका निर्णय होना चाहिए। -शक्ति प्रकाश देवशाली, सदस्य, स्वच्छता कमेटी
शहर के सफाई व्यवस्था को लेकर हम पूरी तरह से गंभीर हैं, इसलिए बेहतर सफाई व्यवस्था के लिए अनुबंध बढ़ाया जाना चाहिए या नए सिरे से टेंडर होना चाहिए। इसके लिए सदन में चर्चा के बाद ही निर्णय होगा। किसी सिफारिश का इस पर कोई असर नहीं है। -रविकांत शर्मा, मेयर
हमें खुशी है कि हमें पांच साल तक शहर की सेवा करने का मौका मिला। अनुबंध के तहत हमने निगम को अपना प्रार्थना पत्र दिया है। इसमें अपने कार्य का ब्योरा भी दिया है। अब सदन जो फैसला करेगा, हमें मान्य होगा। -प्रद्युम्न बख्शी, प्रोजेक्ट हेड, लॉयंस कंपनी