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कवायद: चंडीगढ़ की जमीन में सूख रहा पानी, भूजल स्तर बढ़ाने के लिए अब निगम और प्रशासन गोद लेंगे तालाब

Mon, 02 Aug 2021 12:49 PM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 02 Aug 2021 12:49 PM IST
सार

2019 में जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश के 254 जिलों की सूची जारी कर बताया था कि इन शहरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। सूची में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था।
 

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Chandigarh Nagar Nigam and Administration will adopt Ponds to Increase Ground Water Level
पानी - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

चंडीगढ़ का भूजल स्तर बढ़ाने के लिए नगर निगम और यूटी प्रशासन फिर से तालाबों को गोद लेंगे। निगम कैंबवाला, सारंगपुर और खुड्डाअलीशेर के तालाब को गोद लेगा। वहीं, प्रशासन मलोया, धनास गांव और कैंबवाला के दूसरे तालाब गोद लेगा। इन तालाबों के पुनर्रोद्धार के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है। प्रशासन के पास जो तालाब हैं, वह लाल डोरा के बाहर हैं, ताकि इसमें कोई अड़चन न आए।

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लगातार भूजल स्तर गिरने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण की ओर प्रशासन व निगम के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ट्यूबवेल को भी कम से कम उपयोग करने को कहा गया है। इसके अलावा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को मजबूत करने के लिए कहा है। अधिकारियों ने इसे लेकर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, उपयोग योग्य पानी का फिर से उपयोग, सूख चुके पानी की स्रोतों को फिर से रिचार्ज करना, जागरूकता और पौधरोपण पर ध्यान देने का फैसला लिया है। शहर में अब भी 180 ट्यूबवेल से लोगों को पेयजल आपूर्ति होती है। इन्हें बंद करना भी अधिकारियों को बड़ा लक्ष्य है।

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खुड्डाअलीशेर व सेक्टर- 43 की झील को लिया था गोद

वर्ष 2019 में जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश के 254 जिलों की सूची जारी कर बताया था कि इन शहरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। सूची में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था। उसके बाद निगम ने खुड्डाअलीशेर का पक्का तालाब और प्रशासन ने सेक्टर- 43 की झील को गोद लिया था। निगम ने पंप लगाकर तालाब में पानी भरवा दिया उसके बाद कभी देखा नहीं, वहीं प्रशासन झील की सफाई पर महज खानापूर्ति करता रहा।

टर्सरी वाटर लाइन से भी भूमिगत जल बचाने की तैयारी
नगर निगम जल ही जीवन मिशन योजना के तहत लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से पूरे शहर में टर्सरी वाटर की पाइप लाइन डलवाने जा रहा है। इससे 2 मिलियन गैलन (एमजी) पीने का पानी और 1.5 एमजी भूमिगत जल की बचत होगी। जल मंत्रालय के अनुसार 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों को 20 मिलियन गैलन पानी ट्रीट कर उपयोग करना होगा। अभी शहर में 10 एमजी पानी की आपूर्ति टर्सरी वाटर के रूप में की जाती है।

इसमें 7 एमजी टर्सरी वाटर होता है। शेष 3 एमजी आपूर्ति ट्यूबवेल और सैलो ट्यूबवेल से की जाती है। इसमें काफी भूमिगत जल का प्रयोग होता है। इस समय शहर में 20 से 25 ट्यूबवेल से पार्कों व अन्य जगह टर्सरी वाटर के रूप में आपूर्ति की जाती है। एक ट्यूबवेल से एक घंटे में 15 हजार गैलन पानी निकलता है। वहीं इस समय शहर में 25 से 30 सैलो ट्यूबवेल से टर्सरी वाटर की आपूर्ति होती है। एक सैलो ट्यूबवेल से 8 हजार गैलन प्रति घंटे पानी लिया जाता है।

निजी और सरकारी भवनों में लगाया जा रहा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
भूमिगत जलस्तर को बढ़ाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को देखा जाएगा। जिन सरकारी इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है उन्हें चिह्नित कर देख रहा है कि वह चालू हालत में हैं या नहीं। साथ ही उन सरकारी और निजी बिल्डिंगों को भी चिह्नित किया जा रहा है जहां इस सिस्टम को लगाया जा सकता है। स्कूलों में भी इस सिस्टम को लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।

भूमिगत जल स्तर नीचे जाने के कारण पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करने का लक्ष्य दिया गया है। इस क्रम में निगम व प्रशासन ने तीन-तीन तालाब गोद लिए हैं। जल्द इनका काम शुरू हो जाएगा। -केके यादव, आयुक्त, नगर निगम

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