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नाटक: कर्नल का गुस्सा, अभिमान और 'कश्ामकश'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 17 Feb 2014 01:15 PM IST
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उम्र भर फौज में काम करते-करते एक कर्नल को आर्डर देने की ऐसी आदत पड़ी कि वह अपने फैसले को ही अंतिम फैसला मानने लगा।
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यह कहानी थी नाटक कशमकश की। चंडीगढ़ संगीत नाटक कला अकादमी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नाटक उत्सव के आखिरी दिन रविवार को दिल्ली के इप्टा सोसाइटी ग्रुप की तरफ से अजीज कुरैशी के निर्देशन में नाटक का मंचन किया।
नाटक की शुरुआत एक जिद्दी कर्नल के गुस्से भरे संवाद से होती है जो नाटक को दिलचस्प बना देता है। कर्नल का शरीर लकवा ग्रस्त है, लेकिन डॉक्टर उन्हें हौसला देते है कि वह जल्द ठीक हो जाएंगे।
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कर्नल डॉक्टरों को भी यह कहकर दुत्कार देता है कि हजारों डॉक्टरों ने यह बात कही, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। इस बीच कर्नल पत्नी के साथ बिताए हुए दिनों की याद करता है।
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जब पत्नी उसे ज्यादा शराब पीने से रोकती थी। लेकिन, वह उसे भी डांट देता था। इस बीच कर्नल का सेवक उसकी भरपूर सेवा करता है, लेकिन कर्नल उसे भी अक्सर डांटता फटकारता रहता है।
कर्नल को लगता है कि उसके लकवा ग्रस्त होने के कारण कोई उसकी बात पर ध्यान नहीं देता। वह इसी कशमकश में रहता है।
इस बीच ऐसी घटना घटती है कि कर्नल की टांगे एकाएक ठीक हो जाती हैं, लेकिन उसका शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। जिससे वह ज्यादा समय जिंदा नहीं रह पाता है।
नाटक में कर्नल के रूप में अजीज कुरैशी ने बहुत उम्दा अभिनय किया है। जिद्दी कर्नल के किरदार में बहुत ही शानदार रहा।
नाटक के संवाद बहुत सपाट थे, जिससे नाटक बीच-बीच में अपनी पकड़ खोता दिखाई दिया। नाटक में साउंड का इस्तेमाल बहुत कम किया गया। नाटक का अंत बहुत कमजोर था।