{"_id":"65c31bc0e8c2effcc00db70b","slug":"chandigarh-municipal-corporation-may-go-to-administration-to-pass-budget-2024-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: बजट पास कराने के लिए प्रशासन के पास जा सकता है निगम, SC के आदेश के बाद टल गई है बैठक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: बजट पास कराने के लिए प्रशासन के पास जा सकता है निगम, SC के आदेश के बाद टल गई है बैठक
Wed, 07 Feb 2024 11:28 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 07 Feb 2024 11:28 AM IST
सार
चंडीगढ़ नगर निगम पर उठे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मतपत्र, वीडियोग्राफी और अन्य सामग्री समेत चुनाव प्रक्रिया के पूरे रिकॉर्ड को संरक्षित करने का आदेश के साथ ही निगम की आगामी बैठक को टालने का निर्देश भी दिया था।
विज्ञापन
चंडीगढ़ नगर निगम।
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ में 30 जनवरी को हुए मेयर चुनाव में हंगामे की वजह से नगर निगम का काम भी प्रभावित हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नगर निगम सदन की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के आदेश के बाद नगर निगम अब मुश्किल स्थिति में है क्योंकि आगामी वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए वार्षिक बजट को अभी तक सदन की निर्धारित मंजूरी नहीं मिली है।
विज्ञापन
नए वित्तीय वर्ष में अपना कामकाज ठप होने की संभावनाओं को देखते हुए नगर निगम अब कम से कम रेवेन्यू हेड (राजस्व मद) के तहत खर्च करने की मंजूरी के लिए यूटी प्रशासन के पास जाने की तैयारी कर रहा है। ऐसा इसलिए ताकि नियमित, लेकिन आवश्यक सेवाएं बिना किसी व्यवधान के जारी रहें।
विज्ञापन
अधिकारियों का दावा है कि 31 मार्च तक के लिए बजट अप्रूव है, इसलिए निगम में फिलहाल धन की कमी का कोई मुद्दा नहीं है। एमसी अधिनियम के अनुसार बजट फरवरी के पहले सप्ताह के भीतर पारित किया जाना जरूरी है। पारित होने के बाद इसे मंजूरी के लिए प्रशासन के पास भेजा जाता है। इस वर्ष सात फरवरी को नगर निगम ने बजट पास करने के लिए सदन की बैठक रखी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसे टाल दिया गया है। अब यह बैठक कब होगी, यह कोई तय नहीं है। इसलिए निगम के अधिकारी भी चिंतित हैं। हालांकि, एक अधिकारी ने बताया कि नगर निगम आयुक्त को रेवेन्यू हेड के तहत खर्च की अनुमति देने का अधिकार है, लेकिन अमूमन ऐसा नगर निगम सदन की ओर से बजट स्वीकृत होने के बाद ही किया जाता है।
विज्ञापन
कानूनी राय लेने के बाद निगम लेगा फैसला
एक अप्रैल से वित्तीय वर्ष शुरू होता है। बजट में रेवेन्यू हेड और कैपिटल खर्च शामिल होता है। रेवेन्यू हेड में नियमित व्यय शामिल होते हैं, जैसे कर्मचारियों की सैलरी-पेंशन व अन्य खर्च, जबकि कैपिटल खर्च नई विकास परियोजनाओं पर किया जाता है।
मौजूदा स्थिति में, सदन की अगली बैठक को लेकर बहुत अनिश्चितता है, इसलिए नगर निगम रेवेन्यू हेड के बजट के लिए प्रशासन को पत्र लिख सकता है, क्योंकि संपूर्ण बजटीय अनुमोदन प्रक्रिया होने में आम तौर पर एक महीने या उससे अधिक का समय लगता है। ऐसे में अगर निगम ने बजट की बैठक का इंतजार किया और बैठक लेट हो गई तो कर्मचारियों के वेतन से लेकर अन्य कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि, कानूनी राय लेने के बाद ही नगर निगम की तरफ से यूटी प्रशासन के लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट को बजट भेजने की संभावना है।