आत्महत्या मामला: लायंस को कारण बताओ नोटिस, कंपनी बोली- नगर निगम ने नहीं जारी किए 25 करोड़, इसलिए हुई देरी
लायंस कंपनी के अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि कंपनी ने कर्मचारियों का मई माह का भुगतान कर दिया है। जून माह का वेतन 15 जुलाई तक दिया जाना था लेकिन नगर निगम ने 25 करोड़ रुपये जारी नहीं किए। इस वजह से वेतन देने में देरी हुई और अब 26 जुलाई को वेतन कर्मचारियों के खाते में ट्रांसफर किया है।
विस्तार
दो महीने से वेतन नहीं मिलने पर लायंस कंपनी के सफाई कर्मचारी के आत्महत्या के मामले को लेकर मंगलवार को पूरे दिन शहर में खलबली मची रही। नगर निगम ने कंपनी को नोटिस जारी किया है। उधर, लायंस कंपनी ने वेतन में देरी होने की वजह नगर निगम को ही बता दिया है। कहा है कि निगम ने ही पैसे जारी नहीं किए, जिसकी वजह से वेतन नहीं दे पाए।
सफाई कर्मचारी की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने मंगलवार को लायंस कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। आयुक्त ने नोटिस में पूछा है कि अनुबंध के अनुसार हर माह की सात तारीख तक कर्मचारी का वेतन कंपनी को स्वयं के फंड से देना है फिर वेतन देने में देरी क्यों हुई। इससे जुड़ा कोई दस्तावेज भी 10 तारीख तक निगम के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया। सात दिन के अंदर कंपनी को अपना जवाब देना है। समय सीमा में जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त ने नोटिस जारी कर लायंस कंपनी के अधिकारियों से कहा है कि यह बात दोनों पक्ष जानते हैं कि किन्हीं कारणों से कंपनी के साथ अनुबंध करने में तीन माह की देरी हुई। शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने के लिए अनुबंध किया गया था। कुछ दिनों से सफाई निरीक्षकों की ओर से देखा गया कि काम में लापरवाही हुई है। अनुबंध की शर्तों का पालन न करना उल्लंघन की श्रेणी में आता है। मैकेनिकल और मैनुअल सफाई के संबंध में भी कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
कंपनी ने कर्मचारियों को क्या सुविधाएं दीं, इसकी भी निगम को नहीं दी जानकारी
नोटिस में कहा गया है कि अनुबंध के अनुसार कंपनी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 2 किलो सरसों का तेल, 6 डिटॉल साबुन, 2 किलो गुड़ प्रतिमाह उपलब्ध कराना है। इसकी कंपनी ने अब तक कोई रिपोर्ट नहीं दी है। वहीं कर्मचारियों का जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सड़क सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत या अन्य कोई बीमा कराया गया है कि नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं दी है।
कंपनी ने अपनी खामियों का ठीकरा नगर निगम पर फोड़ा
लायंस कंपनी के अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि कंपनी ने कर्मचारियों का मई माह का भुगतान कर दिया है। जून माह का वेतन 15 जुलाई तक दिया जाना था लेकिन नगर निगम ने 25 करोड़ रुपये जारी नहीं किए। इस वजह से वेतन देने में देरी हुई और अब 26 जुलाई को वेतन कर्मचारियों के खाते में ट्रांसफर किया है। कर्मचारी की मौत की जानकारी मिलते ही कंपनी ने तत्काल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता परिवार को दे दी है। साथ ही मृतक कर्मचारी की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति देने और बच्चों का एक साल तक पढ़ाई का खर्च भी कंपनी की ओर से उठाने का निर्णय लिया गया है।
मौत होते ही जागी कंपनी, सभी कर्मचारियों के खाते में भेजा वेतन
कर्मचारी की मौत होते ही लायंस कंपनी की नींद खुल गई और सभी कर्मचारियों के खाते में वेतन भेज दिया गया। नियम के अनुसार सात तारीख तक कर्मियों के खाते में वेतन भेजना होता है पर नगर निगम ने पहले कंपनी से इस बारे में क्यों नहीं पूछा। अगर पहले ही निगम के अधिकारी सक्रिय होते कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है तो हो सकता है कि कर्मचारी अपनी जान नहीं देता। अब निगम और कंपनी दोनों एक-दूसरे की गलती बता रहे हैं।
को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने कहा- कंपनी के खिलाफ दर्ज हो एफआईआर
को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ गवर्नमेंट एंड एमसी इंप्लॉयज एंड वर्कर्स यूटी चंडीगढ़ ने मामले में जांच की मांग की है। कमेटी ने नगर निगम से कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। को-ऑर्डिनेशन कमेटी के प्रधान सतिंदर सिंह, महासचिव राकेश कुमार, चीफ पैट्रन श्याम लाल घावरी, पैट्रन सुरेश कुमार, को-ऑर्डिनेटर गुरचरण सिंह और चेयरमैन अनिल कुमार ने इस घटना की निंदा की।
कमेटी के सदस्यों ने नगर निगम से मृतक के परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी की मांग उठाई। यह भी कहा गया है कि वेतन मांगने पर कंपनी ने पहले भी चार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। राजनीतिक सुरक्षा के चलते कंपनी के खिलाफ विरोध भी बेअसर रहा था। मामले में कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
तथ्यात्मक और कानूनी रूप से कंपनी का बयान गलत है। रोकी गई राशि पिछले अनुबंध की है जिसका इस वर्तमान अनुबंध से कोई लेना देना नहीं है। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम।
एक्टू यूनियन ने भी की लायंस कंपनी पर एफआईआर की मांग
सफाईकर्मी राजेश कुमार की मौत पर कर्मचारी काफी नाराज हैं। आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल आफ ट्रेड यूनियंस की चंडीगढ़ ब्रांच ने इस मामले में लायंस कंपनी के मालिक और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। एक्टू के अध्यक्ष कंवलजीत सिंह व सचिव सतीश कुमार ने कहा है कि प्रशासन और निगम के अधिकारियों को कई बार बताया गया है कि कंपनी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए, इस बार जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि कर्मचारी के परिवार को न्याय मिले। यूनियन ने ऐसी ही स्थिति में रह रहीं चंडीगढ़ की आंगनबाड़ी वर्कर्स का मामला भी उठाया है। उन्हें भी कई महीने से वेतन नहीं मिला है।
लायंस कंपनी का रद्द हो ठेका : प्रेम गर्ग
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने आयुक्त को पत्र लिखकर लायंस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर ठेका रद्द करने की मांग की है। कहा है कि कंपनी प्रबंधन को कर्मचारी राजेश टांक की आत्महत्या के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।