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Chandigarh: मेयर चुनाव विवाद ने रोके नए विकास कार्य, पहली बार निगम में न सब कमेटियां और न एफएंडसीसी

Sat, 17 Feb 2024 06:22 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 17 Feb 2024 06:22 PM IST
सार

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को दो साल से ज्यादा का समय हो चुका है। दो मेयर अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं लेकिन अब तक न सब-कमेटियों का गठन हुआ है और न ही वार्ड कमेटियां बनाई गई हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि एफ एंड सीसी का चुनाव भी नहीं हुआ है।

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Chandigarh Municipal Corporation come to standstill due to mayoral election dispute
चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़ के मेयर चुनाव विवाद की वजह से चंडीगढ़ नगर निगम एक तरह से थम सा गया है। न जनवरी माह में सदन की कोई बैठक हुई, न फरवरी माह में बैठक के आसार नजर आ रहे हैं। नगर निगम में दो साल से न सब-कमेटियां हैं और न ही इस बार वित्त व अनुबंध कमेटी (एफ एंड सीसी) बनी है। सभी वार्डों के नए विकास कार्य रुके हुए हैं। अगले महीने आचार संहिता लग सकती है। ऐसे में मई से पहले कोई नया कार्य होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
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वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए नगर निगम के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे पहले, नगर निगम अब तक सदन से बजट पास नहीं करा पाया है। जबकि नियमों के अनुसार फरवरी के पहले हफ्ते में ही बजट पास किया जाना चाहिए। हालांकि नगर निगम की आयुक्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए बजट में से रेवेन्यू हेड को प्रशासन से मंजूरी दिला सकती है लेकिन कैपिटल हेड के तहत मिले बजट का इस्तेमाल बिना सदन की मंजूरी के नहीं किया जा सकता। 
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रेवेन्यू हेड में कर्मचारियों की सैलरी, भत्ते व अन्य खर्च शामिल होते हैं, जबकि कैपिटल हेड में वह पैसा होता है, जो विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है। अब जब तक सदन की बैठक नहीं होगी, तब तक बजट पास नहीं हो सकेगा। यह भी किसी को नहीं पता है कि सदन की बैठक कब होगी। ऐसे में विकास कार्य भी रुके हुए हैं। बता दें कि साफ-सफाई, पानी-बिजली, सीवर आदि पर बनने वाली सब-कमेटियां शहर के विकास में काफी सहायक होती हैं। 
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इन सब-कमेटियों के सदस्य पार्षद होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर सड़क से जुड़ा कोई छोटा मामला होता है तो उसे सब-कमेटियों से ही पास करके काम कराया जा सकता है लेकिन इन कमेटियों का गठन नहीं होने की वजह से पार्षदों को छोटे-छोटे काम के लिए भी एफ एंड सीसी का इंतजार करना पड़ता है लेकिन अब तो एफ एंड सीसी का भी चुनाव नहीं हुआ है।

अगले महीने लग सकती है आचार संहिता, कैसे होंगे विकास कार्य
शहर के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब चंडीगढ़ इस स्थिति से गुजर रहा है। जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना अब सदन की बैठक नहीं होगी। मामला कुछ दिन और खिंचा तो मार्च महीने में लोकसभा चुनाव की वजह से आचार संहिता लग जाएगी। इसके बाद कोई शिलान्यास नहीं हो सकते, न ही उद्घाटन होंगे। रूटीन के काम होंगे लेकिन सभी नेता चुनाव में व्यस्त हो जाएंगे, इसलिए उन दिनों में विकास कार्य रुक जाते हैं। इसलिए मई महीने के बाद ही अब नए विकास कार्यों पर काम शुरू हो पाएगा।


ठंडे बस्ते में कई बड़ी परियोजनाएं
मेयर चुनाव विवाद से पहले नगर निगम स्मार्ट पार्किंग पॉलिसी, चंडीगढ़ पेट डॉग्स एंड कम्युनिटी डॉग बायलाज 2023, कई बड़े टेंडर को एक्सटेंशन समेत अन्य पर कार्य कर रहा था। माना जा रहा था कि कुछ महीनों में इन्हें मंजूरी दे दी जाएगी, क्योंकि स्मार्ट पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार है और चंडीगढ़ पेट डॉग्स एंड कम्युनिटी डॉग बाय-लाज 2023 पर एक बैठक में काफी चर्चा भी हो चुकी है। इसके अलावा लाल डोरा के बाहर के घरों को पानी का कनेक्शन, संपत्ति कर के नियमों में संशोधन समेत कई एजेंडा पर चर्चा होनी थी, लेकिन मेयर चुनाव विवाद और सदन की बैठक नहीं होने की वजह से सभी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चले गए हैं।
 
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