चंडीगढ़ निगम का बैंक खाता खाली: ग्रांट इन एड से भी नहीं दे पाएंगे सैलरी, लेना पड़ सकता है कर्ज
चंडीगढ़ नगर निगम की इन दिनों ऐसी स्थिति है कि वह पेट्रोल पंप, पानी के बिल व संपत्ति कर आदि से दिन भर में होने वाली कमाई की शाम को गणना की जाती है और जो पैसे आते हैं, उससे अगले दिन के जरूरी बिलों का भुगतान किया जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ नगर निगम का बैंक खाता खाली हो गया है। अधिकारियों को चिंता सता रही है कि वह कर्मचारियों को जनवरी महीने की सैलरी कैसे देंगे क्योंकि प्रशासन से अब सिर्फ 33 करोड़ ही मिलने हैं, जो फरवरी के पहले हफ्ते में मिलेंगे लेकिन एक महीने का नियमित और आउटसोर्स कर्मियों का वेतन ही करीब 46.5 करोड़ है। इसके अलावा हर महीने करीब बिजली का बिल 11.5 करोड़ है। ऐसे में निगम को अब कर्ज लेने पर विचार करना पड़ रहा है।
नगर निगम के लिए वर्ष 2024 बहुत चुनौतीपूर्ण रहा है। साल 2025 में यह संकट ज्यादा गहराएगा। पहले ही महीने में सैलरी का संकट आ गया है। दिसंबर महीने में भी कर्मचारियों को सैलरी देरी से मिली और अब जनवरी में ही लेट ही मिलेगी। अब तो निगम के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वह नियमित और आउटसोर्स कर्मियों को सैलरी दे पाए।
18.5 करोड़ है सैलरी
निगम के सभी नियमित कर्मियों की सैलरी हर महीने पेंशन समेत करीब 18.5 करोड़ है। आउटसोर्सिंग, कॉन्ट्रैक्ट व डेलीवेज कर्मियों की सैलरी करीब 28 करोड़ है। इसके अलावा निगम हर महीने बिजली-पानी का बिल ही करीब 11.5 करोड़ चुकाता है। इसमें करीब पांच करोड़ तो कजौली से पानी की पंपिंग का खर्च है। बाकी अन्य पंपिंग स्टेशन के भी खर्चे हैं, जबकि प्रशासन ने फरवरी के पहले हफ्ते में सिर्फ 33 करोड़ ही मिलने हैं। ऐसे में निगम के पास भीषण संकट है। कमाई का कोई साधन नजर नहीं आ रहा है, इसलिए अब निगम के अधिकारी कर्ज लेने पर विचार कर रहे हैं। इस बारे में चर्चा शुरू हो चुकी है।
यह पता करा लिया गया है कि कई शहरों के निगमों ने भी कर्ज लिया है। ऐसे में चंडीगढ़ नगर निगम को भी मिल सकता है। हालांकि, निगम के लिए यह आखिरी रास्ता होगा। इससे पहले अन्य सभी रास्ते तलाशे जा रहे हैं। सबसे पहले निगम की तरफ से प्रशासन से ही 200 करोड़ मांगे जा रहे हैं क्योंकि वित्त वर्ष में नगर निगम करीब 200 करोड़ के घाटे में है। बता दें कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए निगम का कुल खर्च करीब 1110 करोड़ है लेकिन खुद की कमाई और प्रशासन से मिले ग्रांट से कुल करीब 910 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सकेंगे।
प्रशासन से मांगे थे 200 करोड़ रुपये
निगम के अधिकारियों का कहना है प्रशासन से अतिरिक्त ग्रांट की मांग की थी लेकिन वह अभी तक नहीं मिली है। हाल ही में निगम ने 200 करोड़ मांगे थे। निगम ने जब इसका अपडेट मांगा तो जवाब मिला कि प्रशासन ने केंद्र से इन पैसों की मांग की है, लेकिन केंद्र ने पैसे अभी नहीं दिए हैं। ऐसे में जब केंद्र पैसे जारी करेगा, तब ही निगम को यह पैसे मिलेंगे।
निगम के पास कोई एफडी नहीं
नगर निगम के पास वर्तमान में बैंक में कोई फिक्स डिपॉजिट (एफडी) नहीं है, जिसे तुड़वाकर कर्मियों की सैलरी व अन्य कार्य किए जा सकें। निगम ने वर्ष 2006 के आसपास अपनी सरकारी प्रॉपर्टी बेचकर एक 500 करोड़ की एफडी बनाई थी। 2015 में नगर निगम ने एफडी तुड़वाकर कजौली वाटर वर्क्स के पांचवें और छठे फेज की दो नई लाइनों से पानी लेने के लिए 98 करोड़ की राशि का भुगतान पंजाब को किया था। इसके बाद भी कई बार एफडी तोड़ी गई और कर्मचारियों को वेतन दिया गया। अब कोई एफडी नहीं है। निगम को राजस्व के अन्य साधन भी नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कर्ज लेने का विकल्प नजर आ रहा है। कर्ज लेने के लिए निगम को सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट का सहारा लेना पड़ेगा।
सड़कों के मरम्मत के लिए भी 54 करोड़ देने से प्रशासन ने किया इन्कार
शहर के मेयर कुलदीप कुमार ने पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को पत्र लिखकर सड़कों की मरम्मत के लिए 54 करोड़ की मांग की थी। पत्र में कहा था कि नगर निगम की करीब दो हजार किलोमीटर सड़कों की मरम्मत का कार्य करता है। शहर के कई इलाकों की सड़कें टूटी हुई हैं लेकिन नगर निगम के पास पैसा नहीं है कि उन्हें ठीक कराया जा सके। ऐसे में निगम को करीब 54 करोड़ की जरूरत है, लेकिन प्रशासन इसके लिए भी मना कर दिया है। निगम को जवाब मिला है कि जिन 54 करोड़ रुपये की वह मांग कर रहा है, वह ग्रांट-इन-एड का ही हिस्सा है। ऐसे में अलग से सड़कों के मरम्मत के लिए पैसे नहीं दिए जा सकते।
नगर निगम के हर महीने के मुख्य खर्चे
हेड खर्च
वेतन 14 करोड़
मजदूरी 28 करोड़
पेंशन 3.50 करोड़
बिजली/पानी बिल का भुगतान 11.50 करोड़
छोटे कार्य/रखरखाव खर्च 10 करोड़
अन्य खर्च 5.50 करोड़
पेट्रोल खरीद 2.50 करोड़
कुल खर्च 75 करोड़
प्रशासन से मिलने वाली राशि (वर्ष 2024-25)
कुल 560 करोड़
मिल चुके 527 करोड़
बाकी 33 करोड़
नगर निगम का खुद की कमाई का अनुमान और वास्तविकता
वित्त वर्ष अनुमानित वास्तविक खुद की कमाई
2023-24 550.83 करोड़ 328 करोड़
2024-25 445.14 करोड़ 335 से 345 करोड़ (अनुमानित)