Chandigarh News: ‘नहीं लगेगा कूड़े का अंबार, 25 साल बाद के चंडीगढ़ को ध्यान में रख कर रहे योजना तैयार’
निगम आयुक्त ने बताया कि शहर से रोजाना 200 टीपीडी सूखा तो वहीं 350 टीपीडी गीला कचरा निकलता है। अभी तक की क्षमता 150 टीपीडी कचरा निपटाने की है।
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डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर कचरा प्रबंधन को लेकर नगर निगम आयुक्त ने बताया कि 25 साल बाद के चंडीगढ़ के कचरा पैदा करने की क्षमता को देखते हुए निगम योजना तैयार कर रहा है। इसके तहत बाजारों व आवासों से कचरा एकत्रित कर इसे अलग-अलग किया जाएगा। इसके बाद इसे प्रोसेस किया जाएगा ताकि शहर में कूडे़ का अंबार न लगे।
निगम ने बताया कि बदबू व बीमारियों को रोकने के लिए कचरे को ढक कर रखा जाता है और इसके ऊपर रसायनों का छिड़काव किया जाता है। कचरे से गंदा पानी लोगों के घरों तक न जाए इसके लिए 1200 मीटर लंबी व 4.5 मीटर ऊंची दीवार बनाई गई है। इसके साथ ही जो बागबानी से जुड़ा कचरा है, उससे खाद तैयार करने के लिए इसे अलग क्षेत्र में रखा जाता है।
कोर्ट को बताया गया कि गीले कूडे़ के निपटारे की क्षमता को 70 से बढ़ाकर 125 टन प्रतिदिन (टीपीडी) किया गया है। इसके साथ ही गीले कचरे के निपटारे की अवधि को 45 से घटाकर 28 दिन करने की योजना है। यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहता है तो प्लांट की क्षमता को और अधिक बढ़ाया जा सकेगा।
इसके साथ ही बताया गया कि प्लांट 45 एकड़ भूमि पर स्थित है। 20 एकड़ भूमि पर पांच लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) कचरा था जिसमें से 3.65 एलएमटी हटाया जा चुका है और मार्च 2023 तक 20 एकड़ भूमि से कचरा खाली हो जाएगा। वहीं 8 एकड़ भूमि पर 7.67 एलएमटी कचरा है। इस कचरे को हटाने के लिए 68 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसका टेंडर एक जुलाई को जारी हो जाएगा और 43 माह में इसे पूरा किया जाएगा।
निगम आयुक्त ने बताया कि शहर से रोजाना 200 टीपीडी सूखा तो वहीं 350 टीपीडी गीला कचरा निकलता है। अभी तक की क्षमता 150 टीपीडी कचरा निपटाने की है। सेनेटरी कचरे का निपटारा करने के लिए मशीन खरीदी गई है जो 10 जुलाई तक लगा दी जाएगी। खतरनाक कूडे़ का निपटारा करने के लिए अनुबंध किया गया है जो 15 जून से प्रभावी होगा।
निगम ने बताया कि उन्होंने आईआईटी रोपड़ को कचरा प्रबंधन को लेकर 15 सितंबर 2021 को प्रस्ताव भेजा था। 30 मार्च 2022 को इसका जवाब आया और अब आईआईअी रुड़की के साथ मिलकर कचरा प्रबंधन पर 15 जून से काम शुरू किया जाएगा। इस योजना का खाका 25 साल बाद के चंडीगढ़ से निकलने वाले कचरे को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। गीले और सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग प्लांट लगाने की भी योजना है।
याचिकाकर्ता ने कहा- शहर के अंदर नहीं बाहर ही हो कचरा प्रबंधन, हाईकोर्ट ने कहा-करो विचार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि निगम की ओर से जो जानकारी दी जा रही है वह केवल कागजों में है। डड्डूमाजरा में लगातार कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा है। प्रशासन यहीं पर प्लांट रखना चाह रहा है जबकि इस प्लांट को शहर से बाहर लेकर जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस पर प्रशासन से पूछा कि इस प्लांट को शहर से बाहर लेकर जाने की क्या संभावना है इस पर विचार कर अगली सुनवाई पर कोर्ट को सूचित किया जाए।
यह है मामला
डड्डूमाजरा निवासी दीप्ति सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया था कि वर्तमान में जिस स्थान पर कूड़ा डाला जा रहा है वहां के आसपास के लोगों की सेहत पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस सबके बारे में प्रशासन से लेकर नगर निगम सभी वाकिफ हैं लेकिन लोगों की परेशानी का निवारण करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय निवासियों ने इस डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही हाईकोर्ट को बताया गया कि इस ग्राउंड की गंदगी के कारण आसपास के लोगों का रहना तक मुहाल हो गया है। यहां से बदबू उठती है जिससे लोग इसके नजदीक आने से भी कतराते हैं। इस कचरे के ढेर के कारण लोगों के बीमार होने की घटनाएं बढ़ रहीं हैं।