Malnutrition in Chandigarh : सिटी ब्यूटीफुल का बुरा हुआ हाल, 20 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे कुपोषण से बेहाल
Malnutrition in Chandigarh : चौंकाने वाली बात यह है कि सर्वे की रिपोर्ट यह बयां कर रही है कि चंडीगढ़ के 6-23 माह तक के महज 19.1 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त भोजन मिल रहा है। इसे लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं।
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स्मार्ट सिटी के बच्चों का विकास खतरे में है। शहर के 20.2 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट जबकि 1.9 प्रतिशत ओवर वेट हैं। ऐसी स्थिति में उनके सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। यह हकीकत नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है जिसमें चंडीगढ़ के बच्चों के आकलन के बाद सामने आए विश्लेषण के आधार पर यह बताया गया है कि उनका विकास अवरुद्ध है। मानक के अनुसार न तो उनकी लंबाई बढ़ रही है न ही उनका सर्वागिण विकास हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि सर्वे की रिपोर्ट यह बयां कर रही है कि चंडीगढ़ के 6-23 माह तक के महज 19.1 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त भोजन मिल रहा है। इसे लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं।
भारतीय बाल अकादमी की सदस्य डॉ. गुंजन बवेजा का कहना है कि बच्चों को जन्म से 6 माह तक सिर्फ मां का दूध दिया जाना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके बाद मानक के अनुसार बच्चे को अन्य पोषक तत्व भी मिलने जरूरी हैं। माताएं अगर यह सोचती हैं कि भोजन की बजाय ज्यादा दूध पिलाना उनके बच्चे के लिए फायदेमंद होगा तो यह सही नहीं है। एक समय के बाद संतुलित और पौष्टिक आहार के न मिलने पर बच्चे धीरे धीरे संक्रमण की चपेट में आने लगते हैं। यह बाद में कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है इसलिए संतुलित आहार को नजरअंदाज करने की गलती न करें।
छह फीसदी जनसंख्या के बारे में सोचने की जरूरत
वर्ष 2021 में नीति आयोग ने फर्स्ट मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) जारी की थी। इसमें कहा गया कि चंडीगढ़ की करीब छह प्रतिशत जनसंख्या बेहद गरीब की श्रेणी में आती है। इसके अलावा चंडीगढ़ में पहले गरीबों के लिए राशन कार्ड बनाए गए थे। इन राशन कार्ड पर हर महीने गेहूं, चावल, चीनी आदि दिए जाते थे। वर्ष 2015 में प्रशासन ने राशन देना बंद कर दिया और जिनके राशन कार्ड बने थे उन्हें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम में जोड़ दिया। राशन के बदले एक तय राशि उनके खाते में दी जाने लगी। वर्तमान में ऐसे परिवारों की संख्या करीब 62500 है। पीले कार्डधारक परिवार के लिए 125.46 रुपये प्रति सदस्य (हर माह) व अंत्योदय अन्न योजना के तहत 878.22 रुपये प्रति परिवार जारी किए जाते हैं।
माताएं इसका रखें ध्यान
जीएमएसएच-16 की आहार विशेषज्ञ मनीषा अरोड़ा का कहना है कि गर्भवती महिला का सही पोषण उसके एवं गर्भ में पल रहे शिशु के जीवन पर दूरगामी प्रभाव डालता है। गर्भावस्था में मां का संपूर्ण आहार शिशु की लंबाई पर सकारात्मक असर डालता है। संपूर्ण आहार की कमी से बच्चे में बुद्धि का विकास भी नहीं हो पाता। गर्भावस्था के दौरान महिला को प्रतिदिन के भोजन में ऑयरन एवं फोलिक एसिड सही मात्रा में लेना भी जरूरी है। महिला के गर्भधारण के बाद पहले 1000 दिन बच्चे के शुरुआती जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास बाधित हो सकता है।
डॉ. रमनी सिंह बेदी बोले- स्थिति बेहद गंभीर
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमनीक सिंह बेदी ने बताया कि 23 नवंबर 2021 को जारी ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट (जीएनआर 2021) से पता चलता है कि भारत समेत 161 देशों को रिपोर्ट में शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि एनीमिया को कम करने में भारत ने कोई प्रगति नहीं की है या इसकी स्थिति और खराब होने की बात कही है। भारत उन 23 देशों में भी शामिल है जिन्होंने बच्चों में लंबाई के हिसाब से कम वजन की समस्या को दूर करने में कोई प्रगति नहीं की है या स्थिति और बिगड़ी है। इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
सर्वे रिपोर्ट बयां कर रही हकीकत
- 54.6 प्रतिशत बच्चे 6-59 माह के एनीमियाग्रस्त हैं चंडीगढ़ में।
- 5 साल तक के 20.2 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट हैं
- 5 साल से कम उम्र के 1.9 प्रतिशत बच्चे ओवरवेट हैं
- 6-23 माह के महज 19.1 प्रतिशत बच्चे पर्याप्त भोजन प्राप्त कर रहे हैं
- 5 साल के 25.2 प्रतिशत बच्चों का विकास अवरूद्ध है
- 5 साल के 2.4 प्रतिशत बच्चों का वजन और लंबाई मानक के अनुसार नहीं है
चंडीगढ़ में सेक्टरों की तुलना में कॉलोनी में रहने वालों की संख्या कहीं ज्यादा है। वहां गरीबी है। शिक्षा का स्तर भी कम है। लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक नहीं है। इस कारण वहां का नागरिक स्वास्थ्य स्तर कमजोर है। इसका सीधा प्रभाव उस क्षेत्र के बच्चों पर भी पड़ रहा है। जो कुपोषण का कारण बन रहा है। वहां लोगों को पता ही नहीं है कि बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए कौन से तत्व जरूरी हैं।
-डॉ. रमनीक सिंह बेदी, बाल रोग विशेषज्ञ व वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के एडवाइजर