चंडीगढ़: पेराफेरी एडवाइजरी कमेटी की चेयरमैन बनीं मेयर सरबजीत कौर, निगम में शामिल 13 गांवों के पूर्व सरपंचों से मांगा विकास का खाका
मेयर ने स्वयं को पेराफेरी एडवाइजरी कमेटी का चेयरमैन बनाने की इच्छा जताई थी। उनका तर्क था कि नगर निगम के अंतर्गत गांवों को शामिल किया गया है। यहां सबसे ज्यादा समस्या पेराफेरी को लेकर है। गांव के लोग भी निगम की ओर ही हमेशा रुख करते हैं।
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चंडीगढ़ की मेयर सरबजीत कौर को प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने पेराफेरी एडवाइजरी कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह जिम्मेदारी मिलते ही मेयर ने नगर निगम में शामिल 13 गांवों के पूर्व सरपंचों को पत्र लिखकर बैठक में आमंत्रित किया है और उनसे गांवों के विकास कार्यों का खाका पेश करने के साथ लाल डोरे के बाहर बने घरों के लिए सुझाव देने को कहा है। बैठक में आए सुझावों को मेयर प्रशासक व उनके सलाहकार धर्मपाल के साथ होने वाली बैठक में पेश करेंगी और इस पर विस्तार से चर्चा करेंगी।
प्रशासक की ओर से कुछ कमेटियों का गठन किया जाना था। मेयर ने स्वयं को पेराफेरी एडवाइजरी कमेटी का चेयरमैन बनाने की इच्छा जताई थी। उनका तर्क था कि नगर निगम के अंतर्गत गांवों को शामिल किया गया है। यहां सबसे ज्यादा समस्या पेराफेरी को लेकर है। गांव के लोग भी निगम की ओर ही हमेशा रुख करते हैं। तब लाल डोरा के अंदर और बाहर के क्षेत्रों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती और काम भी नहीं हो पाता। दो सालों से ग्रामीणों के सामने यही समस्या है इसलिए कमेटी के अंतर्गत गांव के लोगों की बैठक बुलाकर उनके सुझावों व समस्याओं को वह सीधे प्रशासक व उनके सलाहकार तक पहुंचा सकती हैं।
हर साल बनती हैं दस कमेटियां, तैयार होती है रणनीति
प्रशासक हर साल शहर के विकास कार्यों और समस्याओं के बेहतर समाधान के लिए दस कमेटियां बनाते हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, पेराफेरी एडवाइजरी कमेटी शामिल हैं। इन कमेटियों का चेयरमैन किसी विशेष व्यक्ति को बनाया जाता है, जो संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर उस विभाग से जुड़ी समस्याओं को सामने रखता है। बेहतर विकास के लिए सुझाव देता है। संबंधित विभाग उन सुझावों के आधार पर प्रशासक व सलाहकार के सामने रिपोर्ट देता है। उसके बाद उस पर आगे की कार्रवाई होती है।
गांव के पूर्व सरपंचों से मेयर ने मांगा लाल डोरे का ब्योरा
मेयर सरबजीत कौर ने हाल ही में 13 गांवों के पूर्व सरपंचों को बुलाकर बैठक की थी। इसमें उन्होंने कहा कि प्रशासन और निगम के पास चंडीगढ़ के लाल डोरे को लेकर जो ब्योरा है, उससे बेहतर जानकारी गांव के पूर्व सरपंच दे सकते हैं क्योंकि वह गांव में रहे हैं और वहां की भौगोलिक स्थिति के बारे में उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। मेयर ने कहा कि अगली बैठक में पूर्व सरपंच लाल डोरे के अंदर आने वाले क्षेत्रों का ब्योरा देंगे। उसके बाद वहां की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर सुझाव देंगे। इसके आधार पर रिपोर्ट बनाकर प्रशासक को दी जाएगी।
चार गांवों में नहीं शुरू हुए विकास कार्य, फिर लगेगा एजेंडा
मेयर ने गांवों में चल रहे विकास कार्यों को लेकर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा से भी चर्चा की थी। इसके बाद आयुक्त ने पब्लिक हेल्थ विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। इसमें पता चला कि खुड्डा अलीशेर, खुड्डा लाहौरा, खुड्डा जस्सू, रायपुर खुर्द में अब तक विकास कार्य शुरू ही नहीं हुए हैं। आयुक्त ने इस संबंध में मेसर्स एस्क्वायर कंपनी को डिबार भी कर दिया है। जल्द चारों गांव के लिए नए सिरे से टेंडर लगाकर काम शुरू कराया जाएगा।
मुझे जो जिम्मेदारी दी गई है, उसके बाद मैंने पूर्व सरपंचों की बैठक बुलाकर अपने गांव के विकास कार्यों का खाका देने को कहा है। पेराफेरी के अंतर्गत आने वाले सभी घरों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासक व उनके सलाहकार के सामने रिपोर्ट दी जाएगी। मेरा प्रयास रहेगा कि गांव के लोगों को बेहतर मेलभूत सुविधाएं मिल सकें। जल्द दूसरी बैठक पूर्व सरपंचों के साथ की जाएगी। - सरबजीत कौर, मेयर