चंडीगढ़ मेयर चुनाव विवाद: मनोज सोनकर फिलहाल बने रहेंगे मेयर, हाईकोर्ट ने प्रशासन से तीन सप्ताह में मांगा जवाब
चंडीगढ़ में मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ था। 16 वोट के साथ भाजपा के मनोज सोनकर जीत गए थे। वहीं आप और कांग्रेस गठबंधन के 20 में से 8 वोट अमान्य घोषित कर दिए गए थे। हार के बाद गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप टीटा हाईकोर्ट पहुंच गए थे और चुनाव रद्द कर दोबारा करवाने की याचिका दायर की थी।
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आप-कांग्रेस गठबंधन के पास बहुमत होते हुए भी पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर वोटों की गिनती के दौरान मतपत्रों से छेड़छाड़ कर भाजपा के प्रत्याशी को जिताने का आरोप लगाते हुए चुनाव रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन व अन्य प्रतिवादियों को 26 फरवरी के लिए नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने व चुनाव परिणाम पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है जो याची पक्ष के लिए बड़ा झटका रहा।
धांधली का आरोप लगाते हुए मेयर पद के लिए कांग्रेस-आप के प्रत्याशी कुलदीप कुमार ने बताया गया कि हाईकोर्ट में चंडीगढ़ के डीजीपी ने पारदर्शी चुनाव करवाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई थी। बावजूद इसके चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए। बीजेपी के प्रत्याशी को जिताने के लिए आप-कांग्रेस गठबंधन के वोटों के साथ छेड़छाड़ हुई।
याचिका में मेयर चुनाव की प्रक्रिया को रद्द करने, चुनाव से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड सील करने, मेयर के पदभार संभालने पर रोक लगाने, इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में हुई धांधली की जांच करवाने और नए सिरे से हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में चुनाव करवाने का निर्देश जारी करने की अपील की गई है।
बुधवार को सुनवाई आरंभ होते ही याची पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट गुरमिंदर गैरी पेश हुए और मंगलवार को मेयर चुनाव की प्रक्रिया के दौरान पीठासीन अधिकारी की ओर से मतपत्रों से छेड़छाड़ को लेकर पूरी जानकारी दी। हाईकोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद याचिका पर नोटिस जारी कर दिया लेकिन किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश जारी नहीं किया।
याची पक्ष की दलील
हाईकोर्ट को बताया गया कि पीठासीन अधिकारी ने मतों की गिनती के दौरान कांग्रेस-आप के पार्षदों के मतपत्रों पर पेन से खुद ही निशान लगाकर इन्हें अवैध घोषित कर दिया। यह वीडियो टीवी पर चला और पूरे देश ने देखा कि कैसे लोकतंत्र की हत्या की गई। वोटों की गिनती के दौरान याची पक्ष के लोगों को उन्होंने अपने पास तक नहीं आने दिया। चुनाव को निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से करवाने की अंडरटेकिंग देने के बाद भी प्रशासन इसमें विफल रहा।
प्रशासन की दलील
चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि यह याचिका वैध ही नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं बावजूद इसके हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसके साथ ही यह भी बताया कि चुनाव से जुड़ा रिकॉर्ड सेफ रूम में रखा गया है।
डीजीपी की दलील
हाईकोर्ट को डीजीपी की ओर से बताया गया कि चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था से जुड़ी किसी भी तरह की कोई शिकायत याचिका में ही मौजूद नहीं है। कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव करवाए गए हैं और ऐसे में उनकी इस याचिका में कोई भूमिका नहीं है।
किसी भी राहत से हाईकोर्ट का इन्कार
याची पक्ष ने हाईकोर्ट से कहा कि याचिका लंबित रहते चुनाव के परिणाम पर रोक लगाई जाए लेकिन हाईकोर्ट ने इससे इन्कार कर दिया। इसके बाद निवेदन किया गया कि मनोज सोनकर के मेयर के तौर पर कार्य करने पर रोक लगाई जाए लेकिन इसके लिए भी हाईकोर्ट ने मना कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले यूटी प्रशासन को पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। उनका जवाब आने के बाद ही किसी भी प्रकार की राहत को लेकर फैसला लिया जाएगा।