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Chandigarh: चंडीगढ़ से कांग्रेस के मनीष तिवारी जीते, घोषणा देर से होने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा
Tue, 04 Jun 2024 08:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 04 Jun 2024 08:50 PM IST
सार
कांग्रेस के मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की है और लंबे समय से चंडीगढ़ के मुद्दों पर संसद से लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के समक्ष जनता की बात उठाते आए हैं। वह चंडीगढ़ के सेक्टर-4 में रहते हैं।
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मनीष तिवारी की जीत पर जश्न मनाते कांग्रेसी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
चंडीगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस के मनीष तिवारी जीत गए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा में काफी देरी हुई जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी रोष दिखा। उन्होंने भाजपा के संजय टंडन को 3800 वोटों से मात दी।
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मनीष तिवारी के पिता वीएन तिवारी पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुके हैं और मां अमृत तिवारी पीजीआई चंडीगढ़ में ओरल हेल्थ सेंटर में प्रोफेसर एवं प्रमुख रही थीं। ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले मनीष तिवारी के पिता की वर्ष 1984 में सेक्टर-24 में आतंकियों ने हत्या कर दी थी। तिवारी ने पंजाब विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की है और लंबे समय से चंडीगढ़ के मुद्दों पर संसद से लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के समक्ष जनता की बात उठाते आए हैं। वह चंडीगढ़ के सेक्टर-4 में रहते हैं।
कई साल से चंडीगढ़ में सियासी जमीन तैयार कर रहे थे तिवारी
मनीष तिवारी चंडीगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। वह कई साल से अपने लिए यहां सियासी जमीन तैयार कर रहे थे। वर्ष 2022 की शुरुआत में जब चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण की खबर आई तो तिवारी ने इसे लेकर संसद में सवाल उठाया। पूछा कि जब विभाग फायदे में है तो उसे बेचा क्यों जा रहा है।
फरवरी 2022 में जब शहर में अब तक का सबसे बड़ा ब्लैकआउट हुआ था तो तिवारी ने सांसद किरण खेर पर सवाल उठाते हुए गृहमंत्री से दखल की मांग की थी। कॉलोनी नंबर-4 को तोड़े जाने का भी उन्होंने विरोध जताया था। यही नहीं, तिवारी ने श्री आनंदपुर साहिब से सांसद होते हुए भी अपने एमपीलैड फंड से लाखों रुपये बापूधाम, धनास, मनीमाजरा में ओपन एयर जिम और कैमरे लगाने पर खर्च किए।
इंडिया गठबंधन में पूरी तरह फिट बैठे तिवारी
चंडीगढ़ सीट पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। तिवारी को टिकट मिलने के पीछे यह भी बड़ा कारण है कि वह गठबंधन के मानकों पर पूरी तरह फिट बैठ रहे थे। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर आप का दामन थाम चुके हैं। प्रदीप छाबड़ा और चंद्रमुखी शर्मा का नाम उनमें प्रमुख है। चंद्रमुखी शर्मा बेशक आप में शामिल हो गए हों लेकिन तिवारी से उनकी दोस्ती कभी कम नहीं हुई। ऐसे ही आप के कई अन्य नेताओं से मनीष तिवारी की अच्छी बनती है। ऐसे में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी तिवारी को लेकर माहौल बनाया।
मनीष तिवारी चंडीगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। वह कई साल से अपने लिए यहां सियासी जमीन तैयार कर रहे थे। वर्ष 2022 की शुरुआत में जब चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण की खबर आई तो तिवारी ने इसे लेकर संसद में सवाल उठाया। पूछा कि जब विभाग फायदे में है तो उसे बेचा क्यों जा रहा है।
फरवरी 2022 में जब शहर में अब तक का सबसे बड़ा ब्लैकआउट हुआ था तो तिवारी ने सांसद किरण खेर पर सवाल उठाते हुए गृहमंत्री से दखल की मांग की थी। कॉलोनी नंबर-4 को तोड़े जाने का भी उन्होंने विरोध जताया था। यही नहीं, तिवारी ने श्री आनंदपुर साहिब से सांसद होते हुए भी अपने एमपीलैड फंड से लाखों रुपये बापूधाम, धनास, मनीमाजरा में ओपन एयर जिम और कैमरे लगाने पर खर्च किए।
इंडिया गठबंधन में पूरी तरह फिट बैठे तिवारी
चंडीगढ़ सीट पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। तिवारी को टिकट मिलने के पीछे यह भी बड़ा कारण है कि वह गठबंधन के मानकों पर पूरी तरह फिट बैठ रहे थे। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर आप का दामन थाम चुके हैं। प्रदीप छाबड़ा और चंद्रमुखी शर्मा का नाम उनमें प्रमुख है। चंद्रमुखी शर्मा बेशक आप में शामिल हो गए हों लेकिन तिवारी से उनकी दोस्ती कभी कम नहीं हुई। ऐसे ही आप के कई अन्य नेताओं से मनीष तिवारी की अच्छी बनती है। ऐसे में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी तिवारी को लेकर माहौल बनाया।
