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मां की मौत से अंजान बच्ची की बात सुन फफक पड़ा पिता
कुलदीप शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 10 Mar 2016 11:47 AM IST
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सड़क हादसे में मरने वाली महिला परिवार के साथ
- फोटो : अमर उजाला
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मां की हादसे में मौत हो गई। इस बात से अंजान बेटी ने शाम को घर पहुंचे पिता से कुछ ऐसा कहा कि वह फूट-फूट कर रोने लगा। मृतक महिला गीता और संजय के चार बच्चे हैं। सभी बच्चे शाम को अपने माता पिता के आने का इंतजार कर रहे थे। रोजाना की तरह बच्चों के इंतजार की घड़ी खत्म हुई।
दरवाजे पर खटखट की आवाज के साथ पिता ने दस्तक दी। कमरे में पांच साल की मासूम ने दौड़कर दरवाजा खोला तो सामने पिता को देखकर खुशी से उछल पड़ी। पिता की गोद में बैठकर वह बोली है पापा आज आप पहले आकर जीत गए। मम्मी तो अभी तक नहीं पहुंची। इसलिए वह हार गई। बच्ची को क्या पता कि उसकी मां आज लेट नहीं है बल्कि वह जिंदगी की जंग हारकर बहुत दूर चली गई थी।
बच्ची की ये मासूमियत भरी बातें सुनकर पिता के आंसू नहीं रुके। अपने चार बच्चों से लिपटकर संजय रोने लगा। बड़ी मुश्किल से वह बच्ची से बोला, बेटा अब तुम्हारी मम्मी कभी घर नहीं आएगी। इसके बाद पूरे घर में मातम छा गया। पिता ने रोते हुए बच्चों को हादसे की बात बताई। सभी बच्चे जैसे सन्न रह गए। बच्चों से उनका साया छिन गया था। उनकी देखभाल अब कौन करेगा। यह पिता की सबसे बड़ी चिंता है।
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20 साल पहले आए थे चंडीगढ़
मृतक महिला गीता देवी के पति संजय ने बताया कि वह मूलरूप से भागलपुर बिहार के हैं। 20 साल पहले वह बिहार से अकेले चंडीगढ़ नौकरी करने आया था। इसके बाद उसने शादी की और चार बच्चे चंडीगढ़ में ही हुए। उसकी दो बेटियां और दो बेटे हैं। इसमें बड़ी बेटी (16), बेटा (12), बेटा (8) और इसके बाद सबसे छोटी बेटी 5 साल की है। उसके तीन बच्चे हल्लोमाजरा सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। जबकि छोटी बेटी ने अभी स्कूल जाना शुरू किया था।
मम्मी-पापा और बच्चों की टीम
संजय ने बताया कि एक साल पहले बच्चों ने एक टीम बनाई थी। इसमें दोनों पति-पत्नी में जल्दी घर आने की शर्त लगती थी। उसकी टीम में बड़ी बेटी और तीसरे नंबर का बेटा था। जबकि पत्नी की टीम में दूसरे नंबर का बेटा लड़का और सबसे छोटी बच्ची थी। घर में रहने वाले परिवार के चारों सदस्यों में एक एक का नंबर दरवाजा खोलने में लगता था। बुधवार को उसकी पांच साल की बच्ची का नंबर था। इसलिए उसने दरवाजा खोला, और उसकी टीम ‘हार’ गई।
कहते-कहते पिता बेसुध होकर गिर पड़ा
संजय ने बताया कि वह मोहाली में काम करता है। जबकि उसकी पत्नी हल्लोमाजरा में काम करती थी। बुधवार को घर से निकलते समय उसकी बेटी ने मां से कहा था कि मम्मी आज जल्दी आना वरना हमारी टीम हार जाएगी। इतना कहने के बाद दुखी पिता के मुंह के शब्द नहीं निकले और वह बेसुध होकर गिर पड़ा।
लेबर डिपार्टमेंट और प्रशासन की लापरवाही
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव शशिशंकर तिवारी ने कहा कि लगातार गरीब मजदूर शोषण का शिकार हो रहे हैं। इसका जिम्मेदार चंडीगढ़ लेबर डिपार्टमेंट और प्रशासन की लापरवाही है। कभी किसी फैक्टरी वालों की जांच नहीं की जाती। जबकि, पिछली कई मौतें सुरक्षा किट न देने पर हुई हैं। उन्होंने मृतका के परिवार को 20 लाख का मुआवजा देने की मांग की है। जबकि कांग्रेस प्रदेश सचिव अरविंद सिंह ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन के खिलाफ धरना शुरू किया जाएगा।
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दरवाजे पर खटखट की आवाज के साथ पिता ने दस्तक दी। कमरे में पांच साल की मासूम ने दौड़कर दरवाजा खोला तो सामने पिता को देखकर खुशी से उछल पड़ी। पिता की गोद में बैठकर वह बोली है पापा आज आप पहले आकर जीत गए। मम्मी तो अभी तक नहीं पहुंची। इसलिए वह हार गई। बच्ची को क्या पता कि उसकी मां आज लेट नहीं है बल्कि वह जिंदगी की जंग हारकर बहुत दूर चली गई थी।
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बच्ची की ये मासूमियत भरी बातें सुनकर पिता के आंसू नहीं रुके। अपने चार बच्चों से लिपटकर संजय रोने लगा। बड़ी मुश्किल से वह बच्ची से बोला, बेटा अब तुम्हारी मम्मी कभी घर नहीं आएगी। इसके बाद पूरे घर में मातम छा गया। पिता ने रोते हुए बच्चों को हादसे की बात बताई। सभी बच्चे जैसे सन्न रह गए। बच्चों से उनका साया छिन गया था। उनकी देखभाल अब कौन करेगा। यह पिता की सबसे बड़ी चिंता है।
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20 साल पहले आए थे चंडीगढ़
मृतक महिला गीता देवी के पति संजय ने बताया कि वह मूलरूप से भागलपुर बिहार के हैं। 20 साल पहले वह बिहार से अकेले चंडीगढ़ नौकरी करने आया था। इसके बाद उसने शादी की और चार बच्चे चंडीगढ़ में ही हुए। उसकी दो बेटियां और दो बेटे हैं। इसमें बड़ी बेटी (16), बेटा (12), बेटा (8) और इसके बाद सबसे छोटी बेटी 5 साल की है। उसके तीन बच्चे हल्लोमाजरा सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। जबकि छोटी बेटी ने अभी स्कूल जाना शुरू किया था।
मम्मी-पापा और बच्चों की टीम
संजय ने बताया कि एक साल पहले बच्चों ने एक टीम बनाई थी। इसमें दोनों पति-पत्नी में जल्दी घर आने की शर्त लगती थी। उसकी टीम में बड़ी बेटी और तीसरे नंबर का बेटा था। जबकि पत्नी की टीम में दूसरे नंबर का बेटा लड़का और सबसे छोटी बच्ची थी। घर में रहने वाले परिवार के चारों सदस्यों में एक एक का नंबर दरवाजा खोलने में लगता था। बुधवार को उसकी पांच साल की बच्ची का नंबर था। इसलिए उसने दरवाजा खोला, और उसकी टीम ‘हार’ गई।
कहते-कहते पिता बेसुध होकर गिर पड़ा
संजय ने बताया कि वह मोहाली में काम करता है। जबकि उसकी पत्नी हल्लोमाजरा में काम करती थी। बुधवार को घर से निकलते समय उसकी बेटी ने मां से कहा था कि मम्मी आज जल्दी आना वरना हमारी टीम हार जाएगी। इतना कहने के बाद दुखी पिता के मुंह के शब्द नहीं निकले और वह बेसुध होकर गिर पड़ा।
लेबर डिपार्टमेंट और प्रशासन की लापरवाही
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव शशिशंकर तिवारी ने कहा कि लगातार गरीब मजदूर शोषण का शिकार हो रहे हैं। इसका जिम्मेदार चंडीगढ़ लेबर डिपार्टमेंट और प्रशासन की लापरवाही है। कभी किसी फैक्टरी वालों की जांच नहीं की जाती। जबकि, पिछली कई मौतें सुरक्षा किट न देने पर हुई हैं। उन्होंने मृतका के परिवार को 20 लाख का मुआवजा देने की मांग की है। जबकि कांग्रेस प्रदेश सचिव अरविंद सिंह ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन के खिलाफ धरना शुरू किया जाएगा।