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स्कूली शिक्षा में पंजाब से पिछड़ा चंडीगढ़, दो साल से था नंबर वन
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चंडीगढ़। शहर के स्कूल बुनियादी सुविधाओं, समान शिक्षा, सीखने के परिणाम और गुणवत्ता के पैमानों में कभी देश में सर्वोच्च स्थान रखते थे। लेकिन इस बार चंडीगढ़ के स्कूलों की हालत पिछले वर्षों के मुकाबले खराब हुई है। इसका पता केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी निष्पादन ग्रेड सूचकांक (पीजीआई) से चलता है। इस बार पीजीआई रैंकिंग में चंडीगढ़ को पछाड़ कर पंजाब पहले नंबर पर हैं जबकि पिछले दो वर्षों चंडीगढ़ पहले स्थान पर था। पंजाब ने वर्ष 2019-20 में 929 और चंडीगढ़ ने 912 स्कोर किया है।
मंत्रालय ने 70 बिंदुओं के पैमाने पर आधारित परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) रिपोर्ट को 2018 से तैयार करने की शुरुआत की है। मंत्रालय ने इन बिंदुओं के आधार पर सभी राज्यों से ऑनलाइन जानकारी मांगी थी और उनकी सूचना के आधार पर 2019-20 की रिपोर्ट तैयार की गई। राज्यों की शिक्षा व्यवस्था के प्रदर्शन को पांच पैमानों में विभाजित किया गया है। इसमें पहला सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, दूसरा शिक्षा तक पहुंच, तीसरा बुनियादी सुविधाएं, चौथा समान शिक्षा और पांचवां शासन प्रक्रियाएं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षकों, प्राचार्यों और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी, नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण की कमी, शिक्षकों के अपर्याप्त प्रशिक्षण, वित्त की समय पर उपलब्धता के मुद्दे शिक्षा प्रणाली को विफल करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।
चंडीगढ़ शासन प्रक्रियाओं में नौवें और समान शिक्षा में सातवें स्थान पर
सीखने के परिणाम और गुणवत्ता में राजस्थान पहले और चंडीगढ़ दूसरे स्थान पर, शिक्षा तक पहुंच में केरल और पंजाब के बाद चंडीगढ़, बुनियादी सुविधाओं में भी पंजाब और दिल्ली के बाद चंडीगढ़ को स्थान मिला है। वहीं समान शिक्षा में चंडीगढ़ सातवें स्थान पर है। वहीं शासन प्रक्रियाओं में चंडीगढ़ ने सबसे बुरा प्रदर्शन किया है। इसमें चंडीगढ़ नौवें स्थान पर है और पंजाब पहले व अंदमान-निकोबार दूसरे स्थान पर है।
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2017-18 व 2018-19 में पहले पायदान पर था चंडीगढ़
वर्ष 2018-19 में 887 और 2017-18 में 836 स्कोर लेकर चंडीगढ़ का देश में पहला स्थान था। शहर के स्कूलों में लगातार हो रही शिक्षकों की कमी, समान शिक्षा और प्रभावी शासन प्रक्रिया के अभाव में चंडीगढ़ में शिक्षा का स्तर गिरा है।
शिक्षा में सुधार के लिए नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण जरूरी
किसी भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण बहुत जरूरी है। इसके साथ ही शिक्षकों की ट्रेनिंग भी सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। शहर के स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ट्रेनिंग, इनोवेशन और पढ़ाने के तरीकों में सुधार उसकी देश के स्कूलों में रैंकिंग को बढ़ाने में मदद कर सकता है। - बीएल शर्मा, पूर्व शिक्षा सचिव
कोट..
चंडीगढ़ यूटी में अभी पहले स्थान पर है। राज्यों में भी चंडीगढ़ ने अच्छा प्रदर्शन कर दूसरा स्थान हासिल किया है। हमारे स्कूल देश में सबसे बेहतरीन स्कूलों में हैं। - मनोज परिदा, सलाहकार
पंजाब के पहले स्थान पर आने के ये रहे कारण
जानकारी के अनुसार पंजाब ने पिछले वर्षों में शिक्षण व्यवस्था में बड़े स्तर पर योजना बनाकर सुधार किया है। पंजाब ने पिछले तीन वर्षों में लगभग तीन हजार स्कूलों को स्मार्ट स्कूल में तब्दील किया है। इसके साथ ही शिक्षा के स्तर, बुनियादी सुविधाओं, समान शिक्षा और शासन प्रक्रिया में व्यापक सुधार किया है। इसके नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण के लिए हर स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं। इनकी बदौलत पंजाब के सरकारी स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 5 लाख से अधिक नए बच्चों ने दाखिला लिया है।
चंडीगढ़ के पिछड़ने के ये रहे कारण
चंडीगढ़ में पिछले दो वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या में तो सुधार हुआ है, लेकिन शिक्षकों की कमी और शासन प्रक्रिया में गिरावट ने चंडीगढ़ के शिक्षा स्तर को गिराया है। शहर के स्कूल में पिछले वर्ष में पर्यवेक्षण और निगरानी में काफी गिरावट हुई है। इसका एक बड़ा कारण उच्च अधिकारियों का निष्क्रय होना है। शिक्षा विभाग में ऊपर से नीचे के अधिकारियों के बीच तालमेल की भी कमी आई है। जानकारों के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नियमित तौर पर कमेटियां बनाकर स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था की निगरानी की जानी चाहिए और कमियों की रिपोर्ट बनाकर उसके आधार पर योजनाबद्ध तरीके से सुधार किया जाना चाहिए।
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मंत्रालय ने 70 बिंदुओं के पैमाने पर आधारित परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) रिपोर्ट को 2018 से तैयार करने की शुरुआत की है। मंत्रालय ने इन बिंदुओं के आधार पर सभी राज्यों से ऑनलाइन जानकारी मांगी थी और उनकी सूचना के आधार पर 2019-20 की रिपोर्ट तैयार की गई। राज्यों की शिक्षा व्यवस्था के प्रदर्शन को पांच पैमानों में विभाजित किया गया है। इसमें पहला सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, दूसरा शिक्षा तक पहुंच, तीसरा बुनियादी सुविधाएं, चौथा समान शिक्षा और पांचवां शासन प्रक्रियाएं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षकों, प्राचार्यों और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी, नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण की कमी, शिक्षकों के अपर्याप्त प्रशिक्षण, वित्त की समय पर उपलब्धता के मुद्दे शिक्षा प्रणाली को विफल करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।
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चंडीगढ़ शासन प्रक्रियाओं में नौवें और समान शिक्षा में सातवें स्थान पर
सीखने के परिणाम और गुणवत्ता में राजस्थान पहले और चंडीगढ़ दूसरे स्थान पर, शिक्षा तक पहुंच में केरल और पंजाब के बाद चंडीगढ़, बुनियादी सुविधाओं में भी पंजाब और दिल्ली के बाद चंडीगढ़ को स्थान मिला है। वहीं समान शिक्षा में चंडीगढ़ सातवें स्थान पर है। वहीं शासन प्रक्रियाओं में चंडीगढ़ ने सबसे बुरा प्रदर्शन किया है। इसमें चंडीगढ़ नौवें स्थान पर है और पंजाब पहले व अंदमान-निकोबार दूसरे स्थान पर है।
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2017-18 व 2018-19 में पहले पायदान पर था चंडीगढ़
वर्ष 2018-19 में 887 और 2017-18 में 836 स्कोर लेकर चंडीगढ़ का देश में पहला स्थान था। शहर के स्कूलों में लगातार हो रही शिक्षकों की कमी, समान शिक्षा और प्रभावी शासन प्रक्रिया के अभाव में चंडीगढ़ में शिक्षा का स्तर गिरा है।
शिक्षा में सुधार के लिए नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण जरूरी
किसी भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण बहुत जरूरी है। इसके साथ ही शिक्षकों की ट्रेनिंग भी सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। शहर के स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ट्रेनिंग, इनोवेशन और पढ़ाने के तरीकों में सुधार उसकी देश के स्कूलों में रैंकिंग को बढ़ाने में मदद कर सकता है। - बीएल शर्मा, पूर्व शिक्षा सचिव
कोट..
चंडीगढ़ यूटी में अभी पहले स्थान पर है। राज्यों में भी चंडीगढ़ ने अच्छा प्रदर्शन कर दूसरा स्थान हासिल किया है। हमारे स्कूल देश में सबसे बेहतरीन स्कूलों में हैं। - मनोज परिदा, सलाहकार
पंजाब के पहले स्थान पर आने के ये रहे कारण
जानकारी के अनुसार पंजाब ने पिछले वर्षों में शिक्षण व्यवस्था में बड़े स्तर पर योजना बनाकर सुधार किया है। पंजाब ने पिछले तीन वर्षों में लगभग तीन हजार स्कूलों को स्मार्ट स्कूल में तब्दील किया है। इसके साथ ही शिक्षा के स्तर, बुनियादी सुविधाओं, समान शिक्षा और शासन प्रक्रिया में व्यापक सुधार किया है। इसके नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण के लिए हर स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं। इनकी बदौलत पंजाब के सरकारी स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 5 लाख से अधिक नए बच्चों ने दाखिला लिया है।
चंडीगढ़ के पिछड़ने के ये रहे कारण
चंडीगढ़ में पिछले दो वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या में तो सुधार हुआ है, लेकिन शिक्षकों की कमी और शासन प्रक्रिया में गिरावट ने चंडीगढ़ के शिक्षा स्तर को गिराया है। शहर के स्कूल में पिछले वर्ष में पर्यवेक्षण और निगरानी में काफी गिरावट हुई है। इसका एक बड़ा कारण उच्च अधिकारियों का निष्क्रय होना है। शिक्षा विभाग में ऊपर से नीचे के अधिकारियों के बीच तालमेल की भी कमी आई है। जानकारों के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नियमित तौर पर कमेटियां बनाकर स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था की निगरानी की जानी चाहिए और कमियों की रिपोर्ट बनाकर उसके आधार पर योजनाबद्ध तरीके से सुधार किया जाना चाहिए।