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हिट एंड रन : 45 हादसे, 21 मौत, 1 भी आरोपी पकड़ में नहीं आया

Mon, 12 Jun 2017 09:16 AM IST
कुलदीप शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 12 Jun 2017 09:16 AM IST
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chandigarh hit and run cases
ट्रैफिक - फोटो : File Photo
गंभीर अपराधों को सुलझाने में फिसड्डी चंडीगढ़ पुलिस हिट एंड रन मामले में फरार अपराधियों को पकड़ने में नाकाम साबित हुई है। पुलिस एक्सीडेंट स्पॉट पर मात्र पांच मिनट में पहुंचने का दावा करती आई है, लेकिन हकीकत है कि यहां पर कोई भी टक्कर मारकर आसानी से फरार हो जाता है। साल 2017 में हिट एंड रन के 45 ऐसे मामले हैं, जिन्हें पुलिस अब तक पकड़ नहीं पाई है।
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इनमें से 21 ऐसे मामले हैं, जिनमें पीड़ितों की मौत हो गई थी। हैरानी की बात यह है कि पूरे शहर में करीब 14 हजार कैमरे लगे हैं, जो आरोपियों को पकड़ने में नाकाम साबित हुए हैं। चंडीगढ़ पुलिस का दावा है कि अपराधियों को पकड़ने की पूरी कोशिश की जा रही है। रात के वक्त नाके बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि ओवरस्पीड को रोका जा सके।
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हिट एंड रन की पांच सबसे बड़ी वजहें 
1. सभी कैमरे बेहद खराब क्वालिटी के हैं। जिनके कारण वाहनों की नंबर प्लेट ट्रैक नहीं हो पातीं।
2. रात के वक्त पीसीआर के अलावा सड़कों पर चंडीगढ़ पुलिस नहीं दिखती।
3. रात को सभी ट्रैफिक लाइट सिग्नल फ्री कर दी जाती हैं, जिसके कारण कई बार हादसे सामने आए हैं।
4. रात के वक्त ओवरस्पीड वाहनों के चालान नहीं काटे जाते।
5. डंकन ड्राइव के नाके सिर्फ शनिवार व शुक्रवार को ही लगते हैं।

हर दिन एक हादसा

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हादसे का फुटेज - फोटो : File Photo
चंडीगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते ग्राफ का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 150 दिनों में 147 हादसे पुलिस ने दर्ज किए हैं। छोटे हादसों का तो कोई जिक्र नहीं है। हिट एंड रन के 21 ऐसे मामले हैं, जिनमें पीड़ितों की मौत हो चुकी हैं। परिजन बार-बार आरोपियों को गिरफ्तार करने की गुहार लगा चुके हैं। उनका कहना है कि हादसे में उन्होंने अपनों को खोया। ऊपर से पुलिस का रवैया दर्द को और बढ़ा देता है।

भारी-भरकम टीम, फिर भी नाकाम
चंडीगढ़ पुलिस के पास भारी-भरकम टीम है। इसके बावजूद टक्कर मारने वाले वाहन चालकों को पकड़ने में पुलिस नाकाम रही है। चंडीगढ़ में कुल 60 पीसीआर, 20 चीता स्क्वॉयड, 300 ट्रैफिक पुलिककर्मी, चौक व सड़क प्वाइंट्स पर 100 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

‘मैं खुद कैमरे से हत्यारे को तलाश कर रहा हूं’
5 जून 2017 की शाम सेक्टर-20/21 के लाइट प्वाइंट पर अज्ञात बाइक की टक्कर से गंभीर घायल 7 वर्षीय मासूम हिमांशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। हिमांशु अपने परिजनों के साथ सेक्टर-20 स्थित मार्केट में खरीददारी करने साथ आया था, जैसे ही वहां से निकला बाइक सवार टक्कर मारकर फरार हो गया।

हिमांशु के मामा छत्तरपाल ने आरोप लगाया कि अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी तो दूर, पुलिस गाड़ी का भी पता नहीं लगा सकी है। मैं खुद सड़क पर लगे कैमरे से फुटेज निकालकर हत्यारों को खोजने का प्रयास कर रहा हूं।
 

'पुलिस अन्याय कर रही है'

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हादसा - फोटो : file
सेक्टर-8 में नौंवी के स्टूडेंट अजीत को तेज रफ्तार मर्सिडीज सवार टक्कर मारकर फरार हो गया। हादसे के बाद अजीत दो हफ्ते तक कोमा में रहा। अजीत के पिता रामस्वरूप सेक्टर-8 स्थित एक कोठी में काम करते हैं। हादसे के बाद बेटे के इलाज में कोठी मालिक की मदद के बावजूद वह काफी कर्ज में आ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनके मासूम बेटे को न्याय व इलाज भी नहीं दिला सकी।

हिट एंड रन मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संबंधित थाना पुलिस लगी हुई है। पहले भी पुलिस ऐसे आरोपियों की गिरफ्तारी कर चुकी है। जल्द ही बचे आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
- ईश सिंघल, एसएसपी यूटी

हिट एंड रन के मामलों को लेकर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के आंकड़ों पर काम कर रहा हूं। अभी तक जो निचोड़ सामने आया है कि हिट एंड रन मामले को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती है। इसके साथ काफी सड़क हादसों में पुलिस के पास पुख्ता सुबूत नहीं होने के कारण केस कमजोर बन जाता है।
- हरमन सिद्धू, संस्थापक, अराइव सेफ संस्था चंडीगढ़।
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