चंडीगढ़ : पंजाब यूनिवर्सिटी में शासन सुधार के लिए बनी उच्चस्तरीय कमेटी, हाईकोर्ट में जवाब दाखिल
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चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट चुनाव करवाने को लेकर उच्च न्यायालय में चल रहे मामले में एक नया मोड़ आ गया। पीयू की ओर से उच्च न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल किया गया है, जिसमें चांसलर कार्यालय की ओर से पीयू शासन सुधार के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समिति का जिक्र किया गया है। साथ ही ये तर्क भी दिए गए हैं कि शासन सुधार के लिए यह कमेटी क्यों बनानी पड़ी है। अब 17 फरवरी को इस पर सुनवाई होगी। इस महत्वपूर्ण फैसले पर सबकी नजरें इस पर टिकीं हुई हैं।
सीनेट चुनाव करवाने के लिए पीयू के प्रो. केशव मल्होत्रा आदि ने हाईकोर्ट में केस दायर किया था और पीयू को पार्टी बनाया। लगभग दो माह से हाईकोर्ट में मामला चल रहा है। गुरुवार को पीयू को अपना जवाब देना था। सुनवाई हुई तो पीयू ने चांसलर कार्यालय की ओर से बनाई गई कमेटी को सामने रखा। साथ ही शपथ पत्र में वह सब बताया, जिसमें पीयू ने सीनेट चुनाव को लेकर कदम उठाए हैं।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को भेजे गए पत्र की कॉपी प्रस्तुत की गई है, जिसमें सीनेट चुनाव करवाने के लिए अनुमति मांगी गई है। इन राज्यों में भी सीनेट चुनाव की बूथ बनते हैं। इसके अलावा कई अन्य पत्र भी शपथ पत्र में शामिल किए गए हैं।
शासन सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने पर पीयू के तर्क
- पीयू की स्थापना 1882 में हुई थी। इंडियन यूनिवर्सिटी एक्ट 1904 के अंतर्गत पीयू एक्ट 1947 बनाया गया। जब से एक्ट बना है तब से शासन सुधार से लेकर शैक्षणिक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। यूजीसी ने 20 अक्तूबर 2020 को सभी शिक्षण संस्थानों को चिट्ठी जारी कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मुताबिक शासन सुधार की तैयारी करने को कहा था।
- वर्ष 2015 में नैक की टीम ने पीयू में दौरा किया था। उन्होंने शासन सुधार का ढांचा देखा। फैकल्टी डीन आदि लगाने के तरीकों को परखा। उन्होंने पाया कि वह चुनाव कर बनाए जाते हैं। इस पर नैक टीम ने बदलाव का सुझाव दिया था। डीन विशेषज्ञों को बनाया जाना चाहिए।
- सात सितंबर 2016 को पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) की ओर से पूर्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा गया था जिसमें शासन सुधार करने की बात की गई थी।
- अप्रैल 2016 में शासन सुधार को लेकर सेवानिवृत्त जस्टिस भारत भूषण प्रसून की अध्यक्षता में एक सब कमेटी बनाई गई थी। जून 2018 में इस कमेटी ने वित्तीय मैनेजमेंट को लेकर भी अपनी बात रखी थी।
- चांसलर कार्यालय से आए जवाब में कहा गया कि इतना सबकुछ हुआ, लेकिन अमल नहीं किया गया। सीनेट व सिंडिकेट को समय-समय इन सुझावों पर अमल करना चाहिए था जो नहीं हुआ। इसी को देखते हुए उच्च स्तरीय कमेटी शासन सुधार के लिए बनाई गई।
- यह भी कहा है कि चाहे केंद्रीय विश्वविद्यालय हो या फिर आईआईटी, आईआईएम। सभी की शासन में निर्धारित संख्या में सदस्य हैं, लेकिन यहां 91 सदस्य सीनेट में हैं जो अधिक हें। इस पर खर्च भी अधिक आता है और समय भी अधिक लगता है।
- पीयू को अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए आगे बढ़ना है। इसलिए रैंकिंग बेहतर आना जरूरी है। इसीलिए शासन सुधार जरूरी है।
यह है उच्चस्तरीय कमेटी
- केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा पंजाब के वीसी एवं सदस्य यूजीसी
- निदेशक आईआईटी रोपड़
- निदेशक आईआईएम अमृतसर
- प्रो. केएन पाठक, पूर्व कुलपति, पंजाब विश्वविद्यालय
- पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति
- यूजीसी चेयरमैन के नॉमिनी
- पंजाब सीएम के नॉमिनी एक विश्वविद्यालय के कुलपति होंगे
- डीपीआई कॉलेज पंजाब सरकार
- निदेशक उच्च शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन
- नॉमिनी ऑफ द चांसलर, पंजाब विश्वविद्यालय
- पंजाब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सदस्य सचिव होंगे
दो माह में जवाब दाखिल करेगी कमेटी
चांसलर एवं उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की ओर से बनाई गई उच्चस्तरीय कमेटी शासन सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट दो माह में चांसलर को सौंपेगी। यह कमेटी पंजाब विश्वविद्यालय में ही अपनी बैठकें करेगी। यहां के हर वर्ग से बात करेगी। चाहे शिक्षक हों या कर्मचारी। हर स्तर पर शासन सुधार के लिए आने वाले सुझावों पर काम करेगी।