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Chandigarh News: पर्यटकों का ट्रांजिट पाॅइंट बन कर रह गया चंडीगढ़
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चंडीगढ़। खूबसूरत प्लानिंग, वास्तुकला, रॉक गार्डन, सुखना लेक और कैपिटल कॉम्प्लेक्स के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाला चंडीगढ़ अब भी बड़े पर्यटन गंतव्य के बजाय हिमाचल जाने वाले पर्यटकों के लिए ट्रांजिट पाॅइंट बनकर रह गया है। शहर में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन ज्यादातर पर्यटक यहां कुछ घंटे या अधिकतम एक-दो दिन रुकने के बाद हिमाचल की ओर रवाना हो जाते हैं। तीन वर्षों में पर्यटन विभाग के लिए 33.26 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किए जाने के बावजूद शहर में पर्यटकों का ठहराव बढ़ाना चुनौती बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में चंडीगढ़ में कुल 3,97,089 पर्यटक पहुंचे। इनमें 3,65,591 घरेलू और 31,498 विदेशी पर्यटक थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 10,37,663 हो गई। इसमें 9,98,605 घरेलू और 39,058 विदेशी पर्यटक शामिल थे। वहीं, वर्ष 2025 में 11,83,503 घरेलू और 39,502 विदेशी पर्यटक पहुंचे। इस तरह कुल संख्या 12,23,005 रही।
औसत ठहराव एक रात से भी कम
पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बावजूद उनके ठहरने का समय शहर के लिए चिंता का विषय है। वर्ष 2023 में पर्यटकों के कुल 2,88,302 बेड नाइट्स दर्ज किए गए। उस वर्ष 3,97,089 पर्यटकों के मुकाबले यह औसत ठहराव एक रात से भी कम बैठता है। यह आंकड़ा होटल और पंजीकृत आवासों में दर्ज बेड नाइट्स पर आधारित है।
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चंडीगढ़ पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट भी शहर को हिमाचल के कसौली, चैल, शिमला और मनाली जैसे पर्यटन स्थलों का प्रवेश द्वार बताती है। हिमाचल पर्यटन भी चंडीगढ़ को राज्य के कई हिस्सों तक पहुंचने वाले प्रमुख एयर और रोड गेटवे में शामिल करता है। ऐसे में चंडीगढ़ में आने वाले बड़ी संख्या में पर्यटकों का अंतिम गंतव्य हिमाचल ही रहता है।
100 करोड़ से अधिक का मास्टर प्लान
चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2025 में 100 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यटन मास्टर प्लान तैयार किया है। इसका उद्देश्य शहर को सिर्फ हिमाचल जाने वाले पर्यटकों के पड़ाव के बजाय मस्ट-विजिट पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना है। योजना में नए पर्यटन अनुभव विकसित करने, डिजिटल सुविधाएं बढ़ाने और मौजूदा पर्यटन स्थलों के उन्नयन पर जोर दिया गया है।
पर्यटक कुछ घंटे रुककर हिमाचल की ओर निकल जाते हैं
हमारी ज्यादातर बुकिंग हिमाचल की होती है। चंडीगढ़ से कैब, टैक्सी या टैंपो ट्रेवलर के माध्यम से पर्यटक आगे जाते हैं। इसी बीच का जो समय मिलता है, वह चंडीगढ़ में बिताते हैं। कई पर्यटक तो चंडीगढ़ आते हैं और बिना समय गंवाए यहां पांच से सात घंटे बिताकर निकल जाते हैं। दरअसल शहर में पर्यटन स्थल की बात करें तो रोज गार्डन, रॉक गार्डन, सुखना लेक के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। -अंकुश चड्ढा, ट्रेवल कंसल्टेंट
तीन-चार स्पॉट देखने के बाद पर्यटक निकल जाते हैं
चंडीगढ़ की बात करें तो पर्यटन के लिहाज से यहां सिर्फ तीन से चार पॉइंट हैं। यहां आने वाले लोग तीन से चार स्पॉट पर घूमकर और शहर को देखकर निकल जाते हैं। प्रशासन ने प्रयास जरूर किया कि सुखना लेक में क्रूज लाया जाए लेकिन यह नाकाफी है। सुविधाएं बेहतर की जातीं जिसमें लोग एंज्वाय कर पाते तो शायद यहां लोग कुछ दिन ठहरते भी। -हंस राज कौशल, ट्रेवल कंसल्टेंट
तीन साल में पर्यटन बजट 33.26 करोड़
वित्तीय वर्ष
पर्यटन विभाग का बजट
2022-23
11.15 करोड़
2023-24
9.73 करोड़
2024-25
12.37 करोड़
कुल
33.26 करोड़
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में चंडीगढ़ में कुल 3,97,089 पर्यटक पहुंचे। इनमें 3,65,591 घरेलू और 31,498 विदेशी पर्यटक थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 10,37,663 हो गई। इसमें 9,98,605 घरेलू और 39,058 विदेशी पर्यटक शामिल थे। वहीं, वर्ष 2025 में 11,83,503 घरेलू और 39,502 विदेशी पर्यटक पहुंचे। इस तरह कुल संख्या 12,23,005 रही।
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औसत ठहराव एक रात से भी कम
पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बावजूद उनके ठहरने का समय शहर के लिए चिंता का विषय है। वर्ष 2023 में पर्यटकों के कुल 2,88,302 बेड नाइट्स दर्ज किए गए। उस वर्ष 3,97,089 पर्यटकों के मुकाबले यह औसत ठहराव एक रात से भी कम बैठता है। यह आंकड़ा होटल और पंजीकृत आवासों में दर्ज बेड नाइट्स पर आधारित है।
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चंडीगढ़ पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट भी शहर को हिमाचल के कसौली, चैल, शिमला और मनाली जैसे पर्यटन स्थलों का प्रवेश द्वार बताती है। हिमाचल पर्यटन भी चंडीगढ़ को राज्य के कई हिस्सों तक पहुंचने वाले प्रमुख एयर और रोड गेटवे में शामिल करता है। ऐसे में चंडीगढ़ में आने वाले बड़ी संख्या में पर्यटकों का अंतिम गंतव्य हिमाचल ही रहता है।
100 करोड़ से अधिक का मास्टर प्लान
चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2025 में 100 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यटन मास्टर प्लान तैयार किया है। इसका उद्देश्य शहर को सिर्फ हिमाचल जाने वाले पर्यटकों के पड़ाव के बजाय मस्ट-विजिट पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना है। योजना में नए पर्यटन अनुभव विकसित करने, डिजिटल सुविधाएं बढ़ाने और मौजूदा पर्यटन स्थलों के उन्नयन पर जोर दिया गया है।
पर्यटक कुछ घंटे रुककर हिमाचल की ओर निकल जाते हैं
हमारी ज्यादातर बुकिंग हिमाचल की होती है। चंडीगढ़ से कैब, टैक्सी या टैंपो ट्रेवलर के माध्यम से पर्यटक आगे जाते हैं। इसी बीच का जो समय मिलता है, वह चंडीगढ़ में बिताते हैं। कई पर्यटक तो चंडीगढ़ आते हैं और बिना समय गंवाए यहां पांच से सात घंटे बिताकर निकल जाते हैं। दरअसल शहर में पर्यटन स्थल की बात करें तो रोज गार्डन, रॉक गार्डन, सुखना लेक के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। -अंकुश चड्ढा, ट्रेवल कंसल्टेंट
तीन-चार स्पॉट देखने के बाद पर्यटक निकल जाते हैं
चंडीगढ़ की बात करें तो पर्यटन के लिहाज से यहां सिर्फ तीन से चार पॉइंट हैं। यहां आने वाले लोग तीन से चार स्पॉट पर घूमकर और शहर को देखकर निकल जाते हैं। प्रशासन ने प्रयास जरूर किया कि सुखना लेक में क्रूज लाया जाए लेकिन यह नाकाफी है। सुविधाएं बेहतर की जातीं जिसमें लोग एंज्वाय कर पाते तो शायद यहां लोग कुछ दिन ठहरते भी। -हंस राज कौशल, ट्रेवल कंसल्टेंट
तीन साल में पर्यटन बजट 33.26 करोड़
वित्तीय वर्ष
पर्यटन विभाग का बजट
2022-23
11.15 करोड़
2023-24
9.73 करोड़
2024-25
12.37 करोड़
कुल
33.26 करोड़