{"_id":"58cc397d4f1c1b277532a033","slug":"chandigarh-harjinder-kaur-chairperson-of-the-commission-for-protection-of-child-rights","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व मेयर हरजिंदर कौर बनीं कमीशन की चेयरपर्सन, प्रशासक ने दी मंजूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व मेयर हरजिंदर कौर बनीं कमीशन की चेयरपर्सन, प्रशासक ने दी मंजूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 18 Mar 2017 09:32 AM IST
विज्ञापन
हरजिंदर कौर
- फोटो : File Photo
पूर्व मेयर हरजिंदर कौर को चंडीगढ़ कमीशन फार प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने उनके नाम को मंजूरी दी है। ऐसा भी पहली बार हुआ है कि जब किसी राजनीतिक दल से जुड़े नेता को कमीशन का चेयरपर्सन बनाया गया हो। हरजिंदर कौर की नियुक्ति में भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन की अहम भूमिका मानी जा रही है। चेयरपर्सन बनने के बाद हरजिंदर कौर ने शाम को गवर्नर हाउस पहुंचकर प्रशासक का आभार जताया है।
हरजिंदर कौर 4 बार पार्षद रह चुकी हैं। पिछले साल दिसंबर में 5वीं बार निगम चुनाव में जब उन्होंने शिअद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया तो छंटनी के दौरान उनका नामांकन खारिज हो गया था। कांग्रेस ने उन पर आरोप लगाया गया था कि हरजिंदर कौर ने जानबूझकर नामांकन खारिज करवाया है। उनकी कवरिंग कैंडिडेट भाजपा की प्रदेश सचिव बलविंदर कौर ने चुनाव लड़ा था, हालांकि वह चुनाव हार गईं थीं। नामांकन खारिज होने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि प्रशासन की ओर से हरजिंदर कौर को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। नामांकन खारिज करने के फैसले को हरजिंदर कौर ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी।
इसी कमीशन ने मेयर को दी थी क्लीन चिट
समाज कल्याण विभाग की शिकायत पर पुलिस ने मेयर आशा जसवाल के खिलाफ स्नेहालय में जबरदस्ती घुसने के आरोप में केस दर्ज किया था, लेकिन चाइल्ड कमीशन की रिपोर्ट पर उन्हें क्लीन चिट मिली थी। उस समय कमीशन की चेयरपर्सन देवी सरोही थी। देवी सरोही ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन ही प्रशासन को मेयर को क्लीन चिट देते हुए रिपोर्ट दी थी। चाइल्ड कमीशन के चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हरजिंदर कौर 4 बार पार्षद रह चुकी हैं। पिछले साल दिसंबर में 5वीं बार निगम चुनाव में जब उन्होंने शिअद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया तो छंटनी के दौरान उनका नामांकन खारिज हो गया था। कांग्रेस ने उन पर आरोप लगाया गया था कि हरजिंदर कौर ने जानबूझकर नामांकन खारिज करवाया है। उनकी कवरिंग कैंडिडेट भाजपा की प्रदेश सचिव बलविंदर कौर ने चुनाव लड़ा था, हालांकि वह चुनाव हार गईं थीं। नामांकन खारिज होने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि प्रशासन की ओर से हरजिंदर कौर को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। नामांकन खारिज करने के फैसले को हरजिंदर कौर ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी।
विज्ञापन
इसी कमीशन ने मेयर को दी थी क्लीन चिट
समाज कल्याण विभाग की शिकायत पर पुलिस ने मेयर आशा जसवाल के खिलाफ स्नेहालय में जबरदस्ती घुसने के आरोप में केस दर्ज किया था, लेकिन चाइल्ड कमीशन की रिपोर्ट पर उन्हें क्लीन चिट मिली थी। उस समय कमीशन की चेयरपर्सन देवी सरोही थी। देवी सरोही ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन ही प्रशासन को मेयर को क्लीन चिट देते हुए रिपोर्ट दी थी। चाइल्ड कमीशन के चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का होता है।
विज्ञापन