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अर्बन हीट आइलैंड में बदल रहा चंडीगढ़, 30 साल में न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई दर्ज
Mon, 01 Jul 2019 03:31 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 01 Jul 2019 03:31 PM IST
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गर्मी का मौसम
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बीते मई महीने के तापमान ने आठ साल का रिकार्ड तोड़ा। जून में भी रेगुलर तापमान कभी 40 के ऊपर तो कभी 40 के करीब रिकार्ड किया गया। हर किसी के जुबान से सुना गया कि अबकी बार गर्मी काफी है। यह बिल्कुल सही है कि इस बार गर्मी बढ़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 30 साल में चंडीगढ़ के औसत न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अधिकतम तापमान में फिलहाल कोई बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन जो ट्रेंड हैं, उसके मुताबिक हालात बदलने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकेलिए ग्लोबल वार्मिंग के बजाय शहरवासी और प्रशासन जिम्मेदार हैं।
तापमान में वृद्धि की मुख्य वजह
डीएवी कालेज सेक्टर 10 में भूगोल विभाग के एचओडी प्रो. एमएस सेखों ने बताया कि पिछले कुछ साल में चंडीगढ़ के स्वरूप में काफी बदलाव आया है। पहला कारण, चंडीगढ़ में लगातार निर्माण कार्य का होना। तारकोल की सड़कें और कंकरीट की इमारतें सूरज की रोशनी को अपने अंदर सोखती हैं और उसे रात में छोड़ती हैं। दूसरा कारण, शहर में हरियाली का कम होना। पेड़-पौधे जब सांस लेते हैं तो भाप छोड़ते हैं, जो ठंडक प्रदान करती है। इसे इवेपोट्रांसपाइरेशन कहते हैं, लेकिन पिछले कुछ साल से चंडीगढ़ में काफी पेड़ कम हुए हैं।
इस वजह से इवेपोट्रांसपाइरेशन नहीं हो पा रहा है। यदि होता तो तापमान में कमी आती है। पेड़ सूरज की रोशनी को सीधे आने से रोकते हैं। इससे भी तापमान कम होता है। तीसरा कारण, एयरकंडीशनर और वाहनों से होने वाली गर्मी। चंडीगढ़ में साढ़े 11 लाख से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं और लाखों की संख्या में एयरकंडीशनर हैं, जो कमरे की हवा ठंडी कर बाहर गर्म हवा छोड़ते हैं।
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तापमान में वृद्धि की मुख्य वजह
डीएवी कालेज सेक्टर 10 में भूगोल विभाग के एचओडी प्रो. एमएस सेखों ने बताया कि पिछले कुछ साल में चंडीगढ़ के स्वरूप में काफी बदलाव आया है। पहला कारण, चंडीगढ़ में लगातार निर्माण कार्य का होना। तारकोल की सड़कें और कंकरीट की इमारतें सूरज की रोशनी को अपने अंदर सोखती हैं और उसे रात में छोड़ती हैं। दूसरा कारण, शहर में हरियाली का कम होना। पेड़-पौधे जब सांस लेते हैं तो भाप छोड़ते हैं, जो ठंडक प्रदान करती है। इसे इवेपोट्रांसपाइरेशन कहते हैं, लेकिन पिछले कुछ साल से चंडीगढ़ में काफी पेड़ कम हुए हैं।
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इस वजह से इवेपोट्रांसपाइरेशन नहीं हो पा रहा है। यदि होता तो तापमान में कमी आती है। पेड़ सूरज की रोशनी को सीधे आने से रोकते हैं। इससे भी तापमान कम होता है। तीसरा कारण, एयरकंडीशनर और वाहनों से होने वाली गर्मी। चंडीगढ़ में साढ़े 11 लाख से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं और लाखों की संख्या में एयरकंडीशनर हैं, जो कमरे की हवा ठंडी कर बाहर गर्म हवा छोड़ते हैं।
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तापमान बढ़ने से क्या प्रभाव पड़ेगा
बढ़ते तापमान का सबसे ज्यादा असर कीटों की आबादी पर पड़ता है। गर्म तापमान से मच्छर, चींटी और दीमक की संख्या में बढ़ोतरी होती है। मच्छरों से मलेरिया, डेंगू, इंसेफैलाइटिस और टाइफस का खतरा बढ़ता है। पक्की जमीन होने के कारण पानी भूमि पर नहीं जाता है। इससे मिट्टी सूखी होती है और इनकी संख्या बढ़ती है। ज्यादा गर्मी की वजह से हीट स्ट्रोक और डायरिया जैसी बीमारी भी बढ़ती है। इसके अलावा बारिशों के पैटर्न में बदलाव आएगा। जब जरूरत होगी तब बारिश कम होगी। जब जरूरत नहीं होगी तो बारिश अधिक होगी।
ऐसे रोक सकते हैं बढ़े तापमान को
- प्रोफेसर सेखों के मुताबिक यदि इमारत को सफेद रंग से रंगा जाए तो वह सूरज की रोशनी को कम अवशोषित करता है। इससे गर्मी कम होगी।
- छत को ग्रीन रूफ पर बदलें। छतों या बालकनी पर ज्यादा से ज्यादा पौधे रखें। इससे सूरज की रोशनी सीधे छत या बालकनी पर नहीं आएगी। इससे छतें ठंडी रहेंगी और नीचे का तापमान कम रहेगा।
- शहरों में ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएं। पेड़ वाष्पीकरण के माध्यम से हवा को ठंडा करते हैं और छाया प्रदान कर गर्मी के अवशोषण को कम करते हैं।
- तारकोल से बनाए गए पार्किंग स्थल भी गर्मी बढ़ाने का काम करते हैं। इसके लिए छिद्रित टाइलों का इस्तेमाल करें, जिसमें बीच में घास होती है और नीचे मिट्टी। यह तकनीक 70 फीसदी तक गर्मी अवशोषित को कम करता है।
- सड़कों और फुटपाथ के बिछाने के लिए डामर के बजाय हल्के रंग की कंकरीट का इस्तेमाल कर गर्मी को कम कर सकते हैं।
ऐसे रोक सकते हैं बढ़े तापमान को
- प्रोफेसर सेखों के मुताबिक यदि इमारत को सफेद रंग से रंगा जाए तो वह सूरज की रोशनी को कम अवशोषित करता है। इससे गर्मी कम होगी।
- छत को ग्रीन रूफ पर बदलें। छतों या बालकनी पर ज्यादा से ज्यादा पौधे रखें। इससे सूरज की रोशनी सीधे छत या बालकनी पर नहीं आएगी। इससे छतें ठंडी रहेंगी और नीचे का तापमान कम रहेगा।
- शहरों में ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएं। पेड़ वाष्पीकरण के माध्यम से हवा को ठंडा करते हैं और छाया प्रदान कर गर्मी के अवशोषण को कम करते हैं।
- तारकोल से बनाए गए पार्किंग स्थल भी गर्मी बढ़ाने का काम करते हैं। इसके लिए छिद्रित टाइलों का इस्तेमाल करें, जिसमें बीच में घास होती है और नीचे मिट्टी। यह तकनीक 70 फीसदी तक गर्मी अवशोषित को कम करता है।
- सड़कों और फुटपाथ के बिछाने के लिए डामर के बजाय हल्के रंग की कंकरीट का इस्तेमाल कर गर्मी को कम कर सकते हैं।
तापमान बढ़ने से बारिशों के पैटर्न में बदलाव आएगा। इसलिए इस बारे में हमें अभी से सोचना होगा। यदि नहीं सोचा तो चंडीगढ़ भी गर्म शहरों में बदल जाएगा।
- सुरेंद्र पाल, निदेशक चंडीगढ़ मौसम विभाग
चंडीगढ़ अर्बन हीट आइलैंड में तब्दील हो चुका है। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग नहीं बल्कि हम लोग जिम्मेदार हैं। इस बारे में हम लोगों को सोचना होगा और प्रशासन को आगे आकर दखल देना होगा, तभी इस शहर का भला हो सकता है।
- प्रो. एमएस सेखों, एचओडी भूगोल विभाग डीएवी कालेज सेक्टर 10
- सुरेंद्र पाल, निदेशक चंडीगढ़ मौसम विभाग
चंडीगढ़ अर्बन हीट आइलैंड में तब्दील हो चुका है। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग नहीं बल्कि हम लोग जिम्मेदार हैं। इस बारे में हम लोगों को सोचना होगा और प्रशासन को आगे आकर दखल देना होगा, तभी इस शहर का भला हो सकता है।
- प्रो. एमएस सेखों, एचओडी भूगोल विभाग डीएवी कालेज सेक्टर 10