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Chandigarh: जिस फर्म पर पीजीआई ने लगाया प्रतिबंध, उसी को जीएमएसएच-16 में अलॉट कर दी दुकान
Thu, 03 Nov 2022 11:49 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 03 Nov 2022 11:49 AM IST
सार
स्वास्थ्य विभाग ने जीएमएसएच 16 की शॉप नंबर सात को जिस फर्म को 17 लाख रुपये के मासिक किराए पर टेंडर दिया है, उसे पीजीआई प्रशासन 30 सितंबर 2022 को डिबार घोषित कर चुका है।
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इसी दुकान को किराये पर दिया गया है।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों में दवा की दुकान खोलने में मानकों की अनदेखी कर रहा है। ताजा स्थिति यह है कि पीजीआई ने जिस फर्म को अनियमितता के कारण डिबार घोषित कर दिया है, उसे ही टेंडर अलॉट कर दिया गया। वहीं इस मामले पर अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन चर्चा तेज है। यह भी कहा जा रहा है कि जनता को लाभ देने के नाम पर मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने जीएमएसएच 16 की शॉप नंबर सात को जिस फर्म को 17 लाख रुपये के मासिक किराए पर टेंडर दिया है, उसे पीजीआई प्रशासन 30 सितंबर 2022 को डिबार घोषित कर चुका है।
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उस फर्म को पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की बेसमेंट में शॉप नंबर एक अलॉट की गई थी लेकिन उसने पीजीआई प्रशासन की नोटिस के बावजूद दुकान को एक महीने तक खाली रखा। इसे गलत ठहराते हुए फर्म को डिबार कर अगले एक वर्ष तक किसी भी टेंडर में भाग न लेने का आदेश दिया गया था। वहीं उस पर 5 लाख रुपये की पैनल्टी भी लगाई गई है।
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नियम सारे ताक पर
पीजीआई और जीएमएसएच 16 में लोगों का कहना है कि एक तरफ तो नियम कानून का हवाला देकर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ मानक ताक पर रखकर दुकानें अलॉट की जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार अस्पतालों में आनन-फानन में दुकान और कैंटीन का टेंडर कर दिया गया। इसमें टेंडर कमेटी ने न तो कागजों की जांच की है न ही अन्य मानकों की पड़ताल की गई। इसी वजह से एक के बाद एक नए मामले सामने आ रहे हैं। कैंटीन का टेंडर लेने वाला व्यक्ति समय सीमा गुजरने पर भी पजेशन नहीं ले रहा।
दवा की दुकान के लिए जगह मानक से कम
जीएमएसएच 16 की जिस शॉप नंबर 7 का 17 लाख रुपये में टेंडर किया गया है वह दवा की दुकान के लिए मानक के अनुरूप नहीं है। उस दुकान को पीसीओ के लिए बनाया गया था। दवा की दुकान के लिए मानक के अनुसार लंबाई और चौड़ाई होना आवश्यक है। ऐसे में लंबाई-चौड़ाई को लेकर सवाल उठने पर स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को एरिया का नाप कराया है।
इनमें से एक की भी नहीं हुई अलॉटमेंट
जीएमएसएच 16 की कैंटीन- 9 लाख मासिक किराए पर
जीएमएसएच 16 की दुकान नंबर सात को 17 लाख रुपये मासिक किराए पर
जीएमएसएच 16 की मोर्चरी के पास की मेडिकल शॉप- 7 लाख रुपये के मासिक किराए पर (दोबारा टेंडर कॉल)
मनीमाजरा सिविल अस्पताल की मेडिकल शॉप- 10 लाख रुपये के मासिक किराए पर
सेक्टर 22 सिविल अस्पताल की मेडिकल शॉप- 6 लाख मासिक किराए पर
सेक्टर 45 सिविल अस्पताल की मेडिकल शॉप- 2 लाख रुपये के मासिक किराए पर (दोबारा टेंडर कॉल)
यदि फर्म को जीएमएसएच-16 की ई-निविदा प्रक्रिया से पहले ही ब्लैक लिस्टेड/डिवर्जित कर दिया गया है, तो बोली दस्तावेज के नियम और शर्तो के अनुसार मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। - यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव