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भ्रष्टाचारः रिश्वत देने के बाद भी नहीं मिला हक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 05 Aug 2015 03:06 PM IST
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एस्टेट ऑफिस के बाहर और अधिकारियों के कमरों के सामने सुबह ऑफिस खुलने से पहले फरियादियों की कतारें लग गईं। हर कोई इसी आस में बैठा है कि आते-जाते अधिकारियों की दया भरी निगाहें उन पर पड़ जाएं और काम बन जाए। अधिकारियों की बातों से काम होने का भरोसा जगता भी है, लेकिन बाबुओं की चक्कर लगवाने की आदत भरोसा तोड़ने में देर नहीं लगाती।
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यही कारण है कि फरियादी अधिकारियों की तो तारीफ करते हैं लेकिन निचले अधिकारियों द्वारा दी गई पीड़ा जुबां पर आते देर नहीं लगती। अमर उजाला मंगलवार को फरियादियों का दर्द जानने पहुंचा तो हर कोई अपना केस बताने के लिए टूट पड़ा।
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रिश्वत देने पर भी नहीं हुआ काम
मां गुजर जाए तो बेटे का सब कुछ, बेटा गुजर गया तो मां का कुछ भी नहीं.... वह धक्के खाने केलिए सड़क पर आ जाएगी। अपने इसी सवाल का जवाब खोजने निर्मल कौर एस्टेट ऑफिस का पिछले 12 साल से चक्कर लगा रही हैं। मंगलवार को भी वह असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर प्रिंस धवन का इंतजार करती मिलीं।
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खुड्डा लाहौरा में किराये के मकान में रह रहीं निर्मल कौर अपने इकलौते बेटे को किडनी खराब होने से खो चुकी हैं। बहू, बेटे के रहते ही उससे अलग रहने लगी थीं। उसके बाद भी वह प्रॉपर्टी पर अपना हक जता रही हैं। निर्मल कौर ने बताया कि उसके बेटे और उसका बराबर का हक हर चीज में है।
निर्मल कौर ने बताया कि पीर कॉलोनी टूटने केबाद उसे मकान मिलना है। एस्टेट ऑफिस के एक इंस्पेक्टर ने फाइल आगे बढ़ाने केलिए उनसे 5 हजार रुपये कैश लिए थे। साथ ही 5 हजार काम होने के बाद देने थे। लेकिन बाद में वह इंस्पेक्टर सस्पेंड हो गया।
असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर की तारीफ
निर्मल कौर ने असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर प्रिंस धवन की जमकर तारीफ की। कहा जो फाइलें सालों से दबी पड़ी थीं। उसे उन्होंने एक ही दिन में निकलवा दीं। कइयों के अटके काम हो चुके हैं। उन्होंने उसे काम होने का भरोसा देते हुए प्रथम तल पर बैठे बाबू से मिलने केलिए कहा था। लेकिन नीचे वाले बाबु ने दूसरे तल पर फाइल होने का कह दिया। जब ऊपर गई तो बाबू ने काम करने से साफ इनकार कर दिया। इस तरह वह दर-दर भटक रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उन्हें उनका हक क्यों नहीं दिया जा रहा।
लोगों के केस तेजी से निपटाए जा रहे हैं। विवादित मामलों में थोड़ा समय लगता ही है। स्टाफ को भी लोगों से तहजीब से पेश आने और काम तेजी से करने का आदेश दिया गया है। लोगों से मिलकर उनक केस पर एक्शन लिया जाता है। पब्लिक कैंप भी शुरू किए गए हैं। पॉजीटिव रिजल्ट मिल रहा है।
-प्रिंस धवन, असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर, यूटी