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छोटी-सी नौकरी से ट्रांसपोर्ट किंग बने ये जनाब

Tue, 13 May 2014 02:42 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 13 May 2014 02:42 PM IST
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Chandigarh Enterprenure Interview

न पैसे, न सपोर्ट, सिर्फ लगन, यह लगन ही है जिसने केके अबरोल को नई मंजिल पर पहुंचा दिया। एक समय रहा जब केके अबरोल के पास आने जाने का साधन तक नहीं था पर अब वह सिटी के ट्रांसपोर्ट किंग के रूप में जाने जाते हैं।

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पांच दशक पहले उन्होंने अपना कैरियर सेक्टर-22 की एक नामी फार्मा कंपनी में पैकिंग से शुरू किया। उनकी प्राइवेट लिमिटेड ट्रांसपोर्ट कंपनी में अब 74 ट्रक हैं और कंपनी का सालाना तीस करोड़ का टर्नओवर है। वह करीब दो सौ लोगों को परोक्ष और अपरोक्ष रुप से रोजगार दे रहे हैं।
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चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण कुमार अबरोल ने बताया कि उनके पिता टीबीआरएल में यूडीसी ग्रेड के कर्मचारी रहे। वह मूलरूप से लाहौर के हैं, विभाजन के वक्त पिता लाहौर से कानपुर चले गए। वर्ष 1972 में पिता का ट्रांसफर चंडीगढ़ हुआ।
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उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में नौकरी तलाशी तो सेक्टर-22 में एक फार्मा कंपनी में पैकिंग का काम मिला। उनको ढाई सौ रुपये मिलते थे। कुछ समय बाद पैकिंग से मन भर गया तो ट्रांसपोर्ट एरिया में आ गए। उनको क्लर्क की नौकरी मिली। फिर लुधियाना चले गए।

लुधियाना से लौटे तो 1978 में दोबारा ट्रांसपोर्ट एरिया में साउथ ईस्टर्न कंपनी में काम शुरू किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 में कंपनी ने उनका ट्रांसफर बंगलूरू करने को कहा तो नौकरी छोड़ दी। कंपनी ने 19000 रुपये दिए। इनसे प्लाट नंबर 24 इंडस्ट्रियल एरिया में रोडलाइंस आफ इंडिया के नाम से काम शुरू किया।

उस समय कम्युनिकेशन इतना नहीं था, ऐसे में कंपनी को रोपड़ तक फालो करना होता था। ट्रक खरीदने के लिए पैसे नहीं थे इसीलिए पार्टी बुक कर लेते।

एचएमटी से ट्रैक्टर डिस्पैच का काम
अबरोल ने बताया कि उस समय ट्रैक्टर डिस्पैच करने वाले कोई नहीं थे। उन्होंने एचएमटी को अप्रोच किया और उनको ट्रैक्टर डिस्पैच का काम मिल गया। फिर पंजाब ट्रैक्टर और पंजाब की अन्य ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनियों के लिए डिस्पैच का काम शुरू किया।


वर्ष 1991 में कंपनी का नाम बदला और नितिन रोडलाइंस आफ इंडिया रख दिया। वर्ष 1999 में पूंजी बनी तो पांच-पांच करते दस ट्रक खरीदे। यह सफर जब शुरू हुआ तो चलता गया।

तीस लाख टैक्स, तीस करोड़ का टर्नओवर
केके अबरोल ने बताया कि अब उनके ट्रांसपोर्ट बिजनेस का तीस करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर है। वह औसतन तीस लाख रुपये का टैक्स जमा करते हैं।
 
सफरनामा

1972-पैकिंग का काम
1973-ट्रांसपोर्ट में क्लर्क
1975-लुधियाना की ट्रांसपोर्ट कंपनी में क्लर्क
1978-1987-चंडीगढ़ की साउथ ईस्टर्न रोडवेज में क्लर्क
अप्रैल 1987-नौकरी छोड़ ट्रांसपोर्ट बुकिंग का काम किया
1987-पहला कांट्रेक्ट, एचएमटी से ट्रैक्टर डिस्पैच का
नवंबर 1991-कंपनी का नाम बदला नितिन रोडलाइंस आफ इंडिया प्राइवेट लिमटेड
1999-दस ट्रक खरीदे
2001-महिंद्रा एंड महिंद्रा का काम किया
यहां होता है काम-यूपी, आंध्र, कर्नाटका, गुजरात, तमिलनाडु और अन्य राज्य

सामाजिक कार्य

बापूधाम में गरीब लड़की की शादी करवाई
मोहाली के ड्रामेटिक क्लब को मदद किया
स्कूलों में वाटर कूलर लगवाए।

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