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बड़ा फैसलाः चंडीगढ़ में अब हर महीने आएगा बिजली का बिल, जानिए क्या कैसे होगा लाभ
Wed, 09 Jan 2019 11:09 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 09 Jan 2019 11:09 AM IST
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बिजली का बिल
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चंडीगढ़ के 2 लाख 19 हजार उपभोक्ता ध्यान दें, बिजली निगम अब हर महीने बिजली का बिल भेजेगा। ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन की मंगलवार को सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम के सभागार में बैठक हुई। बैठक में जेईआरसी के चेयरमैन एमके गोयल ने चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को आदेश दिया कि अब शहर के उपभोक्ताओं को हर महीने बिजली का बिल भेजने की व्यवस्था करें। इस पर चीफ इंजीनियर ने पहले तो अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन बाद में विभाग उपभोक्ताओं के पास प्रतिमाह बिल भेजने पर राजी हो गया है।
जेईआरसी की मेंबर निर्मला माथुर और एमके गोयल ने अंडमान-निकोबार का हवाला दिया और कहा कि दूसरे यूटी राज्यों में भी अब हर माह बिल लेना शुरू कर दिया गया है। इसलिए चंडीगढ़ में भी हर माह बिल लिया जाए। जल्द ही इस व्यवस्था को उन्होंने लागू करने का आदेश दिया। पहले तो मुकेश आनंद और बिजली विभाग के अधिकारी एमपी सिंह ने हवाला दिया कि ऐसा करना फिलहाल संभव नहीं है। जल्द स्मार्ट मीटर लगने जा रहे हैं। इसके बाद व्यवस्था अपने आप बदल जाएगी, लेकिन चेयरमैन एमके गोयल ने कहा कि इसमें कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
एमके गोयल ने कहा कि इसमें बिजली विभाग का ज्यादा फायदा है। एमके गोयल को विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पंजाब व हरियाणा में हर माह 10 किलोवाट से ऊपर वाले उपभोक्ताओं को ही बिजली का बिल भेजा जाता है। इस जवाब पर एमके गोयल संतुष्ट नहीं दिखे। शहर में करीब 2 लाख 19 हजार उपभोक्ता है। प्रतिमाह बिल आने से इन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
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चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के प्रधान नवीन मंगलानी की ओर से जेईआरसी की मीटिंग में चेयरमैन से कहा गया कि बिजली विभाग 20 किलोवाट तक के छोटे उपभोक्ता, 20 से 100 किलोवाट तक के मंझले उपभोक्ता और 100 से अधिक किलोवाट का कनेक्शन लेने वाले को बिजली विभाग बड़ा उपभोक्ता मानता है। इन पर जो फिक्स चार्जेस लोड के हिसाब से लगाए जा रहे हैं। विभाग को इंडस्ट्री में जाकर एक्चुअल लोड चेक करना चाहिए। उसके अनुसार ही चार्जेस लगाए जाने चाहिए।
आउटसोर्सिंग पर रखा जाए स्टाफ
विभाग ने चिंता जताई कि मीटरों की रीडिंग लेने के लिए उनके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इस पर चेयरमैन एमके गोयल ने कहा कि स्टाफ को आउटसोर्सिंग पर लगाने की व्यवस्था करें और तत्काल प्रभाव से हर महीने बिल भेजने की भी व्यवस्था करें। इससे न केवल इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट को फायदा मिलेगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा।
जेईआरसी के निर्देश के बाद भी नहीं मिला रिक्रूट
सेक्टर-36 के रहने वाले कैप्टन आरसी गोयल ने जेईआरसी की मीटिंग में कहा कि जेईआरसी की अप्रूवल के बाद भी यूटी प्रशासन बिजली विभाग व सोलर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए स्टाफ रिक्रूट नहीं कर रहा। बिजली विभाग के स्टाफ से ही सोलर प्रोजेक्ट इंस्टालेशन का काम भी लिया जा रहा है। जेईआरसी ने सोलर पैनल प्रोजेक्ट के लिए चीफ इंजीनियर और स्कॉडा सिस्टम के लिए चीफ इंजीनियर और अन्य लोअर स्टाफ को रिक्रूट करने का आदेश दिया था, लेकिन यूटी प्रशासन नहीं मान रहा।
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जेईआरसी की मेंबर निर्मला माथुर और एमके गोयल ने अंडमान-निकोबार का हवाला दिया और कहा कि दूसरे यूटी राज्यों में भी अब हर माह बिल लेना शुरू कर दिया गया है। इसलिए चंडीगढ़ में भी हर माह बिल लिया जाए। जल्द ही इस व्यवस्था को उन्होंने लागू करने का आदेश दिया। पहले तो मुकेश आनंद और बिजली विभाग के अधिकारी एमपी सिंह ने हवाला दिया कि ऐसा करना फिलहाल संभव नहीं है। जल्द स्मार्ट मीटर लगने जा रहे हैं। इसके बाद व्यवस्था अपने आप बदल जाएगी, लेकिन चेयरमैन एमके गोयल ने कहा कि इसमें कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
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एमके गोयल ने कहा कि इसमें बिजली विभाग का ज्यादा फायदा है। एमके गोयल को विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पंजाब व हरियाणा में हर माह 10 किलोवाट से ऊपर वाले उपभोक्ताओं को ही बिजली का बिल भेजा जाता है। इस जवाब पर एमके गोयल संतुष्ट नहीं दिखे। शहर में करीब 2 लाख 19 हजार उपभोक्ता है। प्रतिमाह बिल आने से इन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
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चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के प्रधान नवीन मंगलानी की ओर से जेईआरसी की मीटिंग में चेयरमैन से कहा गया कि बिजली विभाग 20 किलोवाट तक के छोटे उपभोक्ता, 20 से 100 किलोवाट तक के मंझले उपभोक्ता और 100 से अधिक किलोवाट का कनेक्शन लेने वाले को बिजली विभाग बड़ा उपभोक्ता मानता है। इन पर जो फिक्स चार्जेस लोड के हिसाब से लगाए जा रहे हैं। विभाग को इंडस्ट्री में जाकर एक्चुअल लोड चेक करना चाहिए। उसके अनुसार ही चार्जेस लगाए जाने चाहिए।
आउटसोर्सिंग पर रखा जाए स्टाफ
विभाग ने चिंता जताई कि मीटरों की रीडिंग लेने के लिए उनके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इस पर चेयरमैन एमके गोयल ने कहा कि स्टाफ को आउटसोर्सिंग पर लगाने की व्यवस्था करें और तत्काल प्रभाव से हर महीने बिल भेजने की भी व्यवस्था करें। इससे न केवल इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट को फायदा मिलेगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा।
जेईआरसी के निर्देश के बाद भी नहीं मिला रिक्रूट
सेक्टर-36 के रहने वाले कैप्टन आरसी गोयल ने जेईआरसी की मीटिंग में कहा कि जेईआरसी की अप्रूवल के बाद भी यूटी प्रशासन बिजली विभाग व सोलर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए स्टाफ रिक्रूट नहीं कर रहा। बिजली विभाग के स्टाफ से ही सोलर प्रोजेक्ट इंस्टालेशन का काम भी लिया जा रहा है। जेईआरसी ने सोलर पैनल प्रोजेक्ट के लिए चीफ इंजीनियर और स्कॉडा सिस्टम के लिए चीफ इंजीनियर और अन्य लोअर स्टाफ को रिक्रूट करने का आदेश दिया था, लेकिन यूटी प्रशासन नहीं मान रहा।