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ये भी हो सकता है चंडीगढ़ में चुनावी मुद्दा
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 22 Feb 2014 01:53 PM IST
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गांव में लाल डोरा की सीमा न बढ़ाए जाने से गांव के लोग गुस्से से लाल हैं। लोकसभा के चुनाव आनेवाले हैं। चुनाव लड़ने वाले नेता अपनी घोषणाएं फिर करेंगे, लेकिन इस बार गांव के लोगों में लाल डोरा की चिंता पर अधिक चर्चा होगी।
चंडीगढ़ के 18 गांव में लाल डोरे से बाहर बनाए गए मकानों को रेगुलर करने और उनमें शहरी सुविधाएं मुहैया करवाने का मुद्दा भी काफी देर से चलता आ रहा है। प्रशासन उदासीन रवैया अपनाए हुए है।
इस बार चुनाव में लाल डोरा का मुद्दा गरमाएगा। गांव खुडा अलीशेर के सरपंच हुकुमचंद का कहना है कि इस बार लाल डोरा बढ़ाने का दावा करने वाला ही जीतेगा।
गांव के मुद्दों को पेंडू संघर्ष कमेटी ने लगातार संघर्ष किया है। प्रशासन ने जो वादे किए थे अभी तक पूरे नहीं किए। चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बनेगा। खून पसीने की कमाई से बनाया गया सैकड़ों मकानों पर तलवार लटक रही है।
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लोग हर रोज अपनी नींद खराब कर रहे हैं। जवानी में खरीदी गई जमीन पर बनाए मकान में रहनेवाले बूढ़े हो गए। कई की मृत्यु हो गई, लेकिन यह सपना अधूरा ही है कि यह मकान उनका है।
जोगिंदर सिंह बुड़ैल, महासचिव पेंडू संघर्ष कमेटी चंडीगढ़।
प्रशासन ने भवन निर्माण नियम के दस्तावेज जारी किए हैं। यह गांव के हालतों के विपरीत है। इस नियम को वापस लिया जाना चाहिए। लाल डोरा की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। हर चुनाव में झूठे वादे लाल डोरा बढ़ाने के लिए किए जाते रहे हैं।
साधु सिंह, सरपंच, गांव सारंगपुर।
गांव की समस्या जटिल होती जा रही है। गांव के लोग अब चुप नहीं बैठेंगे संघर्ष और तेज किया जाएगा। ग्रामीण परिवेश को ही प्रशासन खत्म करने की तैयारी कर ली है।
गुरदियाल सिंह, जिला परिषद मेंबर, खुडा अलीशेर
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चंडीगढ़ के 18 गांव में लाल डोरे से बाहर बनाए गए मकानों को रेगुलर करने और उनमें शहरी सुविधाएं मुहैया करवाने का मुद्दा भी काफी देर से चलता आ रहा है। प्रशासन उदासीन रवैया अपनाए हुए है।
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इस बार चुनाव में लाल डोरा का मुद्दा गरमाएगा। गांव खुडा अलीशेर के सरपंच हुकुमचंद का कहना है कि इस बार लाल डोरा बढ़ाने का दावा करने वाला ही जीतेगा।
गांव के मुद्दों को पेंडू संघर्ष कमेटी ने लगातार संघर्ष किया है। प्रशासन ने जो वादे किए थे अभी तक पूरे नहीं किए। चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बनेगा। खून पसीने की कमाई से बनाया गया सैकड़ों मकानों पर तलवार लटक रही है।
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लोग हर रोज अपनी नींद खराब कर रहे हैं। जवानी में खरीदी गई जमीन पर बनाए मकान में रहनेवाले बूढ़े हो गए। कई की मृत्यु हो गई, लेकिन यह सपना अधूरा ही है कि यह मकान उनका है।
जोगिंदर सिंह बुड़ैल, महासचिव पेंडू संघर्ष कमेटी चंडीगढ़।
प्रशासन ने भवन निर्माण नियम के दस्तावेज जारी किए हैं। यह गांव के हालतों के विपरीत है। इस नियम को वापस लिया जाना चाहिए। लाल डोरा की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। हर चुनाव में झूठे वादे लाल डोरा बढ़ाने के लिए किए जाते रहे हैं।
साधु सिंह, सरपंच, गांव सारंगपुर।
गांव की समस्या जटिल होती जा रही है। गांव के लोग अब चुप नहीं बैठेंगे संघर्ष और तेज किया जाएगा। ग्रामीण परिवेश को ही प्रशासन खत्म करने की तैयारी कर ली है।
गुरदियाल सिंह, जिला परिषद मेंबर, खुडा अलीशेर