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Chandigarh: 13 साल से जरूरतमंदों की सेवा कर रहीं डॉ. विजिता, बच्चों की पढ़ाई का भी उठा रहीं खर्चा

Fri, 08 Mar 2024 03:27 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 08 Mar 2024 03:27 PM IST
सार

डॉ. विजिता ने बताया कि पीजीआई में बन रहे मदर एंड चाइल्ड एडवांस सेंटर को उनके पति की कंपनी बना रही है। उन्होंने देखा कि वहां पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चे स्कूल नहीं जाते और वहीं पर खेलते रहते हैं। इसलिए उन बच्चों को पढ़ाने का भी जिम्मा उठाया। उनकी बेटी व अन्य शिक्षकों की मदद से रोजाना करीब 30-35 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

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Chandigarh Dr. Vijita Mehta has been serving needy for past 13 years
बच्चों की जांच करतीं डॉ. विजिता। - फोटो : फाइल

विस्तार

चंडीगढ़ सेक्टर-36 निवासी डॉ. विजिता मेहता पिछले 13 साल से जरूरतमंदों की सेवा कर रही हैं। पेशे से डेंटिस्ट डॉ. विजिता ने कई बच्चों की पढ़ाई का खर्च, एनजीओ के लाइब्रेरी का खर्च और गांवों में जाकर मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन करती हैं। पीजीआई में बन रहे मदर व चाइल्ड एडवांस सेंटर के कर्मचारियों के बच्चों के लिए उन्होंने एक छोटा स्कूल भी खोला है, जहां उनकी बेटी द्वारा 30-35 बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। 

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डॉ. विजिता ने बताया कि वह सात्विकम, श्रीजी एनजीओ की एडवाइजरी बोर्ड में हैं। सात्विकम एनजीओ में किसी भी उम्र के बच्चों को स्किल डेवलपमेंट का कोर्स कराते हैं। इसके लिए पीरमुछल्ला में एक केंद्र चलाया जा रहा है। कोशिश किया जाता है कि उन बच्चों को शामिल किया जाए, जिन्होंने हाल ही में दसवीं व 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। खर्च भी उठाया जाता है। दाखिला लेने से पहले बच्चे के बैकग्राउंड को भी चेक किया जाता है। 
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उन्होंने लॉ डिग्री कर रही एक होशियार छात्रा की पढ़ाई का खर्च भी उठाया हुआ है। श्रीजी एनजीओ की मदद से वह शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर स्वास्थ्य शिविर लगाती हैं। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को किसी भी अन्य बीमारी के लिए पैसों की जरूरत होती है तो मदद की जाती है। ऐसे दर्जनों मरीजों की मदद की गई है। दवाइयों का खर्च भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले बठिंडा में एक गरीब घर टूट गया था, जिसे दोबारा बनाने में मदद की गई थी।
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2011 में आईं चंडीगढ़, सेवा कार्यों में बेटी भी जुटी
डॉ. विजिता ने बताया कि पीजीआई में बन रहे मदर एंड चाइल्ड एडवांस सेंटर को उनके पति की कंपनी बना रही है। उन्होंने देखा कि वहां पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चे स्कूल नहीं जाते और वहीं पर खेलते रहते हैं। इसलिए उन बच्चों को पढ़ाने का भी जिम्मा उठाया। उनकी बेटी व अन्य शिक्षकों की मदद से रोजाना करीब 30-35 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। बताया कि 2011 में वह चंडीगढ़ आई थीं। इसके बाद से ही वह सेवा कार्यों में जुड़ी हुई हैं। उन्होंने युवा स्तंभ एनजीओ की बापूधाम में चल रही लाइब्रेरी का खर्च भी उठाया हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा शिविर में जिन मरीजों की जांच की जाती है। उन्हें एक कार्ड दिया जाता है। शिविर के बाद अगर उन्हें इलाज की जरूरत होती है तो उनका सेक्टर-18 में द डेंटल आर्केड नाम से क्लीनिक है, वहां पर उनका मुफ्त इलाज किया जाता है। उन्होने कहा कि यह सब करने से उन्हें बेहद अच्छा लगता है।

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