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इस बार भी देरी से होंगे पंचायत चुनाव, पूरी नहीं हुई वार्ड बंदी, अप्रैल तक के आसार

Sun, 31 Jan 2021 02:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 31 Jan 2021 02:22 AM IST
सार

  • मतदाता सूची वितरण में लग जाएंगे दो माह
  • महिलाओं के लिए आरक्षण का मामला भी हाईकोर्ट में लंबित
  • 22 जिला परिषद, 6205 पंचायत और 142 ब्लाक समिति के चुनाव कराए जाएंगे

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Chandigarh Delhi news: Panchayat elections will be delayed this time too
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

पिछली बार की तरह इस बार भी प्रदेश में पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर होते नहीं दिख रहे हैं। 24 फरवरी, 2021 को पंच और सरपंचों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन अभी तक पंचायत विभाग की ओर से वार्ड बंदी ही पूरी नहीं की गई है। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि वार्ड बंदी में ही कम से कम एक माह का समय लग सकता है। इसके बाद राज्य चुनाव आयोग को कम से कम दो माह वोटर लिस्ट वितरण से लेकर चुनाव तैयारियों में लगेगा। दूसरा कानूनी पचड़ों के कारण भी देरी हो रही है। ऐसे में पंचायत चुनाव अप्रैल माह से पहले होने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
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अप्रैल में ही किसानों के लिए गेहूं का सीजन होगा और गर्मी अपने चरम पर होगी। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि गर्मी के बीच पंचायती चुनाव को लेकर माहौल गरमाएगा। गौरतलब है कि इस बार 22 जिला परिषद, 6205 पंचायत और 142 ब्लाक समिति के चुनाव होने हैं।
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पिछली बार भी छह माह देरी से हुए थे चुनाव
पांच साल पहले जुलाई 2016 में सरपंचों का कार्यकाल पूरा हो गया था। प्रदेश सरकार द्वारा शैक्षणिक योग्यता की शर्त लगाई गई थी, तो यह मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। इस कारण पिछली बार छह माह देरी से जनवरी 2016 में चुनाव हुए थे। चुनाव परिणाम के बाद 24 फरवरी, 2016 को चुने हुए प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण कराया गया था। इसी को कार्यकाल की शुरुआत माना गया है। गौरतलब है कि 24 फरवरी, 2021 को पांच साल का समय पूरा हो रहा। संविधान और पंचायती राज एक्ट के अनुसार, पांच साल पूरे होने से पहले ही अगले चुनाव होने चाहिए।

महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण पर भी है विवाद
प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का फैसला लिया गया है। इसके विरोध में पंजाब -हरियाणा हाईकोर्ट में पूर्व पंचायत सदस्य कैलाश बाई और स्नेहलता ने याचिका दायर कर फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। 20 जनवरी को हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करके अप्रैल माह तक अपना जवाब देने के लिए कहा है।

पानीपत व रोहतक को छोड़कर 20 जिलों में होनी है वार्डबंदी, 200 नई पंचायतें
अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में केवल दो जिले ही ऐसे हैं, जहां पर पुरानी वार्डबंदी को बदले जाने की जरूरत नहीं है। जबकि शेष सभी जिलों में नए सिरे से वार्ड बंदी की जानी है। क्योंकि इन सभी जिलों में कहीं न कहीं या तो नई पंचायतें बनी हैं या फिर नगरपालिकाओं में गांवों को शामिल किया गया है। नई नगरपालिकाएं और नगर निगम बनाने से भी वार्ड बंदी बिगड़ी है। इसको दुरुस्त करने में कम से कम एक माह का समय चाहिए, बाद में इस पर लोगों की आपत्तियों को भी निपटाना है।

चौधर के लिए गांवों में गरमाने लगा है माहौल
सरकार द्वारा फरवरी माह में ही चुनाव कराने के दावों के बीच चौधर को लेकर गांवों में माहौल गरमाने लगा है। संभावित चुनावों को देखते हुए अभी से गांवों में मजमे लगने लगे हैं और हुक्के की गुड़गुडा़हट के साथ बैठकों का दौर भी चलने लगा है। दावेदार सुबह से रात तक मतदाताओं के घर जाकर हाजिरी लगाने लगे हैं। इसके अलावा, जिला परिषद और ब्लाक समिति के दावेदार नेताओं के यहां भी दस्तक दे रहे हैं।


जैसे ही हमारे पास सरकार की ओर से वार्ड बंदी की लिस्ट भेजी जाएगी, उसके तुरंत बाद आयोग का काम शुरू हो जाएगा। इसमें वोटर लिस्ट वितरण से लेकर चुनाव की तैयारियों समेत कम से कम दो माह का समय लगेगा। फिलहाल हमारे पास वार्ड बंदी को लेकर कोई सूचना नहीं है।-परमाल सिंह, सहायक -चुनाव आयुक्त, हरियाणा राज्य चुनाव आयोग

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