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चंडीगढ़ के डीसी को हाईकोर्ट से मिली राहत, कैट के निर्देश पर रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 03 Nov 2016 11:19 PM IST
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Chandigarh DC Ajit Balaji Joshi
- फोटो : File Photo
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चंडीगढ़ के डीसी-सह-इस्टेट अफसर अजीत बालाजी जोशी को वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राहत दे दी। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की ओर से जारी उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें कैट ने जोशी द्वारा अपने बैंक खाते से वेतन निकालने पर रोक लगाने के साथ-साथ अगली सुनवाई पर कैट के समक्ष पेश होने को निर्देश दिए गए थे।
जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेन्द्र जैन की खंडपीठ ने यह आदेश अजीत बालाजी जोशी की ओर से कैट के निर्देशों के खिलाफ दायर की गई याचिका पर जारी किए। कैट ने एक मामले में आदेशों का पालन न करने पर अजीत बालाजी जोशी के अपने बैंक खाते से सैलरी निकालने पर रोक लगा दी थी। साथ ही उन्हें अगली सुनवाई पर कैट में पेश होने के आदेश भी दिए थे।
यह है मामला
13 जनवरी, 2016 को कैट ने एक सेवानिवृत्त तहसीलदार देवेंदर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन को उनके रिटायरमेंट बेनिफिट जारी करने के आदेश दिए थे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर याचिकाकर्ता ने कैट में अवमानना याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया था कि वह 1976 में बतौर पटवारी भर्ती हुए थे। 38 वर्षों की सर्विस के बाद वह सात मई, 2014 को नौ महीने की अतिरिक्त सेवाओं के बाद तहसीलदार के पद से रिटायर हुए। उनका आरोप था कि अधिकारियों की ओर से उन्हें रिटायरमेंट बेनिफिट जैसे नियमित पेंशन, ग्रेच्युटी का लाभ नहीं दिया गया।
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जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेन्द्र जैन की खंडपीठ ने यह आदेश अजीत बालाजी जोशी की ओर से कैट के निर्देशों के खिलाफ दायर की गई याचिका पर जारी किए। कैट ने एक मामले में आदेशों का पालन न करने पर अजीत बालाजी जोशी के अपने बैंक खाते से सैलरी निकालने पर रोक लगा दी थी। साथ ही उन्हें अगली सुनवाई पर कैट में पेश होने के आदेश भी दिए थे।
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यह है मामला
13 जनवरी, 2016 को कैट ने एक सेवानिवृत्त तहसीलदार देवेंदर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन को उनके रिटायरमेंट बेनिफिट जारी करने के आदेश दिए थे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर याचिकाकर्ता ने कैट में अवमानना याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया था कि वह 1976 में बतौर पटवारी भर्ती हुए थे। 38 वर्षों की सर्विस के बाद वह सात मई, 2014 को नौ महीने की अतिरिक्त सेवाओं के बाद तहसीलदार के पद से रिटायर हुए। उनका आरोप था कि अधिकारियों की ओर से उन्हें रिटायरमेंट बेनिफिट जैसे नियमित पेंशन, ग्रेच्युटी का लाभ नहीं दिया गया।
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