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ओएलएक्स पर विज्ञापन देकर नौकरी का झांसा देने वाले दो जालसाज दिल्ली से गिरफ्तार
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चंडीगढ़। साइबर पुलिस ने ओएलएक्स पर नौकरी का झांसा देकर ठगने वाले दो जालसाजों को दिल्ली-एनसीआर से गिरफ्तार किया है। जालसाजों ने सेक्टर-23 निवासी दो युवतियों को इंडिगो एयरलाइंस में नौकरी देने के नाम पर 60 हजार की चपत लगाई थी। इन आरोपियों में दिल्ली के चंद्र विहार का रहने वाला अभिषेक उर्फ राहुल (24) और दिल्ली के ही मांडवली निवासी अनिल यादव (23) शामिल हैं। पुलिस ने दो लैपटॉप और कई फर्जी जॉइनिंग लेटर बरामद किए हैं। पुलिस ने बुधवार को दोनों को जिला अदालत में पेश कर दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है।
बीते 11 जून को सेक्टर-23/सी निवासी दीपिका और चेतना ने साइबर पुलिस को शिकायत दी थी कि वह इंटरनेट के माध्यम से नौकरी की तलाश कर रही थी। इस दौरान उन्हें ओएलएक्स पर इंडिगो एयरलाइंस में केबिन क्रू और ग्राउंड स्टाफ की नौकरी के लिए एक विज्ञापन मिला। उन्होंने विज्ञापन में दिए मोबाइल नंबर पर अपना बायोडाटा व्हाट्सएप कर दिया। थोड़ी देर पर पर फोन आया कि बायोडाटा का चयन कर लिया गया है। उन्हें अब इंडिगो एयरलाइंस में केबिन क्रू और ग्राउंड स्टाफ की नौकरी के लिए चुना गया है, लेकिन उन्हें पहले अलग कई तरह की फीस जमा करनी होगी। इसके बाद आरोपी ने उन्हें मोटी तनख्वाह का लालच देकर दोनों से 60 हजार रुपये जमा करवा लिए थे, लेकिन जब उन्हें ठगी के बारे में पता चला तो मामले की शिकायत साइबर पुलिस को दी।
जालसाज तक ऐसी पहुंची पुलिस
ठगी की शिकायत मिलने पर साइबर पुलिस इंस्पेक्टर की अगुवाई में टीम गठित की गई। इसके बाद टीम ने ओएलएक्स पर डाले गए विज्ञापन के नंबर से आरोपियों की लोकेशन और युवतियों से पैसे ट्रांसफर हुए खाते का नंबर निकाला। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दिल्ली स्थित एनसीआर में अपना ठिकाना बना रखा है। टीम पिछले तीन-चार दिनों से आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर दोनों को दबोच लिया।
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पुलिस से बचने के लिए छोटी अमाउंट में करते थे ठगी
साइबर पुलिस की जांच में पकड़े गए दोनों आरोपी छोटी-छोटी अमाउंट की ठगी करते थे। इनका मकसद था कि अगर छोटी रकम की ठगी होगी तो ज्यादातर शिकायतकर्ता पुलिस को शिकायत नहीं देंगे। ठगी के पैसों को आरोपी अपने रिश्तेदार के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देते थे। बाद में इन पैसों को आपस में बंटवारा करते थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पहले किसी और के लिए काम कर जालसाजी का सारा हुनर सीख लिया था।
जालसाज ऐसे कर रहे थे ठगी
साइबर पुलिस के मुताबिक, लैपटॉप में सैकड़ों की संख्या में अलग अलग कंपनियों के नाम से फर्जी ज्वाइनिंग लेटर मिले हैं। ये पिछले करीब एक साल से लोगों को निशाना बना रहे थे। ये जालसाज व्हाट्सएप, ईमेल पर चैटिंग और कॉल करके लोगों को मोटी तनख्वाह के लुभावने नौकरी का लालच देकर बायोडाटा मंगवा लेते थे और फिर अलग अलग फीस जमा करने के नाम पर पैसा ट्रांसफर करवा लेते थे। इन जालसाजों की गिरफ्तारी के बाद साइबर पुलिस और भी कई केस सुलझा सकती है।
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बीते 11 जून को सेक्टर-23/सी निवासी दीपिका और चेतना ने साइबर पुलिस को शिकायत दी थी कि वह इंटरनेट के माध्यम से नौकरी की तलाश कर रही थी। इस दौरान उन्हें ओएलएक्स पर इंडिगो एयरलाइंस में केबिन क्रू और ग्राउंड स्टाफ की नौकरी के लिए एक विज्ञापन मिला। उन्होंने विज्ञापन में दिए मोबाइल नंबर पर अपना बायोडाटा व्हाट्सएप कर दिया। थोड़ी देर पर पर फोन आया कि बायोडाटा का चयन कर लिया गया है। उन्हें अब इंडिगो एयरलाइंस में केबिन क्रू और ग्राउंड स्टाफ की नौकरी के लिए चुना गया है, लेकिन उन्हें पहले अलग कई तरह की फीस जमा करनी होगी। इसके बाद आरोपी ने उन्हें मोटी तनख्वाह का लालच देकर दोनों से 60 हजार रुपये जमा करवा लिए थे, लेकिन जब उन्हें ठगी के बारे में पता चला तो मामले की शिकायत साइबर पुलिस को दी।
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जालसाज तक ऐसी पहुंची पुलिस
ठगी की शिकायत मिलने पर साइबर पुलिस इंस्पेक्टर की अगुवाई में टीम गठित की गई। इसके बाद टीम ने ओएलएक्स पर डाले गए विज्ञापन के नंबर से आरोपियों की लोकेशन और युवतियों से पैसे ट्रांसफर हुए खाते का नंबर निकाला। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दिल्ली स्थित एनसीआर में अपना ठिकाना बना रखा है। टीम पिछले तीन-चार दिनों से आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर दोनों को दबोच लिया।
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पुलिस से बचने के लिए छोटी अमाउंट में करते थे ठगी
साइबर पुलिस की जांच में पकड़े गए दोनों आरोपी छोटी-छोटी अमाउंट की ठगी करते थे। इनका मकसद था कि अगर छोटी रकम की ठगी होगी तो ज्यादातर शिकायतकर्ता पुलिस को शिकायत नहीं देंगे। ठगी के पैसों को आरोपी अपने रिश्तेदार के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देते थे। बाद में इन पैसों को आपस में बंटवारा करते थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पहले किसी और के लिए काम कर जालसाजी का सारा हुनर सीख लिया था।
जालसाज ऐसे कर रहे थे ठगी
साइबर पुलिस के मुताबिक, लैपटॉप में सैकड़ों की संख्या में अलग अलग कंपनियों के नाम से फर्जी ज्वाइनिंग लेटर मिले हैं। ये पिछले करीब एक साल से लोगों को निशाना बना रहे थे। ये जालसाज व्हाट्सएप, ईमेल पर चैटिंग और कॉल करके लोगों को मोटी तनख्वाह के लुभावने नौकरी का लालच देकर बायोडाटा मंगवा लेते थे और फिर अलग अलग फीस जमा करने के नाम पर पैसा ट्रांसफर करवा लेते थे। इन जालसाजों की गिरफ्तारी के बाद साइबर पुलिस और भी कई केस सुलझा सकती है।