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बाय बाय 2016: चंडीगढ़ में चर्चित रहे कई केस, खाकी भी हुई दागदार

Tue, 27 Dec 2016 04:24 PM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 27 Dec 2016 04:24 PM IST
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chandigarh crime report in year 2016, many cases sort outed and allegations on police
जुल्फिकार को मिलेगी सजा - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2016 में कई महत्वपूर्ण और चर्चित केसों में जिला अदालत ने फैसले दिए। इनमें रिटायर्ड आईएएस, पुलिसकर्मियों, राजनेताओं से लेकर अपराधियों को सजा हुई।
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इस साल के चर्चित मामलों में कुकर्म के मामले में जुल्फिकार खान, प्रॉपर्टी के कागजात से छेड़छाड़ के मामले में हरियाणा कैडर की रिटायर्ड आईएएस आशा शर्मा, जेल ब्रेक मामले में परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह हवारा, रेप के मामले में चंडीगढ़ पुलिस के कांस्टेबल को 20 साल कैद के अलावा शिअद के दिल्ली बेस नेता को धोखाधड़ी के मामले में दो साल की कैद हुई।

वहीं, इस साल शहर के चर्चित बम ब्लास्ट मामले में सह आरोपी रतनदीप सिंह को अदालत ने बरी कर दिया। इसके अलावा इस साल जिला अदालत ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए।
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साल के सात चर्चित मामलों में आया फैसला

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court
1-जुल्फिकार को सात साल कैद
बच्चों से कुकर्म के मामले में जुलाई 2015 में गिरफ्तार किए गए थिएटर एज नामक संस्था के संस्थापक जुल्फिकार खान को 23 दिसंबर को जिला अदालत ने सात साल की सजा सुनाई। अदालत में उनके खिलाफ कुकर्म के पांच केस चल रहे थे। इनमें से अदालत ने उसे दो केस में बरी कर दिया, जबकि तीन केस में सजा सुनाई।

2- जेल ब्रेक केस में दो दोषी, 14 बरी
11 साल पुराने बुडै़ल जेल ब्रेक केस में इस साल 11 अगस्त को सीजेएम कोर्ट ने परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह हवारा को दोषी पाया। हालांकि, अदालत ने दोनों को कई वर्ष से जेल में होने के कारण उनकी सजा को अंडरगॉन कर दिया। वहीं, मामले में अन्य 14 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

3- रिटायर्ड आईएएस को सजा
यूटी में पोस्टिंग के दौरान पद का दुरुपयोग कर इस्टेट ऑफिस की प्रॉपर्टी से जुड़ी फाइल में छेड़छाड़ के मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने हरियाणा कैडर की रिटायर्ड आईएएस सेक्टर-5 निवासी आशा शर्मा को दोषी पाया। अदालत ने एक सितंबर को आशा शर्मा को तीन साल की सजा सुनाई। मामले में शिकायतकर्ता उनकी मां ही थी। मामला सेक्टर-36बी स्थित एक कोठी के कागजात में जालसाजी से जुड़ा था।

4- खाकी हुई दागदार
महिला अपराध के मामलों की सुनवाई करने वाली अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की अदालत ने शादी का झांसा देकर महिला से दुराचार के मामले में यूटी पुलिस के कांस्टेबल अवतार सिंह को 14 दिसंबर को 20 साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया।

5-दुराचार के मामले में पूरे परिवार को सजा
न्यू इंदिरा कॉलोनी निवासी एक ही परिवार के चार लोगों को जिला अदालत ने इस साल दुराचार और आपराधिक साजिश रचने के मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई। सजा पाने वालों में दो भाई, उनकी बहन और मां शामिल हैं।

6- पलसौरा बेबी मर्डर केस में परिजनों को मिला न्याय
नवंबर 2013 में पलसौरा में 11 वर्षीय बच्ची की अपहरण के बाद निर्मम हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की कोर्ट ने तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले में सुनीता उर्फ बिल्ली को उम्रकैद और पलसौरा निवासी भगत उर्फ मंगा और रोपड़ के राजकुमार उर्फ राजा को ताउम्र कारावास हुई। कोर्ट ने तीनों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया। सुनीता पर 1.10 लाख, राजकुमार और भगत दोनों पर 1.60 लाख रुपये जुर्माना लगाया। यह जुर्माना बतौर मुआवजा मृतका के परिजनों को देने के आदेश हुए थे।

7- 23 साल पुराने केस में सीबीआई कोर्ट ने सुनाया फैसला
सीबीआई कोर्ट ने 23 साल पुराने बिजली चोरी के मामले में भूषण इंडस्ट्री के एमडी बृज भूषण सिंगला को तीन साल की सजा सुनाई। इसके अलावा यूटी इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के छह-छह पूर्व कर्मचारियों को भी 3-3 साल की सजा सुनाई। मामला यूटी के इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट को 3 करोड़ रुपये के नुकसान पहुंचाने से जुड़ा था।

बम ब्लास्ट केस में सहआरोपी बरी
-17 साल पुराने बम ब्लास्ट केस में सहआरोपी और बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकी रतनदीप सिंह को जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। मामला 30 जून 1999 को सेक्टर-34 की पार्किंग में बम ब्लास्ट से जुड़ा है।
- वर्ष 2014 के सबसे चर्चित मॉडल पुनीत संधू मर्डर केस में 15 मार्च 2015 को जिला अदालत ने सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में सुप्रीत, रामलाल, अंजू और मनप्रीत शामिल थे। शहर के चर्चित हत्याकांड में से एक इस केस में सभी आरोपियों का बरी होना चंडीगढ़ पुलिस की सबसे बड़ी नाकामियों में से एक है। केस की शुरुआत से ही पुलिस की जांच संदेह के दायरे में रही है।

इन मामलों में अगले साल फैसले की उम्मीद

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कोर्ट
- शहर के चर्चित ढाबा मालिक की बेटी की गैर इरादतन हत्या के मामले में इस साल फैसला नहीं आ सका। मामला ड्रग की ओवरडोज और गैंगरेप के बाद युवती की गैर इरादतन हत्या के मामले से जुड़ा है। आरोपियों में पीयू का स्टूडेंट सेक्टर-51 निवासी रजत बेनीवाल, ढाबा मालिक सेक्टर-56 निवासी कमल सिंह और एक अन्य छात्र मोहाली फेज-10 निवासी दिलप्रीत सिंह है।
- पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड और जेल ब्रेक मामले में बचे अंतिम आरोपी जगतार सिंह तारा के खिलाफ दोनों केस में ट्रायल शुरू हो चुका है। वर्ष 2017 में दोनों मामलों में फैसला आने की उम्मीद है।
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