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आग के गोलों से गुजरती है जिंदगी, चूमती है आसमान भी...
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 26 Nov 2017 01:10 AM IST
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chandiagrh carnival
- फोटो : अमर उजाला
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तीन दिवसीय कार्निवाल के दूसरे दिन भी लोगों ने इस मेले का खूब आनंद लिया, फिर चाहे बात घूमने फिरने की हो या खाने पीने की। चारों ओर लोगों की भीड़ देखने को मिली। बच्चे कार्निवाल के लिए बने स्पेशल फलोट्स पर सवारी के साथ-साथ मस्ती करते नजर आए।
इन फलोट्स को आर्ट कालेज के छात्रों ने कार्निवाल के लिए तैयार किया है। कार्टून थीम से बने फलोट्स बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इन्हें बनाने में छात्रों ने खूब मेहनत की है, इंद्रधनुष के रंगों से सजाया है।
दूसरे दिन इस मेले की रौनक बाजीगरों की बाजीगरी रही। जहां लोगों के लिए जिंदगी की परिस्थितियों से लड़ना आसान नहीं होता, वहीं इन बाजीगरों के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। आग के गोलों से निकलना, एक रिंग से तीन तीन इंसानों का बाहर आना, दो लाठियों के बीच बिना किसी अंतर के खुद को बाहर निकालना और पंद्रह फुट की दूरी से कूदना इनके लिए आसान है।
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इसके अलावा और भी कई खेल बाजीगर दिखा रहे हैं। कार्निवाल मेले के दूसरे दिन लोगों में इन बाजीगरों के लिए काफी उत्साह देखा गया। बाजीगरों की यह टोली पंजाब से आई है। इनका कहना है बाजीगरी दिखाना पंजाब की संस्कृति है और ये सभी पंजाब की संस्कृति को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
इनमें सरदार बावा सिंह, कैप्टन सिंह, हरजिंदर सिंह, जगसीर सिंह, मनदीप सिंह, राजा सिंह, पप्पू सिंह और सतनाम सिंह शामिल है। इसके अलावा लोगों ने रैपलिका की तारीफ की। 2009 से स्कलपचर के रैपलिका लोगों को विरासत के तौर पर दिए जा रहे हैं। जिससे अधिक से अधिक लोग इतिहास को जान सकें।
ट्रांसजेंडरों पर किया गया नाटक
चंडीगढ़ के कार्निवाल के दौरान ट्रांसजेंडरों पर आधारित एक नाटक का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से ट्रांसजेंडरों की समस्याओं की जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि लोगों का नजरिया ट्रांसजेंडरों के लिए कोई अच्छा नहीं है जबकि वह भी इंसान ही हैं। कुदरत ने ही उनको बनाया है। इसमें उनकी क्या गलती है। इसीलिए अब ट्रांसजेंडर भी खुद को समाज के बीच में सशक्त भूमिका में स्थापित करने के लिए पढ़ाई लिखाई कर रहे हैं। उनकी कोशिश भी रंग लाने लगी है।
बीन बजाकर किया इंटरटेन
पानीपत (हरियाणा) से आए कुछ कलाकार कार्निवाल के दौरान बीन बजाकर दर्शकों का मनोरंजन कर रहे थे। इन कलाकारों का कहना था कि अब हरियाणा में यह रीति खत्म होती जा रही है। पहले यह काफी था और अब लोग इसे भूलते जा रहे हैं।
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इन फलोट्स को आर्ट कालेज के छात्रों ने कार्निवाल के लिए तैयार किया है। कार्टून थीम से बने फलोट्स बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इन्हें बनाने में छात्रों ने खूब मेहनत की है, इंद्रधनुष के रंगों से सजाया है।
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दूसरे दिन इस मेले की रौनक बाजीगरों की बाजीगरी रही। जहां लोगों के लिए जिंदगी की परिस्थितियों से लड़ना आसान नहीं होता, वहीं इन बाजीगरों के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। आग के गोलों से निकलना, एक रिंग से तीन तीन इंसानों का बाहर आना, दो लाठियों के बीच बिना किसी अंतर के खुद को बाहर निकालना और पंद्रह फुट की दूरी से कूदना इनके लिए आसान है।
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इसके अलावा और भी कई खेल बाजीगर दिखा रहे हैं। कार्निवाल मेले के दूसरे दिन लोगों में इन बाजीगरों के लिए काफी उत्साह देखा गया। बाजीगरों की यह टोली पंजाब से आई है। इनका कहना है बाजीगरी दिखाना पंजाब की संस्कृति है और ये सभी पंजाब की संस्कृति को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
इनमें सरदार बावा सिंह, कैप्टन सिंह, हरजिंदर सिंह, जगसीर सिंह, मनदीप सिंह, राजा सिंह, पप्पू सिंह और सतनाम सिंह शामिल है। इसके अलावा लोगों ने रैपलिका की तारीफ की। 2009 से स्कलपचर के रैपलिका लोगों को विरासत के तौर पर दिए जा रहे हैं। जिससे अधिक से अधिक लोग इतिहास को जान सकें।
ट्रांसजेंडरों पर किया गया नाटक
चंडीगढ़ के कार्निवाल के दौरान ट्रांसजेंडरों पर आधारित एक नाटक का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से ट्रांसजेंडरों की समस्याओं की जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि लोगों का नजरिया ट्रांसजेंडरों के लिए कोई अच्छा नहीं है जबकि वह भी इंसान ही हैं। कुदरत ने ही उनको बनाया है। इसमें उनकी क्या गलती है। इसीलिए अब ट्रांसजेंडर भी खुद को समाज के बीच में सशक्त भूमिका में स्थापित करने के लिए पढ़ाई लिखाई कर रहे हैं। उनकी कोशिश भी रंग लाने लगी है।
बीन बजाकर किया इंटरटेन
पानीपत (हरियाणा) से आए कुछ कलाकार कार्निवाल के दौरान बीन बजाकर दर्शकों का मनोरंजन कर रहे थे। इन कलाकारों का कहना था कि अब हरियाणा में यह रीति खत्म होती जा रही है। पहले यह काफी था और अब लोग इसे भूलते जा रहे हैं।