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अनसेफ मार्केट्स: आग लगी तो बच नहीं पाओगे

Wed, 11 Jun 2014 11:09 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 11 Jun 2014 11:09 AM IST
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Chandigarh Building Fire: Markets also Not Safe

शहर के प्रमुख बाजारों में अगर आग लगने की बड़ी वारदात हो जाए तो दमकल विभाग की गाड़ी आसानी से नहीं पहुंच पाएंगी। घटनास्थल तक पहुंचने के लिए पार्किंग में जगह चाहिए जो नहीं है। साल 2011 में नगर निगम ने सभी पार्किंग स्थलों में दमकल विभाग की गाड़ी के लिए अलग से जगह तय करने का निर्णय लिया था।

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इसके तहत पार्किंग स्थलों में फायर येलो लाइन बनाई गई थी, जिसमें दमकल विभाग की गाड़ी ही खड़ी होती थी। इसके लिए इंजीनियरिंग विंग की ओर से आपातकालीन सर्विस के लिए पार्किंग में येलो लाइन बनाई थी। लेकिन, समय के साथ-साथ यह धुंधली होती गई।
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नगर निगम ने फिर इस दिशा में कोई काम नहीं किया। हालात यह है कि अब पार्किंगों में जगह खाली नहीं है। शहरवासियों को इसकी जानकारी तक नहीं है। साथ ही नगर निगम ने पेड पार्किंग के प्रवेश द्वार के पास दमकल की गाड़ी के लिए जगह तय की थी।
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बनाई गई थी येलो लाइन

Chandigarh Building Fire: Markets also Not Safe

फायर येलो लाइन बनाने का प्रावधान यह था कि, ताकि आपातकालीन स्थिति में आसानी से दमकल विभाग की गाड़ी पार्क हो जाए और घटनास्थल तक आसानी से पानी बुझाने के लिए पहुंच सके।

जुर्माने का था प्रावधान

साल 2011 में तत्कालीन फायर कमेटी के चेयरमैन दवेंद्र सिंह बबला के नेतृत्व में यह भी निर्णय लिया गया था कि अगर कोई चालक अपना वाहन येलो लाइन में पार्क करता है तो उसके खिलाफ जुर्माना किया जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया है।

सेक्टर-17 को बनाया गया था जीरो टोलरेंस जोन

Chandigarh Building Fire: Markets also Not Safe

सेक्टर-17 को साल 2011 में तत्कालीन मनोनीत पार्षद एमपीएस चावला के नेतृत्व में गठित कमेटी में जीरो टोलरेंस जोन घोषित किया गया था, जिसके तहत यह निर्णय लिया गया था कि यहां अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समय-समय पर अभियान चलाया गया, लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। एमपीएस चावला का कहना है कि उस समय सेक्टर-17 को पूरी तरह से अवैध कब्जों से रहित रखने का निर्णय लिया गया था।

इस समय ये है स्थिति

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-सेक्टर-17 की आरबीआई के सामने पार्किंग, बैंक स्क्वॉयर की पेड पार्किंग, साहिब सिंह और इंपायर स्टोर की पार्किंग के प्रवेश द्वार पर वाहनों की लंबी कतार होती है। वहां दमकल विभाग की गाड़ी खड़ी होने के लिए कोई जगह नहीं है।

-बस स्टैंड के सामने की सेक्टर-22 की मोबाइल मार्केट के अंदर वाहन पार्क होते हैं। वहां वाहनों को सुचारु रूप से चलाने के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं रहता है। यहां साल 2008 में एक बार आग की बड़ी वारदात हो चुकी है। इसमें फायरमैन अमरजीत की मौत हो चुकी है, लेकिन यहां दमकल की गाड़ी आसानी से दाखिल नहीं हो सकती है।

-सेक्टर-9, 8 और 7 के मध्य मार्ग की पार्किंग स्थलों का भी यहीं हाल है। यहां भी येलो लाइन नहीं है।
-सेक्टर-26 मंडी में हर समय काफी भीड़ रहती है। यहां पर आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ी आसानी से नहीं पहुंच सकती।

-सेक्टर-34 और 35 में दोपहर को ही पार्किंग फुल हो जाती है। यहां दमकल की गाड़ी खड़ी होने के लिए जगह नहीं है।
-सेक्टर-22 की शास्त्री और सेक्टर-19 की सदर मार्केट का भी कुछ ऐसा ही हाल है।

छोटी मार्केट्स भी नहीं हैं सेफ

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आग से सिटी की छोटी मार्केट भी सुरक्षित नहीं हैं। सिटी की लाइफ स्टाइल का पर्याय बनीं इन मार्केट्स में रोजाना दो से तीन हजार ग्राहक और दुकानदार मौजूद रहते हैं। लेकिन, यहां आग से बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। सेक्टर-22 की शास्त्री मार्केट, सेक्टर-19 की आजाद मार्केट और रेहड़ी मार्केट की हालत ऐसी ही है।

हालांकि, किसी से परिस्थिति से निपटने के लिए अपने स्तर पर मार्केट ने इंतजाम किए हैं। सेक्टर-22 की रेहड़ी मार्केट में 322 दुकानें हैं। मार्केट में आपात की स्थिति में निकलने के लिए 13 रास्ते हैं। इसमें आग से निपटने के लिए 28 अग्निनिरोधक यंत्र लगे हैं। साथ ही मार्केट में 13 टंकी हैं जिनके पानी का उपयोग आग बुझाने के लिए किया जा सकता है।

ऐसा ही हाल सेक्टर-19 की मार्केट का है। शास्त्री मार्केट के अध्यक्ष श्याम सुंदर अरोड़ा ने कहा कि फायर डिपार्टमेंट को मार्केट को सेफ करने के लिए यहां के लोगों को ट्रेनिंग देनी चाहिए। वहीं, दर्शन सचदेवा ने कहा कि पार्किंग ठीक करने का इंतजाम करना चाहिए। जगतार सिंह के अनुसार मार्केट में 60 फीसदी कपड़ा व्यापारी हैं।

ये कहना है अधिकारियों का

Chandigarh Building Fire: Markets also Not Safe

येलो लाइन की जानकारी नहीं है। अगर, ऐसा है तो फिर से इन लाइनों को इंजीनियरिंग विंग द्वारा बनवाया जाएगा।
कश्मीरा सिंह, सुपरिंटेंडेंट, पार्किंग विंग, नगर निगम

पिछले साल यह निर्णय लिया गया था कि जहां-जहां पर येलो लाइन के लिए जगह तय है, वहां सप्ताह में दो से तीन बार दमकल की गाड़ी खड़ी की जाएं। जिससे शहरवासियों को येलो लाइन के प्रति जागरूक किया जा सके, लेकिन अधिकारियों ने यह प्रस्ताव लागू नहीं किया।
सतप्रकाश अग्रवाल, सदस्य, फायर कमेटी

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