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चंडीगढ़ : पीजीआई में दुकान पर धड़ल्ले से बेची जा रहीं ब्रांडेड दवाएं, अनुमति केवल वैक्सीन बेचने की
Thu, 11 Feb 2021 04:26 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 11 Feb 2021 04:26 PM IST
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चंडीगढ़ पीजीआई
- फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़ पीजीआई में कोरोना काल के दौरान दवा की दुकानों का किराया माफ न होने से 90 प्रतिशत दुकानें बंद हो चुकी हैं। दूसरी तरफ एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के तहखाने (बेसमेंट) में संचालित एक दुकान पर धड़ल्ले से दवाओं की बिक्री की जा रही है जबकि यहां केवल वैक्सीन और डिस्पोजल सिरिंज बेचने की ही अनुमति है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि पीजीआई में जिस दवा की दुकान के लिए महीने में लाख रुपये से ज्यादा किराया भरते हैं, उसी दवा की दुकान को केवल वैक्सीन की दुकान बनाकर महज 40 हजार रुपये महीने के किराए पर चलाया जा रहा है। इसे लेकर पीजीआई के अन्य दुकानदारों में काफी रोष है।
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दुकान के टेंडर की शर्तों में पहली लाइन में ही साफ तौर पर लिखा गया है कि दुकान में सिर्फ डिस्पोजल सिरिंज और वैक्सीन ही बेची जानी है। इसके अलावा वहां कोई अन्य सामग्री नहीं रखी जा सकती है और न ही बेची जा सकती है लेकिन इस शर्त का धड़ल्ले से उल्लंघन किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी है लेकिन उनकी मिलीभगत से ही दुकान पर धड़ल्ले से ब्रांडेड दवाओं की बिक्री की जा रही है।
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मानकों के अनुसार, जिस दुकान की दो बार शिकायत हो जाती है, उसे आगे विस्तार नहीं दिया जाता लेकिन इस दुकान को लेकर पीजीआई प्रशासन ने इस नियम की अनदेखी करते हुए पूर्व में दुकान के खिलाफ की गई दो शिकायतों को नजरअंदाज कर टेंडर की समय सीमा बढ़ा दी।
इसे लेकर अन्य दवा की दुकान चलाने वालों रोष है। उनका कहना है कि कोरोना के समय नुकसान होने के बावजूद पीजीआई प्रशासन ने उनका किराया माफ करना तो दूर कम भी नहीं किया। इसके कारण उन्हें अपनी दुकान छोड़नी पड़ी। वहीं, दूसरी तरफ पीजीआई प्रशासन उक्त दुकान पर जरूरत से ज्यादा मेहरबान है।
समय सीमा भी मनमानी
टेंडर के निर्देशों के अनुसार, यह दुकान सुबह 8 से शाम 5 बजे तक की खोली जानी है लेकिन इस दुकान पर समय सीमा संबंधी मानकों की भी अनदेखी की जा रही है। दुकान 24 घंटे खोली जा रही है।
वैक्सीन की दुकान में दवा बेचे जाने संबंधी मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा किया जा रहा है तो इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अशोक कुमार, प्रवक्ता, पीजीआई